चाहा है तुमको सनम सिर्फ तुमको ही चाहेंगे
इन ज़िंदगी की राहों में तन्हां  बसर हुई। .. 
सुनो 
         सच    तो यही है न कि अपनी जान की कभी परवाह ही नहीं की  मैनें सिर्फ सिर्फ तुम और  सिर्फ तुम  ही रहे  मेरे जीवन में लेकिन  बड़ा  दुःख और दर्द होता है कि मैं सबकुछ जान कर  समझ  भी मासूम ही बनी रही  और तुम्हें पहले सी शिद्दत से ही चाहती रही ,,,अपनी आँखें ,कान ,नाक सब बंद कर ली कि न कुछ देख सकूँ न सुन सकूँ और न ही खुशबु ले सकूँ ,,,,
इतना सच्चा  होने पर भी  तुम्हें कोई फर्क नहीं कमाल है कहते हैं न इंसान की आदतें कभी नहीं बदलती , खैर  मुझे  क्या , मेरे कर्म  मेरे साथ और तुम्हारे कर्म तुम्हारे साथ , हमेशा ख़ुशी दी है और देती भी रहूंगी हमेशा दुआ दी है और देती भी रहूंगी ,हमेशा अपने शब्दों में दिल में जीवन में शामिल रखा और रखूंगी भी ,
प्रिय शायद कभी कभी तुम्हें भी मेरे दुःख या दर्द का अहसास होता होगा। . क्या पता ,,,,,एक गहरी साँस। ..यह कैसी दू िया है यह कैसा प्रेम है विश्वास है सच्चाई है ओह्ह्ह्हह सनम। ... 
तुम चाहें जैसे भी रहो जहाँ भी रहो खुश रहो ,मैं तो सिर्फ तुम्हारी हूँ कोई मुझे हाथ भी नहीं लगा सकता कोई छू भी नहीं सकता। ... मेरी चाहत , मेरी शिद्दत सिर्फ तुम होी  सिर्फ तुम। .. 
आपके लिए सारी दुनिया भुला दी है मैनें 
और आपके दिल में क्या है जानती तक नहीं। ... 
सीमा असीम 
१६,७,१९ 

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