आज इस कदर याद आई तुम्हारी
कि अश्क आँखों से बहते ही रहे !
सुनो प्रिय ,
आज न जाने क्यों बारिश की तरह मेरी आँखें बरसती रही हालाँकि हर तरफ तेज धूप थी मानों यूँ आग सी चारो तरफ घिरी हुई थी और मैं उसके बीच में विरह जलन से जल जल कर ख़ाक होती हुई फिर जली और न ही और ही कुछ बची, बस यह समझ लो जैसे बिन पानी की तड़पती हुई मछली की तरह मैं नैनो से गिरते हुए नीर के सागर में डुबकियां लगाकर आग के गोले में डूब गयी ,,,,
मेरे सनम न तो ममुझे अब उबरने की खबर है और न ही गहराई में उतर जाने की कि सुध बुध सब गवा दी है मैंने ,सच में नहीं जानती मैं कि तुम मेरे साथ कैसा व्यव्हार कर रहे हो या कैसे अपनी प्रीत निभा रह हो कितने सच हो या कितने झूठ यह भी जानने की ख्वाहिश नहीं है बस इतना जानती हूँ मैं अगर तुम मेरे साथ जरा सा भी गलत करोगे ईश्वर तुम्हारे साथ दसगुना गलत करेगा , तुम्हारे लिए मेरे मन में हमेशा ही बहुत प्रेम था और रहेगा लेकिन तुम्हारी गलतियों पर गलतियां देखती हूँ तो मेरा दिल दुःख जाता है आखिर तुम ऐसे कैसे कर लेते हो और तुम्हें मिल क्या जाता है समझ ही नहीं पाती हूँ मेरा मन दुखता है बहुत ज्यादा लेकिन मैं चुप रहती हूँ क्योंकि कुछ काह देने से बात का मतलब काम हो जाता है न इसलिए मैं सोचती हूँ कि जब तुम्हें समझ आएगी तब तुम्हें अहसास होगा कि तुमने किश तरह से और कितनी गलतियां करके मेरा दिल दुखाया है ,अभी तो मैं बस देखती हूँ और महसूस करती हूँ अहसास तो मुझे हर बात का हो जाता है तुम्हारे बिना कुछ कहे भी मैं सब समझ जाती हूँ क्योंकि मुझे लगता है तुम जो मुझसे कह नहीं पाते हो वो सब तुम्हारी कहानियों में कविताओं में दिख जाता है , सनम कभी तो सच्ची यारी निभाओ मुझसे जिस तरह से मैं तुम्हारे लिए खुद को मिटा रही हूँ खैर जाने दो तुमसे कभी भी कुछ भी कहने का कोई फायदा नहीं तुम जैसे हो वैसे ही रहोगे , तुम्हारी गलत आदतों की वजह से अगर किसी को दुःख पहुँचता है तो भी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ,तुम्हें दर्द नहीं होता न तुम्हारी आँखें नाम होती है , मेरी आत्मा मेरी रूह दर्द से तड़प उठती है जब मैं तुम्हारे मन में अपने लिए कभी गलत बातें महसूस कार्ति हूँ ,
कट तो जायेगी यह ज़िंदगी सनम तुम्हारे प्यार में
बस अफ़सोस है यह कि तुमने प्रीत सच्चाई से नहीं निभाई !!
सीमा असीम
३,७, २०१९
कि अश्क आँखों से बहते ही रहे !
सुनो प्रिय ,
आज न जाने क्यों बारिश की तरह मेरी आँखें बरसती रही हालाँकि हर तरफ तेज धूप थी मानों यूँ आग सी चारो तरफ घिरी हुई थी और मैं उसके बीच में विरह जलन से जल जल कर ख़ाक होती हुई फिर जली और न ही और ही कुछ बची, बस यह समझ लो जैसे बिन पानी की तड़पती हुई मछली की तरह मैं नैनो से गिरते हुए नीर के सागर में डुबकियां लगाकर आग के गोले में डूब गयी ,,,,
मेरे सनम न तो ममुझे अब उबरने की खबर है और न ही गहराई में उतर जाने की कि सुध बुध सब गवा दी है मैंने ,सच में नहीं जानती मैं कि तुम मेरे साथ कैसा व्यव्हार कर रहे हो या कैसे अपनी प्रीत निभा रह हो कितने सच हो या कितने झूठ यह भी जानने की ख्वाहिश नहीं है बस इतना जानती हूँ मैं अगर तुम मेरे साथ जरा सा भी गलत करोगे ईश्वर तुम्हारे साथ दसगुना गलत करेगा , तुम्हारे लिए मेरे मन में हमेशा ही बहुत प्रेम था और रहेगा लेकिन तुम्हारी गलतियों पर गलतियां देखती हूँ तो मेरा दिल दुःख जाता है आखिर तुम ऐसे कैसे कर लेते हो और तुम्हें मिल क्या जाता है समझ ही नहीं पाती हूँ मेरा मन दुखता है बहुत ज्यादा लेकिन मैं चुप रहती हूँ क्योंकि कुछ काह देने से बात का मतलब काम हो जाता है न इसलिए मैं सोचती हूँ कि जब तुम्हें समझ आएगी तब तुम्हें अहसास होगा कि तुमने किश तरह से और कितनी गलतियां करके मेरा दिल दुखाया है ,अभी तो मैं बस देखती हूँ और महसूस करती हूँ अहसास तो मुझे हर बात का हो जाता है तुम्हारे बिना कुछ कहे भी मैं सब समझ जाती हूँ क्योंकि मुझे लगता है तुम जो मुझसे कह नहीं पाते हो वो सब तुम्हारी कहानियों में कविताओं में दिख जाता है , सनम कभी तो सच्ची यारी निभाओ मुझसे जिस तरह से मैं तुम्हारे लिए खुद को मिटा रही हूँ खैर जाने दो तुमसे कभी भी कुछ भी कहने का कोई फायदा नहीं तुम जैसे हो वैसे ही रहोगे , तुम्हारी गलत आदतों की वजह से अगर किसी को दुःख पहुँचता है तो भी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ,तुम्हें दर्द नहीं होता न तुम्हारी आँखें नाम होती है , मेरी आत्मा मेरी रूह दर्द से तड़प उठती है जब मैं तुम्हारे मन में अपने लिए कभी गलत बातें महसूस कार्ति हूँ ,
कट तो जायेगी यह ज़िंदगी सनम तुम्हारे प्यार में
बस अफ़सोस है यह कि तुमने प्रीत सच्चाई से नहीं निभाई !!
सीमा असीम
३,७, २०१९

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