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गतांक से आगे  सजना है मुझे सजना के लिए हर अंग का रंग निखार लूँ  अपनी उलझी लटें संबार लूँ कि सजना है मुझे सजना के लिए !!  सुनो प्रिय,                 आज जी चाहता है कि खुद को ही प्रेम कर लूँ ,,,खुद को आइने में निहारते हुए यही ख्याल मन में आया था क्योंकि आईने को देखते समय मैं खुद को नहीं तुम्हें देखने लगती हूँ और मेरा प्रेम तुम्हें देखकर मुस्करा पड़ता है ...मैं तुम्हें अपनी पलकों में बंद करके तुम्हारी बालाएँ लेने लगती हूँ कि कहीं नजर न लग जाये ...मेरे प्रिय आज नव वर्ष के पहले दिन सूर्योदय होते ही ढेरों खुशियों की किरने बिखर जाएँ ......आँखों में भरे सतरंगी सपनों में रंग भरते हुए उनमें खुशियों के पंख लग जाएँ .... भोर की पहली लाली मन की पवित्रता को और कुछ ज्यादा पवन कर दे मिटा दे मन के सारे मैल और ले आए मेरे प्रिय का प्रेम संदेश जो पल पल दिल कहता रहता है दिल से ......सुनो मेरे प्रिय कुछ कहने की जरूरत ही कहाँ होती है जब दिल, हर पल में दिल से बातें करता रहता है कितना कुछ कहता है कभी मुस्कराता ,,कभ...
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गतांक से आगे यूं ही दिन महीने साल गुजरते चले जाएँगे हम प्यार में जीते और मरते चले जाएंगे !! सुनो प्रिय,                 मैं तुम्हारे लिए जाते हुए साल का आखिरी पत्र लिख रही हूँ , हर दिन एक पत्र तुम्हें लिखती रही हूँ ... न जाने तुम्हें कब यह मिलेंगे ? न जाने कब तुम इनका जवाब लिखोगे ? न जाने कब मुझे वो प्राप्त होंगे ? न जाने कब तक राह तकूँगी ? लेकिन मेरा इतना वादा है खुद से ही क्योंकि खुद से किया गया वादा कभी झूठा नहीं होता ...इंसान सबसे झूठ बोल सकता है .... सबसे अपनी बातें छुपा सकता है परंतु वो अपनी अंतरात्मा से कुछ नहीं छिपा सकता ...उससे झूठ नहीं बोल सकता ......तो खुद से ही वादा करती हुई कहती हूँ मैं आने वाले साल में भी तुम्हारे लिए यूं लिखती रहूँगी ....यूं ही तुम्हें जीती रहूँगी .....यूं ही तुम्हारे लिए मरती रहूँगी ......कोई फर्क नहीं पड़ेगा मेरे प्रेम में, न कम होगा न ज्यादा होगा,  हाँ शायद ज्यादा हो सकता है ....... राह में आने वाले काँटों की परवाह किए बगैर चलती रहूँगी, देखे  येकांटे किस तरह ...
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रूह सृष्टि में चाँद जब मुस्कराएगा सूरज आसमां के पीछे दुबक जायेगा घनघोर घटाए भी भूलेंगी बरसना उस पल कुछ पल को धरती भी थमेगी, ठिठक जाएगी, भूल जाएगी घूमना तब कल्पनाओं में मैं तुम्हें अपने करीब पाऊँगी तुम्हारे मौन में भी तुमको सुनती रहूँगी और वे जानी पहचानी सी धड्कने संग संग धडकने लगेंगी समा जायेगी उस वक्त मेरी रूह में तुम्हारी रूह तब महक उठेगा हमारा पारदर्शी सच्चा प्रेम चन्दन सा सुनो प्रिय, रुई के नर्म फाये सा झरता हुआ बर्फ एकटक निहारती हुई मेरी आँखें बना देगी तुम्हारा अक्स मुस्कुराता हुआ टकटकी लगाये मेरी ओर प्रेम से निहारता हुआ यह प्रेम ही है जो धड़कता है धड़कनों में  उस प्रिय का नाम उच्चारित करता हुआ आसमा और धरा का नाम !! सीमा असीम
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गतांक से आगे आपके ख्यालों से पल भर निकलती नहीं  खुद में हूँ ही नहीं, आप में हूँ मैं कहीं ! हर लम्हा आपकी बाते याद करती हूँ मैं  महफूज इस तरह खुद को रखती हूँ मैं !! सुनो प्रिय,              आपका मेरे जीवन में होने भर से ही ज़िंदगी फूलों सी महकती है और मन खिला रहता है ...यह सुख, दुख, दर्द, आशा, निराशा, मिलना, बिछुड्ना, खोना, पाना तो मात्र क्षण भर को ही आते हैं लेकिन मन तो हमेशा, हर हाल में तुम में ही लगा रहता है और मैं हवाओं से छन छन के आती हुई इस सुगंधित खुशबू से सराबोर होती रहती हूँ .....मुझे मिटाकर सिर्फ प्रेम बचा रहता है, मैं उस वक्त कभी शरमाती हूँ, कभी मुसकाती हूँ, कभी गुनगुनाती हूँ, तो कभी मेरे पाँव थिरक उठते हैं..... पूरी दुनियाँ रंगों से भरी नजर आती है, प्रेम रंग में रंगी मैं तुम्हारी खुशियों के लिए हर कोशिश करती हूँ ताकि प्रेम सर्वत्र व्याप्त रहे ....पता है प्रिय प्रेम का कोई भी रंग नहीं होता ....कोई भाषा नहीं  ...कोई लय नहीं ...कोई राग नहीं ...कोई गीत नहीं ...कोई गान नहीं ....फिर भी प्रिय आपके ह...
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गतांक से आगे  हर  घड़ी खुद से ही उलझती सुलझती रहती हूँ  मैं तो कश्ती भर हूँ तू ही है सागर, साहिल मेरा !! सुनो प्रिय,             मैं दर्द जितना लिखती हूँ उससे भी कहीं ज्यादा अनलिखा रह जाता है न जाने यह दर्द कहाँ से उभर आता है ...... अपनी वफा के सहारे काट लेती हूँ मैं अपने दिन रात फिर नम आँख क्यों न मुस्कराये ,,,,हँस हँस के लूटा देंगे  हम अपने प्यार की दौलत बिना गिला के,  सपनों में सहारा बन के तुम बार बार आए.....सुनो प्रिय  यह जो किस्मत ने तुम्हारा नाम मेरी हथेली पर उकेर दिया है उसे बार बार चूम के मुस्करा लेती हूँ और उस रब का शुक्रिया करके बार बार माथे से लगा लेती हूँ ....... मेरे प्रिय जब मैं अपने दर्द उड़ेलते अशकों को रोक नहीं पाती और धड़कनें बेसाख्ता धड़कती हैं तब मैं अपनी आँखें कस कर बंद कर लेती हूँ और दिल की अतल गहराईयों में उतर जाती हूँ....अपनी बेबसी, बेकली, बेचैनी सब तुमसे कहने लगती हूँ, सब कुछ कह कर जब हल्की होती हूँ, उस समय तुम मुस्कराते हुए कोई प्रेम गीत गुनगुना रहे होते हो .....प्रिय...
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गतांक से आगे  न नींद आए न करार दिल को आए  चुपके से आकर वे प्रेम गीत सुनाये ! सुनो प्रिय                आज चाँद के संग संग तुम चले आए मैं निहारती रही उस चाँद को देर तलक अपनी भाव बिव्हल आँखों को खोलते और बंद करते हुए .....कितनी ही बातें मन ही मन में उससे कर डाली प्रिय यह चाँद तुम्हारी छवि में तब्दील हो जाता है और आकर बैठ जाता है मेरी खिड़की के मुहाने पर .....मैं शरमा जाती हूँ और वो मंद मंद मुस्कराता रहता है ..उस समय सारा संसार चैन की नींद सोया रहता है और हम दोनों एक दूसरे का साथ निभाते हुए जागते रहते हैं ..दिल का दर्द कम होने लगता है .सुनो प्रिय जब तुम मुस्कराते हो दिल सुकु से भर जाता है , तब न जाने दिल की बेचैनी कहाँ चली जाती है ,,न जाने कहाँ से करार आ जाता है और मैं हल्की हल्की सी होकर हवा से बातें करने लगती हूँ पाँव जमीं पर टिकते ही नहीं..गीत लबों पर थिरक उठते हैं ....लेकिन सूर्य निकलते ही कैसे  तन्हा तन्हा कर जाता है ......  प्रिय मुझे आज तुम बहुत याद आए बहुत ही ज्यादा, मैं तुम्हारी ह...
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गतांक से आगे जो कह देते हो बस वही मान लेती हूँ  रब से खुशियों की दुआ मान लेती हूँ  धड़कनों संग धड़कने वाले मेरे प्रिय  चाँद तारों में भी तुम्हें निहार लेती हूँ !! सुनो प्रिय,               आज अचानक से आसमां की तरफ नजर उठ गयी थी उस जाम में फंसे हुए ...अरे यह क्या तुम कैसे चाँद के बीच में नजर आ गए उस पतले से अर्धचंद्राकार चाँद में खड़े खड़े मुस्करा रहे थे मैं तो तुम्हें नजर भर के देखना चाहती लेकिन कहीं मेरी नजर न तुम्हें लग जाये यह सोचकर मैंने अपनी आँखें बंद कर ली .....और तब तुम मेरे मन में उतर आए मैं तुम्हें फिर कनखियों से झाँकने लगी ........मेरे प्रिय, मेरे प्यारे प्रियतम अब तो हर खुशी तुमसे ही है, जिंदगी भी तुम, बंदगी भी तुम, जान भी तुम और जहां भी तुम .......प्रिय मैं सोचती हूँ कि अब जब मिलन के दिन करीब आ रहे हैं, तब हम तुम्हें कैसे बता पाएंगे कि हमने कैसे दिन गुजारे ? हम कैसे पलछिन तुम्हें नाम लेकर मन ही मन मनका की तरह फेरते रहे ? हम तुम्हें याद कर कर के इतना रोये कि मेरी आँखों में सिंदूरी लालिमा से ...