तू याद यूँ भी न किया कर मुझे इतना

कि मेरी हिचकियाँ मुझे चैन लेने न दें

कर लिया कर बात पल दो पल

 बेवजह ही तू मुझे इतना न सताया कर


देख आसमा में धुंध ही धुंध छाई है

बारिश का कहीं नामोनिशां तक नहीं

घुटन होती होगी तुम्हें भी कभी तो

यह दिल तेरा दरिया सा क्यों नहीं


रात भर करते हैं रक्षा जो हमारे देश की

नमन उनको झुका कर सिर कर लिया करो

जाँ की बाजी लगा देते हैं यह जांबाज

इन्हें अपनी जान की फिक्र तक नहीं!!! 

सीमा असीम


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