सार संक्षेप
उपन्यास –
“और उसने found the way “
लेखिका – सीमा असीम,बरेली
9458606469
उसके बराबर वाले बेड पर सोनिया और प्रियंका
सोते थे लेकिन
आज वह दोनों नहीं है, उनके खाली पड़े बेड उसका मुँह चिड़ा रहे थे । कल सुबह ही वे दोनों अपने
घर के लिए निकल गए थे । उन दोनों के घर करीब ही है लेकिन मानसी, वह कैसे चली जाती, एक तो बुखार और दूसरे उसका घर भी काफी दूर है,
उसे फ्लाइट से ही जाना पड़ता और फ्लाइट में जाने के लिए उसे टेस्टिंग और सारे
चेकअप भी कराने पड़ते तभी उसे एयरपोर्ट पर अंदर जाने को मिलता । अगर कुछ निकल आया तो फिर तो गयी काम से, यही
सोचकर वह यहीं पर रुक गई थी।
क्यों आई मुझे याद
माँ की
माँ तुम क्यों
याद आती है ....
“माँ अक्सर बताती रहती कि तुम्हें
तो इस दुनिया में आना था, इतनी दवाइयां खाने के बाद भी तुम आ गई वरना
हमारी कोई उम्र थोडे ही ना थी बच्चे पैदा करने की । पता है, जब तुम पैदा हुई तब हमारी
उम्र बहुत ज्यादा थी, मुझे तो लगता है कि तुम्हें
तो सीधे स्वर्ग से भगवान ने ही भेजा है कि जाओ और अपने मम्मी पापा के
बुढ़ापे में उनका सूना घर आंगन महका
दो !
मेरा यह
उपन्यास “और उसने found the way“ जिसकी शब्द संख्या करीब 47,630, है।
नायिका
प्रधान यह उपन्यास मुख्यतः मानसी की कहानी है। साथ में
और भी किरदार हैं जैसे माँ, पापा, कबीर, अल्का और
रुचि आँटी आदि ।
बेहद पठनीय और सहज, सरल भाषा-शैली में रचा गया यह एक बहुत ही मार्मिक उपन्यास है। जो आपके अन्तर्मन को झकझोर देगा। यह
उपन्यास – “और उसने found the
way” एक ऐसी मासूम और सरल, सहज लड़की की कथा को लेकर आगे चलता है जिसे अपने ऊपर बहुत विश्वास है। वो अपनी जुनूनी
जज्बे के साथ कदम दर कदम आगे बढ़ती जाना चाहती है जिससे अपने माँ पापा का सहारा बन
सके और उसके साथ होता भी ऐसा है, अपना मनचाहा सब कुछ पा लेती है बस एक कदम की दूरी
रह जाती तभी कुछ ऐसा घट जाता है जिस वजह से वो परेशान हो जाती है। मानसी किसी भी
तरह से अचानक से आई इस परेशानी से निकलने की कोशिश करती है लेकिन किस्मत को न जाने
क्या मंजूर होता है ।
अलका
उसकी बहुत ही प्यारी
और बहुत
ही अच्छी दोस्त है । कितना अपनापन रखती है
इतना तो उसकी अपनी बड़ी
बहन भी शायद नहीं रखती है ।
“मानसी
अलका के साथ अपने घर आ गई और अल्का ने उसे सारी बातें अच्छे से
समझाते हुये कहा, तू परेशान बिल्कुल मत होना, मैं हूं ना तेरे साथ । मानसी यह कोई बीमारी नहीं होती है, न ही कोई छूत की बात है । यह
सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया है, एक चक्र सा है जो 25 से 30 दिन का होता है
इसलिए इसे मासिक धर्म भी कहते हैं । इसमें डरने की कोई बात नहीं होती है”
“:लोगों
की भीड़ लगने लगी थी, मानसी और अल्का एक दूसरे का हाथ थामे
दोनों साथ-साथ घबराए हुए उस भीड़ के
पीछे पीछे चले जा रहे थे । उन्हें डर लग रहा था कि न जाने भाई क्या करेंगे ?अब क्या होगा कमलनयन का? उसे कैसे बचाया
जाये ? अब वे लोग उसके घर के पास पहुंच गए थे । चार
बहनों का
अकेला भाई कमलनयन । अपने
भाई की चीखें और भीड़ का शोरशराबा सुनकर उसकी चारों बहनें घर के बाहर
निकल के आ गयी थी कि
क्या हो गया? क्या
हो गया भाई को? उसी वक्त अलका
के भाई ने उसकी बहनों के सामने ही कमलनयन के पेट में वह लहराता हुआ
चाकू घुसेड दिया
। खून का एक फब्बारा सा आया और सीधे अलका
के मुंह पर गिरा ।”
रूचि आंटी
अपने घर को सम्भालने सजाने सवारने के साथ शायद उसके जीवन की बागडोर अपने हाथ में
लेने को उत्सुक लगने लगी थी ।
“अरे यह क्या बात
हुई मुझे बचपन से ही अपने बेटे की पत्नी के रूप में चुन लिया, क्या मेरे कोई
अरमान नहीं हैं, उस नकचढ़े लड़के के साथ तो मेरा निबाह कतई नहीं
हो सकता ।”
उसका सच्चा
दोस्त कबीर हमेशा उसके साथ ढाल की तरह से खड़ा नजर आता है और सच्ची दोस्ती का फर्ज निभाता जाता है।
सिर्फ
दोस्ती को ही दुनिया का सबसे अच्छा रिश्ता मानने वाली मानसी को जब यह अहसास होता
है कि दुनिया में और भी बहुत कुछ है,
उसके साथ अच्छा
सिर्फ यह हुआ था कि वो चाइना से वापस इंडिया आ गयी थी, नहीं तो न जाने
क्या ही हुआ होता। इन दिनों सब सही रहे, कम से कम अपनों से दूर होने पर भी मिलने की आस
तो बनी ही रहेगी, कभी तो मिलना हो ही जायेगा ।
उसके मन की
सारी गलतफहमियाँ कैसे दूर होती हैं? क़िस तरह से वो उन मुश्किलों से बाहर निकलती है
? कैसे अकेले ही सब परेशानियों से लड़ कर बाहर आती है ? पढना पड़ेगा “और उसने found
the way” इस उपन्यास को ...
बेहद सटीक कथा वस्तु के साथ भाषा शैली भी
प्रभावित करने वाली है । इस उपन्यास में प्रकृति वर्णन के साथ साथ मनुष्य के
मानवीय मूल्यों को भी दिखाया गया है और इंसान के मन की भावनाओं को भी बहुत ही बारीकी से दर्शाया गया है। साथ ही यह उपन्यास कुछ जानकारीपरक बातें
भी उजागर करता है । बहुत ही रोचक, पठनीय और धाराप्रवाह उपन्यास जो अंत तक पाठकों को बांधे रहेगा। पाठक एक ही सिटिंग में पढ़ना चाहेगा क्योंकि इसकी कहानी कहीं पर बाधित
नहीं करेगी और बीच में छोडने का मन नहीं करेगा कि आगे क्या होगा ? अंत में
क्या होगा ? पाठक के मन में लगातार यह जिज्ञासा बनी रहेगी ।
सीमा असीम, बरेली
9458606469
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