वफ़ा
इन उदास पलों में
खामोशियों को अपना साथी बना कर
मौन की चादर ओढ़ कर
इतनी जोर से चीत्कार करूं
कि गूंज जाए सारा आकाश धरती ब्रह्मण्ड
रो रो कर निकाल दूं मन की सारी भड़ास
सारे दुख सारे कष्ट बहा दूँ आंसुओं में
ईश्वर ने दुनिया में इंसानों के रूप में
शैतान बनाए हैं
वफा के बदले में करते हैं हमेशा बेवफाई
उनकी बेवफाई को
कभी याद ना करूं
भुला दूं मैं सारी बेवफाई
बेवफा को नहीं मालूम वफा के मायने
झूठ झूठ हर बार झूठ
कैसे समझाऊं अपने मन को
कैसे मनाऊं मैं अपने मन को
हार जाती हूं
थक जाती हूं
बार-बार हर बार
मुझे जीतना नहीं
मुझे हारना है
लेकिन तुम्हारे सच पर
तुम्हारी झूठ पर नहीं
सीमा असीम

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