मानसी... धारावाहिक कहानी
सुबह हो गई थी और मानसी की आंखों में नींद भर गई, रात भर तो जागती ही रही थी ! कभी मोबाइल पर मूवी देखती या फिर फेसबुक, टुइटर यह सब चलाते हुए पूरी रात गुजार दी थी! अपनी पीजी में वह बिल्कुल अकेली थी सारी सहेलियां, उसके साथ रहने वाली रूममेट वे सब अपने घर चली गई थी मानसी नहीं जा सकी ! क्योंकि उसे हल्का बुखार था और उसे लगा अगर एयरपोर्ट पर उसका बुखार चेक हुआ तो कहीं वह फँस न जाए या फिर उसको कहीं क्वारंटाइन ना कर दिया जाए या फिर कहीं आइसोलेशन के लिए ना भेज दिया जाए !बस यही डर की वजह से वह रुक गई थी कि एक आध दिन में निकल जाएगी लेकिन अगले दिन से ही लॉकडउन लग गया और वह अकेली वही रह गयी !
उसे लगा था कि 1 दिन में बुखार तो उतर ही जाएगा और वह आराम से अगले दिन की फ्लाइट करवा कर निकल जाएगी भले ही ज्यादा पैसे जाए लेकिन घर पहुंच जाएगी, पर उस का सोचा हुआ पूरा नहीं हुआ! बुखार बढ़ गया था ! क्या करें? उसने अपनी मम्मी को फोन किया !
मम्मी ने उसकी आवाज से समझ कर लगा कि उसकी तबीयत सही नहीं है !
मुझसे पूछा क्या तुम सही हो मानसी?
हां मैं बिल्कुल ठीक हूं ! हल्का सा बुखार है, ठीक हो जाएगा !उसने इसलिए कहा कि कहीं मम्मी परेशान ना हो लेकिन उसकी आंखों में आंसू भर गए थे और उसे बोलने में भी तकलीफ हो रही थी !
मां तो आखिर मां ही होती है, वह कैसे नहीं समझ पाती, उसकी आवाज से उसकी परेशानी को समझ लिया कि वह परेशान है और बीमार भी!
मुझसे झूठ बोलती हो ना? तुम्हें समझ नहीं आता कि मां से कभी झूठ नहीं बोल सकते, तुम्हारे बिना कहे भी तुम्हारी हर बात समझती है कि तुम क्या कहना चाह रही हो या तुम्हारे मन में क्या है?
तुम सोच रही हो इस तरह से कहकर मैं खुश हो जाऊंगी नहीं बल्कि मैं दुखी हूं कि तुमने मुझे अपनी सच्ची बात नहीं बताई !
तुम बीमार हो ना?
हां मां मुझे थोड़ा सा बुखार है !
बुखार है? डॉक्टर को दिखाया?
हाँ माँ कल मैं गई थी !
किसके साथ गई थी?
मैं अकेली ही गई थी !
क्यों और सारे बच्चे कहां हैं?
मम्मा वे सब तो निकल गए !
कहां?
अपने घर चले गए !
अब क्या करोगी तुम अकेले? बीमार और अकेले? कैसे मैनेज करोगे सब कुछ?
रुको मैं फोन करती हूं, रुको मैं अभी 1 मिनट में फोन करती हूं ! ठीक है ते हुए मानसी की मम्मा ने फोन रख दिया....
सीमा असीम
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