बेहद उदास
बेहद उदास और आंसू भरी आंखों के साथ मैं लिख रही हूं सच तो यह है कि कभी तुमने मुझे प्यार किया ही नहीं था और ना कभी समझा था प्यार को क्योंकि मैं पहले दिन से आज तक अकेले निभा रही हूं तुमने तो मेरी देगा सादा किया और मुझे छोड़ दिया रोने तड़पने मचलने के लिए अगर प्यार होता तो तुम दूसरी औरतों के प्रति कभी आकृष्ट नहीं होते कभी दूसरी औरत को हाथ भी नहीं लगाते अभी दूसरी औरतों के साथ रिश्ता नहीं निभाते उनकी महफिलों में साथ बैठते मुझे सच में आज दुख इस बात का है कि तुमने मुझे बुलाया फैसला आया और अपना ग्रास बनाया और ठीक वैसा ही तुमने दूसरी औरतों के साथ किया ताज्जुब होता है मुझे कि मैं तुम पर कैसे विश्वास करूंगी कैसे तुम्हें समझूंगी कितना बड़ा शब्द है कितना बड़ा उसका मजाक बना दिया खेल खेल दिया लानत है तुम पर., लानत है तुम पर मैं बार-बार यही शब्द कहूंगी लानत है तुम पर, एक जिस्म को पाने के लिए तुमने ऐसी धोखाधड़ी करें मेरी आत्मा कराहती है तड़पती आत्मा , कितनी दर्द से भरी हुई आंसुओं में डूबी हुई, तुमने मेरा फायदा उठाया है हर बार हर बार,, यह सब मैं नहीं कह रही मेरी आत्मा, मेरा दिल कह रहा है....
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