आज ऋषि को मैडम के ऊपर बहुत तेज गुस्सा आया हालांकि वह हमेशा उनकी बात मान लेती है जैसा वह कहती है वैसा ही करती है लेकिन जब उन्होंने उससे कहा कि साइकिल का कहीं से अरेंज कर लो तो उसे लगा कि मैडम हमेशा उस पर बटन डाल देती है इतना सारा आलू कैसे मैनेज करें इन सब चीजों को कहां से लाए साइकिल अगर है उसके पास साइकिल स्टोर रूम में पड़ी हुई है वह कितनी गंदी है उसको उठाकर निकालकर साफ करना और कितना टाइम जाएगा 2 घंटे का टाइम है बस मेरे पास उसमें मैं ना आराम कर पाऊंगी ना मैं खुद सोचो पाऊंगी ना मैं उसे अच्छे से प्ले को फिर कर पाऊंगी लेकिन मैडम को यह सब बातें कहां समझ आती है वह तो बस कह देती है और मैं कहने से मतलब है मैडम मुझसे नहीं हो पाएगा मैं आपको बोल रही हूं प्लीज 2 घंटे का टाइम है मैं कैसे कर पाऊंगी सब कुछ नहीं अब मैं घर पर कहूंगी भाई को या किसी को तो वह मेरी डांट लगाएंगे एक तो मैं कैसी तरह से समय निकालकर घर में सबको कह कर मना कर प्ले करती हूं आपकी वजह से और आप मेरे ऊपर हमेशा कोई ना कोई ऐसा वर्णन डाल देती है जिससे मुझे बहुत परेशानी होती है मैं मेंटली परेशान हो जाती हूं अपने अगर साइकिल निकालकर साफ करूंगी फिर उसको मैं लेकर कैसे आऊंगी मैं अपने भाई से तो नहीं कह सकती अगर मैं उनको कहूंगी तो वह नहीं समझेंगे बल्कि मुझे कहेंगे तू क्यों करती है यह सब चीजें क्यों अपना समय बर्बाद करती है क्यों अपने आप को वेस्ट कर रही है क्यों नहीं समझती इससे कुछ फायदा नहीं होने वाला जैसे कि मैं और और कुछ काम करती ही नहीं हो या मेरे पास कोई और काम है ही नहीं सिवाय प्ले कर जब मैं भी कभी भी प्लीज से इन वॉल होती हूं तो सिर्फ प्ले प्ले प्ले और उसके अलावा ना ऑफिस में घर ना खुद का ख्याल ना कुछ इतना बहुत मुश्किल होता है मैडम प्लीज हेल्प करो आज साइकिल का कहीं से अरेंज कर लो बेटा मैं अगर अरेंज कर पाती तो क्या मैं तुमसे कहती तो इतनी बातें कर रही हो इतनी देर में तुम साइकिल को निकालो साफ करो और तुम रिक्शे में रख कर ले आओ मैं तुम्हें उसके अलग से पैसे दे दूंगी ऋषि ने मन ही मन सोचा हां यह पैसे जरूर देंगे कभी आज तक तो दिए नहीं है कभी भी पैसे नहीं दिए कभी भी कितने भी पैसे खर्च हुए हैं खुद अपने पास से ही खर्च किए हैं लेकिन मैडम की बात मानने के सिवा कोई भी चारा नहीं था क्योंकि वह ते हुए वह बातें कह रही थी और इस तरह से समझा रहे थे कि वह बात मुझे माननी ही पड़ेगी उसी बोली थी क्या मैडम अब आप देख लो मैं करती हूं कुछ घर में घुसते ही वह सबसे पहले स्टोर रूम में गई और साइकिल को देखा बहुत उसमें गंदगी भरी हुई थी इतने समय से निकाली नहीं थी जरूरत ही नहीं पड़ती थी करी वह दो-तीन साल से तो पड़ी होगी ऐसे ही साइकिल को निकाला झाड़ पहुंच करके साफ किया और बाहर रख दिया गीले कपड़े से उसको पूछा फिर खुद नहाने के लिए चली गई महादेव के बाहर आई और थोड़ी देर के लिए बैठ कर लेते ही गई थी तभी फिर मैडम का कॉल आ गया मानसी बेटा क्या आपने साइकिल निकाल ली साफ कर लिया हां मैडम मैंने साफ कर दिया ठीक है तुम ले जरूर आना ध्यान से मैं तुम्हें उसके अलग से पैसे दे देंगे ठीक है मैं मैनेज करती हूं मैं ले आऊंगी मुझे तुमसे यही उम्मीद थी बेटा तुम मेरी सबसे ज्यादा पसंद थे स्टूडेंट हो मुझे तुम्हें सिखाने में इसीलिए बहुत मजा आता है क्या तुम्हारे साथ काम करने में या तुम्हारे साथ रहने में मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगता है ऋषि समझ रही थी कि मैडम उसे बच्चन कर रही है या उसे मक्खन लगा रही है लेकिन करना है तो करना है उसके दिल में हमेशा यही बात रहती थी और साइकिल लेकर जानी है तो जा नहीं है अब घर में डांट पड़े या कुछ भी करें या कोई भी परेशानी हो लेकिन ही जाना पड़ेगा क्योंकि उसने मैडम से कह दिया है
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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