करीब चार महीने से कहीं भी आना जाना बंद है हम कहीं जा नहीं सकते और कोई हमारे घर आ नहीं सकता मुझे समझ नहीं आता कि मैं इतना परेशान और दुखी क्यों हूँ ?क्यों नहीं मन संभालता है ? क्यों हर समय मैं दुखी परेशान और उदास रहती हूँ ? क्यों किसी काम में मन नहीं लगता है ? क्यों रोना रोना और सिर्फ रोने का मन करता है ? मुझे लगता है यह स्थिति तो हर किसी के साथ होगी सभी लोग अपने अपने घरों में ही बंद हैं तो क्या वे सभी उदास परेशान और निराश हो गए हैं ? सब मेरी ही तरह से रोने को मजबूर हो गए हैं और यूं ही दुखी होकर रोते हैं और दिल भर जाने तक रोते रहते हैं ? अगर हाँ तो इसका क्या इलाज है ? यह कैसे सही होगा ? क्योंकि कभी कभी मन इतना परेशान होता है कि कुछ समझ नहीं आता, क्या करें ? कैसे करें कि यह पीड़ा कम हो जाये । हम अपने दुख कैसे किसी को बताएं ? कैसे कहें उनसे कि हम निराशा के दौर से गुजर रहे हैं और इस सब से उबरने का कोई रास्ता नजर नहीं आता है ।
प्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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