काश एक ऐसा शब्द जो हर किसी के मन में एक बार जरूर आता है मेरी मां में आता था मैं बार-बार इस शब्द को लिखती थी काश ,? जब एक बार तुमने इस शब्द को मेरी रचना में देखा तो तुमने कहा था एक कांच क्यों हटा दो काश उसे दिन के बाद मैं किसी भी रचना में काश लिखना छोड़ दिया था कभी लिखने का मन भी करता तो तुम्हारी बात याद आ जाती थी और मैं उसे नहीं लिखती थी, पर आज तो मेरा मन कर रहा है कि मैं इस शब्द को लिखूं कि काश , तुमने मुझे ना कहा होता काश मत लिखो, या मैं तुम्हारी बात ना सुनी होती नहीं मानी होती तुम्हारी बात.... सीमा असीम
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उसका झूठ झूठ भी कितना सच्चा बोला था उसने, कि हमने सच को भी झूठ मान लिया। कहता था — तुम सी हो, तुम्हारे बिना मर जाऊँगा। आज देखो, हमारे बिना भी जी रहा है, और हम उसी झूठ पर आज भी जी रहे हैं। उसके झूठ में भी एक अदा थी, सच से ज्यादा मीठी सदा थी। हम लुट गए उस सदा पर, और वो जीत गया अपनी अदा पर। अब किसी के सच पर भी यकीन नहीं आता, जब से उसका झूठ सबसे हसीन लगा था।
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बेवफा प्रेम तुमने कहा था साथ निभाओगे, राह कोई भी हो, चल जाओगे। हमने तुम्हारे लफ्ज़ों को खुदा माना, और तुमने उसी खुदा को भुला दिया। वादा था चाँद-तारों जैसा, निभाना था उम्र भर वैसा। पर तुम तो चाँद निकले, जो हर रात जगह बदल लेते हैं। हम आज भी उसी मोड़ पर हैं, जहाँ तुमने हाथ छोड़ा था। फर्क बस इतना है, अब हम रोते नहीं, मुस्कुराकर याद करते हैं। बेवफा तुम नहीं, तुम्हारा वक्त था, जो हमारे प्यार से बड़ा हो गया। और हम? हम आज भी वही हैं... तुम्हारे उस "हमेशा" का इंतजार करते हुए। सीमा असीम 23,8,26
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1. प्रेम प्रेम में बड़ा कुछ नहीं होता, प्रेम में छोटा भी कुछ नहीं होता बस एक बोतल पानी रख देना, बस एक गलती पर मुस्कुरा देना, और बारिश में चुपचाप बैठे रहना... 2. तुम तुम मिले फिर मिले दूर जाकर भी दूर गये नहीं एक आदत बन गयी और यह आदत रह गई, आदत ही तो है कभी कहीं नहीं जाती यह आदत.. सीमा 22,8,26 3उदास आज मन उदास है तो रहने दो, हर बात को समझना ज़रूरी नहीं, कभी-कभी बस यूँ ही तुम्हारा ख्याल आना और हमेशा रहना प्रेम ही तो है..