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खुशबु

 ना हो फूलों में खुशबू अगर  तो फूल मन को भाते नहीं   बिना खुशबू के फूलों का  कोई मतलब बनता नहीं  जब होती है फूलों में खुशबू  भवरे आते हैं जाते हैँ  बैठते हैं थोड़ी देर सुस्ताते हैं  खुश होकर ऊंची उड़ान भर कर चले जाते हैं  आती हैं तितलियां  घूम घूम कर फूलों पर नाचती इतराती है  फूलों से खुद मोहित हो खुद भी रंग रंगीले रंगों में रंगी जाती हैं  अच्छी रंगत देखकर  हर पक्षी आता है अपने गान सुनाता है  खुश होकर पूरे उपवन में  मडराता है  फूलों की खुशबू आने से    सारी खुशियां होती हैं  बिन खुशबू के फूलों की कोई बात नहीं होती खुश्बू किसी हाल जुदा नहीं होती फूलों से फूल हैँ तो खुश्बू है खुश्बू है तो फूल.. सीमा असीम 30,6,21
 हँस कर बोला करो कुछ बताया करो तुम मेरे हो न  हक़ जताया करो बहुत खुशियाँ हैं जिंदगी के दामन में कभी मुझ पर लुटाया करो हार क्या जीत क्या मैं नहीं जानती प्रेम की राह पर साथ चलते जाया करो चल रही आज देखो कितनी प्यारी हवा संग संग गुनगुनाया करो मुस्कुराते बीत जाये यह उम्र  मुस्कुराने की वजह बन जाया करो.... सीमा  असीम 

मेरे हो

 दिल रोता है तो रोने दो आँखों से आँसू बहने दो न करो गिला न शिकवा शिकायत करो बस मोहब्बत करो सिर्फ मोहब्बत करो तुम सच्चे हो तो मेरे हो झूठे हो तो खुद के हो मुझे सच रहना है आजीवन मरना भी है अब सच रहकर तुम मिलते हो तो अच्छा है गर न भी मिले कोई फर्क नहीं एक बात कहूँ तुमसे जाना तुम भी कहाँ खुश होते होंगे मुझे जरा सा दुःख देकर भी दिल कहता है मेरा इस छ्ल कपट की दुनिया में एक तुम सच्चे हो तुम मेरे हो हाँ मेरे हो सच में मेरे ही हो... असीम 
 जहां तक हम सोचते हैं तो बस अंदाजा होता है कि हमारी दुखों का कारण कोई दूसरा नहीं बल्कि हम खुद होते हैं क्योंकि हम दूसरों से अपेक्षा रखते हैं उम्मीद रखते हैं ढेर सारी ख्वाहिश रखते हैं सपने पाल लेते हैं कि यह सब कुछ पूरा कर देगा बस यहीं पर हम धोखा खा जाते हैं हम हमारी उम्मीद है हमारी ख्वाहिश है हमारे साथ में कोई दूसरा कैसे पूरा कर सकता है उसे तो हमें खुद ही पूरा करना होगा ना उसके लिए तो हमें ही कोशिश करनी होगी ना, हमारा मन कोई अपना नहीं पढ़ सकता चाहे वह कितना भी अपना हो नहीं समझ सकता हमें वह सिर्फ अपने मन को पड़ता है अपनी खुशी के लिए जीता है और अपनी ख्वाहिशे सपने उन सब को पूरा करने की दिशा में प्रयास करता है बस यही कारण है कि हम अपेक्षित हो जाते हैं हम महसूस करते हैं कि वह हमारी उपेक्षा कर रहा है और अपने ख्वाबों को पूरा कर रहा है लेकिन गलत सोचते हैं बिल्कुल गलत सोचते हैं वह तो वह कर रहे हो उसका दिल कर रहा है जिससे उसके दिल को खुशी मिल रही है वह हमें खुश करने के लिए खुद को दुखी नहीं कर सकता ना इंसान जब इस दुनिया में आया था अकेला आया था अकेला जाना है तो खुद को ही जीना है और खुद को ही म...
 मेरी आत्मा में उठता हुआ दर्द तुम तक जरूर पहुँचता होगा तभी तो बहते हैं मेरे आँसू और लगातार बहते जाते हैं,,, यक़ीनन जितना तुमने मुझे रुलाया है उससे कई नदियों भर गयी होंगी या शायद कई समुन्द्र भी क्योंकि यह आँसू बहुत मीठे थे अब खारे लगते हैं... काश तुम समझ जाते कि प्रेम क्या होता है पर तुम कहाँ समझोगे भला? तुम्हें कहाँ होती है कोई परवाह अगर होती तो कभी यूँ शब्दों के तीर न चुभाये होते न कभी यूँ मुझे रोने तड़पने दिया होता... तुम ऐसे क्यों हो बताओ मुझे क्यों तुम इतने मस्त हो हर्फ़न मौला? कि तुम्हें जरा भी दर्द नहीं होता है... तुम्हें भी हो जाये मोहब्बत सच्ची तो समझ आयेगा सब कुछ अभी तक तो हुई नहीं न अगर होती तो कभी यूँ न करते तुम?
 अब मैं तुम्हें नहीं पढूंगी कि पढ़ती हूँ ज़ब भी तुम्हें मुझे दुःख होता है बेपनाह दर्द जिसे मैं किसी हाल संभाल नहीं पाती हूँ... दर्द से बेहाल हो मैं न जी पाती हूँ और न कुछ कर पाती हूँ... तुम तो मुझे हमेशा से दुःख देते आये हो, हर बार तुम मुझे ऐसे ही तो रुलाते हो और तड़पाते हो फ़िर भी मैं आ जाती हूँ लौट लौट कर तुम्हारे पास,, जानती हूँ अब तुम्हें अच्छे से कि तुम उचश्रनखल हो,, तुम्हारा कोई दीन ईमान नहीं है तुम खुद की नजरों में भी गिर चुके हो बस जी रहे हो इसलिए ऊँची ऊँची हाँकते हो आखिर तुम ऐसे क्यों हो जरा सी फिसलन पर फिसल जाते हो, ज़ब देखो तब गिरी हरकत पर उतर आते हो, कभी meri भावनाओं की कद्र ही नहीं तुम्हें... हैरत होती है तुम्हारी इंसानियत पर क्या तुम अब इंसान भी नहीं रहे... क्या तुम्हारे दिल में कोई भाव ही नहीं हैं? बेदिल बेभाव के शख्स,,, तुम जी कैसे पाते हो? मुझे शर्मिंदगी है कि तुम मेरे अपने हो,, ऐसे अपने जिसे मेरी जरा भी परवाह नहीं... लेकिन सुनो मुझ गरीब को सता कर तुम भी खुश नहीं रह पाओगे... क्योंकि एक गरीब की आह सात आसमां के पार जाती है.. किसी को मत सताओ मत दो इतने दुःख दर्द और तकलीफ ज...
 जीवन क्या है  जब हम दुनिया में आते हैं लोग कितने खुश होते हैं मां बाप भाई बहन इतने सारे रिश्ते नाते बनते चले जाते हैं हम अपनी आंखें खोलते हैं दुनिया को देखते हैं दुनिया बहुत प्यारी लगती है एकदम नया नया सब कुछ जीवन को जीने की इच्छा मन में शक्ति है उछलते कूदते बड़े होते चले जाते हैं पढ़ लिखकर बुद्धिमान बनते जाते हैं यार जैसे जैसे दुनिया को देखते जाते हैं वैसे-वैसे बनने की कोशिश करते हैं हमारे मन में छल कपट प्रपंच जाने क्या-क्या झूठ सब शामिल होता चला जाता है हमारे निश्चल तरह एक होती चली जाती है फिर धीरे-धीरे करके हम अपने गृहस्ती परिवार में मगन हो जाते हैं अपने मां-बाप जिनको हम जिन्होंने में पैदा किया वह हम उनको ना हम देखते हैं ना सुनते हैं बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने मां-बाप का भी सहारा बनते हैं फिर वह अपनी गृहस्थी में मगन होते हैं अपने बच्चों के साथ में खुश रहते हैं बच्चे बड़े हो जाते हैं अपने पांव पर खड़े हो जाते हैं और फिर 1 दिन हम इस दुनिया को छोड़ कर फिदा हो जाते हैं खत्म हो जाता है सब कुछ सब कुछ यहीं से हमने पाया होता है और यही सब छोड़ जाते हैं जो ब्रह्मांड में खड़ा क...