मैंने अपनी बाहें हवा में फैला रखी है मानों तुम आओगे और समां जाओगे सुनो प्रिय कितना पुकारता है तुम्हें मेरा मन और तुम्हें पुकारते पुकारते हुए खुद से ही रूठ जाता है आखिर कितना पुकारूँ मैं तुम्हें, क्या तुम समझ जाते हो या तुम्हें समझ नहीं आता है वैसे मुझे तो लगता है कि तुम मेरे मन की हर बात बिना कहे समझ जाते हो, जैसे मैं समझ जाती हूँ मुझे नहीं लगता है कि हमें अपनी बातें एक दूसरे से कहनी चाहिए लेकिन जब कभी मन बहुत ज्यादा भारी होता है तब दिल चाहता है कि मैं अपने मन की हर वो बात तुमसे कह दूँ जो मुझे दुःख दे रही है गलत भावनाएं मन में भर रही है और मेरा जीना ही मुश्किल किये दे रही है ,पता है यूँ लगता है मुझे कि यह जीवन यह ज़िंदगी व्यर्थ है इसका कोई मतलब ही नहीं है न जाने क्यों जिए जा रही हूँ न जाने कौन सी आस जीने को मजबूर कर रही है १ सनम एक कहानी बता रही हूँ तुम्हें कहानी क्या हकीकत ही है एक दिन जब मैं सुबह मॉर्निग वाक पर जा रही थी तब मैंने देखा एक चिड़िया फुदकती हुई जमीं पर उतरी मैनें उसे बड़े प्यार से देखा और उसे बाहों में भरना चाहा तभी उसने अपने पंख फैलाये...
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सोचती हूँ कि रात आये तो ख्वाब में आप आएं सुबह हो तो आप सच में सामने आ जाए। .. सुनो प्रिय हम कितनी उम्मीदें ख्वाहिशें पाल लेते हैं और उन उम्मीदों और ख्वाहिशों का पीछा करते हुए पूरी ज़िंदगी गुजार देते हैं और वे हमें कितने दुःख तकलीफ और कष्ट देते इसकी परवाह ही नहीं करते वैसे परवाह करें भी तो करे कैसे क्योंकि हम तो अपनी सुध बुध बिसराये उन उम्मीदों से ऐसे बांध जाते हैं कि हम उनसे पार नहीं पा पाते , क्या कहूं बस यही कहना है कि मैं आजकल इसी डोर में बंध गयी हूँ और बंधन इतना मजबूत है कि कोई तोड़ नहीं सकता न हम न ही कोई और शायद ईश्वर भी नहीं ! सनम आज तो मेरा न मन अच्छा है और न ही तन किसी मशीन की तरह खींचे लिए जा रही हूँ और मेरा बेजान मन तुमसे कई सवाल करना चाहता है मिलकर कुछ पूछना चाहता है लेकिन क्या मैं तुमसे वो सवाल पूछ पाऊँगी अगर पूछ भी लिए तो क्या तुम मुझे सही जवाब दे पाओगे या फिर आज तक जिस तरह से बहलाते रहे उसी तरह से फिर बहला दोगे तुम पर तरह विश्वास कर लुंगी और उस विश्वास ऐतबार पूंजी मान कर सहेजे रहूंगी सही में ...
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शकों कभी चैन तो लेने दिया करो सनम मुस्कान कभी खुलकर मुस्कुरा नहीं पाती है कभी कभी लगता है कि मैंने तो सच्चा प्रेम किया और तुमने चाहें जो भी किया नहीं जानना चाहती लेकिन मेरे जिस्म से कोई जान खींचे लिए जा रहा है ऐसा महसूस होता है सीधा कलेजे को चीरता हुआ कोई तीर पार हुआ जाता है सुनो न तुम मुझे यह बता दो कि तुम्हें किस बात कि कमी थी या कौन सा वो लालच था या कौन सी तलाश थी या क्या पाने की चाह थी जो तुम मुझे साथ रखकर भी किसी और को भी गले लगते रहे मान जाओ अभी भी वक्त है कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे पास कुछ भी न बचे प्रिय क्या तुम्हे पता नहीं चलता या तुम्हें अहसास नहीं होता है कि मुझे किस दर्द और तकलीफ से गुजरना पड़ता है मैं चीखती हूँ चिल्लाती हूँ दर्द से तड़पते हुए खुद को ही कष्ट देती हूँ कभी अपना हाथ काट लेती कभी अपने सर को दीवार से टकराती हूँ फिर भी चैन नहीं आता सकूँ नहीं आता सनम मैं मैं इस दुनिया में रहकर भी इस दुनिया की नहीं रही बेगानी हो गयी मैं हूँ सबसे ,कभी सोचा है तुमने अपने खुद के बारे में प्रिय तुम इस दुनिया के सबसे प्यारे इंसान हो और भोले भी तुम नहीं जानते कि सब बहुत स्वार्...
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आज फिर तुम पर प्यार आया है बेहद और बेशुमार आया है सच में यह मन बावरा ही होता है कि तुम्हारी झलक देखने भर से मन का गुबार कहीं दूर हवा में उड़ गया, नफरत की आंधी मुंह छिपकर गायब हो गयी और दिल में रह गया तुम्हारे लिए प्रेम सिर्फ प्रेम ,हाँ यही तो सच है कि हम जरा देर में अपनी सब नफरत और घृणा को मिटा देते हैं ! सुनो न प्रिय क्या तुम्हें इस बात का अहसास नहीं होता है कि हमें तुमसे बात करना अच्छा लगता है तुम्हारे साथ रहना अच्छा लगता है अपने मन की हर बात तुमसे कहकर हल्का होना भी अच्छा लगता है ,शायद तुम भी ऐसा ही सोचते हो न, तभी तो थोड़ी सी आहट पर ही तुम आ जाते हो और मुझे मेरे कष्टों से उबार लेते हो , सब दुःख दूर हो जाते हैं और मन में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है तपते हुए तन पर मानों शीतल फुहार पड़ जाती है, मानों ईश्वर स्वयं ही हमें आशीर्वाद देने को आ गए है हमारे सर पर आशीष भरा हाथ रख दिया हो, सच में कितना ताज्जुब सा लगता है कि कैसे भगवन भी हमारे दुःख में दुखी और सुख में खुश हो जाते हैं और यह तभी संभव होता है जब हम सच्चे और ईमानदार होते हैं अपने रिश्तों को पारदर्शी रखते हैं ,मैं जान...
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नम आँखों की नमी कभी कम नहीं होती इनमें ख्वाब ही इतने तैरते हैं आज मैं बहुत उदास हूँ पूरा दिन मन पर उदासी के बादल मंडराते रहे, आँखों से आंसू बहते रहे लाख कोशिशों के बाद भी चेहरे पर नाममात्र की मुस्कान नहीं आयी, न जाने कहाँ से इतना दर्द दिल में समां गया है कि हंसने मुस्कुराने का मन ही नहीं करता है, क्या करूँ मैं ऐसी ही हूँ और कितना बदलूंगी मैं, बिलकुल ही बदल लिया खुद को , तुम्हारे सांचे में ढल गयी. मेरे में मेरे जैसा कुछ नहीं बचा है बस मुझे इतना पता है कि मैं चाहें कैसी भी रहूं तुमको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला कभी भी नहीं बस तुम मुझे कहते रहो कि ऐसा मत करो वैसा मत करो न जाने कितनी बंदिशें लगा दी कभी सोचा है तुमने कि मोहब्बत और गुलामी में अंतर होता है लेकिन तुम कहाँ समझोगे और कैसे समझोगे जबकि तुमने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की और शायद कभी समझ कर करोगे भी क्या ? है न? वैसे मैं सच में एक बात नहीं समझ पा रही हूँ कि मेरे मन में मेरे दिल में तुम्हारे लिए इतनी शिकायतें क्यों आ गयी हैं ? क्यों मैं तुम्हें गलत समझने लगी हूँ ? क्...
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ज़िंदगी खूबसूरत है मगर झूठ है वफ़ा प्यार इश्क भरम है सिर्फ भरम ,,, कभी कभी मन सोचता है कि मैं भी कितनी मुर्ख हूँ वाकई पूरी बुद्धू , तभी तो इतना विश्वास करने लगी खुद से भी ज्यादा लेकिन कभी सोचती हूँ कि जब\ज़िंदगी ही बेवफा है एक दिन साथ छोड़ देती है तब किसी पर कितना भी भरोसा करो वो तोड़ ही देता है लेकिन यह सब बातें दिल नहीं समझता है उसे बेहद दुःख होता था , बहुत दर्द भी होता है और फिर दुनिया से ही विश्वास उठ जाता है कुछ भी अच्छा नहीं लगता है कोई भी अच्छा नहीं लगता है हर कोई झूठा और फरेबी नजर आने लगता है एक एक बात आँखों के सामने से गुजरती है किसी चलचित्र की ा तरह और सारे भ्रम दूर हो जाते हैं याद आती है तो वे दुःख वे कष्ट जो जान बूझकर तुमने दिए वे शब्द मानों आत्मा को चीरते चले जाते हैं जो तुम कहते थे सच यह दिल सबकुछ समझता है जानता है इसको किसी भी तरह से बहलाया नहीं जा सकता है न किसी तरह से समझाया जा सकता है क्योंकि मेरा ऐसा मानना है कि अगर हमारा मन सच्चा है तो वो कभी गलत बात को स्वीकार ही नहीं करेगा कभी भी नहीं , ...