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हिंदी कविता

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 जो मैं तुम्हें बार-बार याद करती हूं   मैं यूं ही तो नहीं तुम्हें स्मृतियों में रखती हूँ  कुछ तो बात होगी जरूर  कुछ तो इसका कारण है अन्यथा  मैं क्यों तुम्हें याद करूं  मैं क्यों तुम्हारी बात करूं  क्यों मैं तुम्हें लिखूं और  क्यों मैं तुम्हें पढ़ूं  मैं तुम्हें ही पढ़ती हूं  रात हो या दिन  हर पल में  हर क्षण में  सिर्फ मैं तुम्हें ही याद करती हूं  तुम्हारी ही बात करती हूं  मन ही मन तुम्हें दोहराती हूं और  फिर उसे कागज पर उतार देते हैं  की मन बहुत बेचैन है  कि मन को चैन ही नहीं है  एक पल भी  तुम्हारे बिना जीने को तैयार ही नहीं होता   जैसे जैसे रात गहराती जाती है  तुम्हारी याद और ज्यादा  और भी ज्यादा बढ़ती जाती है  यह अंधेरा मेरे मन को और जागृत कर देता है  और तुम्हारी यादों से रौशन कर देता है  तुम भी ऐसे ही करते होंगे  शायद तुम भी मुझे यूं ही याद करते होंगे  और मेरी रोशनी से जगमगाते रहते होगे   जैसे कि मैं तुम्हारी रोशनी से जगमगाती...

कविता

 मैं तो इन दिनों बहुत ही अचम्भे में हूं  मैं तुम्हें देखूं या तुम्हारे करतबो को  कैसे कर लेते हो  तुम ऐसे करतब  कैसे तुम फंसा लेते हो  कैसे तुम चल कर लेते हो और  कैसे तुम बिना निभाए  और सबको निभाने को  मजबूर कर देते हो  सच में कमाल हो   तुम जैसा कोई हो ही नहीं सकता इस दुनिया में  कुछ कहा है करने के लिए  मन ही नहीं है  बस सोचती रहती हूँ  कि यह कैसे कर पाते हो तुम   कैसे आखिर कैसे?? सीमा असीम  9,6,26
 है प्रेम जो तूने मुझे दुख दिया  जो तूने मुझे कष्ट दिया  जो तूने मुझे तकलीफें दी  उसके लिए तो क्या ही कहा जाए  उसे तुम्हें कभी नहीं कह सकती  उसे शब्दों में बयां किया ही नहीं जा सकता  लेकिन बस इतनी ही दुआ करती हूं  तेरे लिए की तुझे दवाइयां तो मिले  लेकिन दर्द ना मिले तुझे कोई  तू सब कुछ देखे लेकिन तुझे देखने के लायक कोई अच्छा दृश्य ना मिले  तुझे नींद आए लेकिन कोई सपना ना आए  तुझे गीत तू सुन लेकिन तू कोई धुन ना बन पाए  तुझे नाव तो मिले  तू नाव में बैठे  नाव में घूमें  नाव में सैर करें लेकिन  तुझे कभी नदी ना मिले  तेरे ऊपर प्रेम के कोर ही कोर बरसते रहे  कोड़े तो बरसे लेकिन तेरी पीठ पर एक भी नीला निशान ना मिले  कि तू मेरे दर्द को क्या समझेगा  कैसे समझ सकता है कि  कभी दरवाजे को पकड़ के रोना  कभी पेड़ पौधों को चिपक चिपक के बातें करना  रोना उनसे अपने दुख दर्द को कहना  फूलों के साथ बतियाना  लेकिन तू कहां समझेगा यह सब  इसीलिए तुझे बस यही है कि तुझे कभी नदी ना मिले...
 भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की एक वरिष्ठ और दिग्गज चरित्र अभिनेत्री हिमानी शिव परी को हिमानी शिवपुरी को कौन नहीं जानता देहरादून में 2022 24 अक्टूबर 1960 को हिमानी का जन्म हुआ था वीक लगभग 4 दशक से बहुत सारी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं जिसमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे कुछ-कुछ होता है हम आपके हैं कौन और उसके अलावा टीवी के भी बहुत सारे यादगार सो हैं जिन्होंने जिसमें उन्होंने भूमिका निभाई है उनका जन्म देहरादून में 24 अक्टूबर 1960 को हुआ था और उनके पिता हरि दत्त भट्ट शैलेश एक प्रसिद्ध हिंदी कवि है और हिंदी के शिक्षक भी दून कॉलेज में शिक्षक थे जहां से अमिताभ बच्चन ने भी पढ़ाई की मां शैली भट्ट जो की ग्रहणी है हिमांशी पुरी की शुरुआती शिक्षा दोनों स्कूल से ही हुई थी उसके बाद उन्होंने दव कॉलेज देहरादून से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया थिएटर वह कॉलेज के दिनों से ही करने लगी थी क्योंकि उनकी नाटक करने में बहुत रुचि थी और इसलिए उन्होंने अपने पार्ट टाइम में कभी भी वह शाम को टाइम मिलता था तो वह थिएटर करती थी वह कहती थी कि वह कहती है कि जब स्कूल पढ़ाई करने के बाद जब एक घंट...
 हे ईश्वर मुझे आपसे बहुत सारी शिकायतें हैं बहुत सारी बातें हैं जो मैं आपसे कहना चाहती हूं उससे पहले बात तो यह है कि आप मुझे हमेशा इतना कम क्यों देते हो मुझे तो बहुत सारा चाहिए बहुत सारा, दुनिया की सारी खुशियां चाहिए और दुनिया में जितने सुख है वह सब मुझे चाहिए लेकिन आप समझते ही नहीं हो, क्यों नहीं समझते हो? मुझे वह सब चाहिए जो इस दुनिया में है और मैं खूब बड़ा सम्मान लेना चाहती हूं इस दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान और मैं कम से कम दो बंगले तो जरूर चाहती हूं मैं बड़ी-बड़ी दो गाड़ियां भी चाहती हूं और मैं बहुत सारा, बहुत सारा, बहुत सारा धन दौलत भी चाहती हूं लेकिन आप कंजूसी करने लगते हो,क्यों करते हो नहीं पता..  मैं चाहती हूं मेरा बेटा अमन बहुत बड़ी कंपनी का मालिक बन जाए और पूरी कंपनी में उसके कम से कम हजार नौकर हो जिसकी देखभाल करने लायक बन जाए, आपको करना होगा ना क्योंकि ऐसे तो काम ही नहीं चलेगा, आपको देना ही होगा मुझे बहुत सारा बहुत सारा सब कुछ...खुशियां,प्रेम, मान, सम्मान, इज्जत और धन दौलत...
 
 उसने छोटा सा एक फूल उठाकर मुझे दिया कहां आंटी आपके पास रखो और बात करके फिर एक फूल और लेकर आ गई यह आप अंकल को दे देना अच्छा हो थैंक यू बेटा आप मुझे क्यों बोल दे रहे हो क्योंकि आप मुझे बहुत प्यारी लग रही हो इसलिए मैं आपको एक फूल दे रही हूं आप इसको संभाल के रखना या फिर ऐसा करो आप इसको बालों में लगा लो छोटी सी यीशु ने वह बच्चे थैंक यू बेटा मैं जाकर अंकल को दे दूंगी 
 कुछ दिनों के बाद पीहू की सोसाइटी में स्विमिंग पूल बनने का काम शुरू हो गया अब तो पीहू बहुत खुश थी कि स्विमिंग पूल बनेगा तो वह अपना सपना पूरा करेंगे छोटी सी पीहू यह नहीं जानती कि यह स्विमिंग पूल बड़े लोगों का बन रहा था अभी तो छोटे बच्चों का थोड़े दिनों के बाद बनेगा लेकिन वह तो खुश थी कि उनको स्विमिंग करने को मिलेगा खैर एक दिन बड़ा वाला स्विमिंग पूल बनकर तैयार हो गया बहुत सुंदर सा नीला नीला पानी चल ऐसे ही मिलता-दूत चलता हुआ पीहू जब भी उधर से निकलती उनका मन करता कि वह स्विमिंग कर ले लेकिन वहां तो बड़े-बड़े लोग स्विमिंग कर रहे थे फिर कुछ दिनों के बाद बड़ी स्विमिंग पूल के पास में ही एक छोटा सा स्विमिंग पूल भी बन गया जो छोटे बच्चों के लिए था तो छोटी सी पीहू खुशी के मारे नाचने लगे आप तो उनका सपना पूरा होगा मामा उनको स्विमिंग सिखाएंगे किसी तरह से स्विमिंग पूल तो तैयार हो गया आप उनको एक ट्रेनर की जरूरत थी क्योंकि मम्मी को स्विमिंग भी नहीं आती पीहू की और पीहू के पापा को भी स्विमिंग नहीं आती तो सिखाए कौन फिर उनकी मम्मी ने एक दिन सोसाइटी ऑफिस में जाकर पता किया कि छोटे बच्चों को स्विमिंग सीखने ...

प्यार आ गया है

 मन को आजकल सकूं सा है बेकरार मन को करार आ गया है  ना जाने ऐसा क्यों हुआ है क्या तुझको मेरा प्यार याद आ गया है  जो दिल बेकल हो याद में तड़पता मचलता रहता था  पल भर के सुकून नहीं था दिल को मेरे  आज वही दिल खुशी से लवरेज है क्या तुझे मेरे इंतजार का ख्याल आ गया है  जिसके लिए दिन रात माला जपती दुआएं करती रहती क्या कबूल हो गयी हैं मेरी दुआएँ  जो मुझे चैन आया और मन मगन हो शायद मेरा विश्वास लौट आया है बस अब तू एक मेसेज तो कर या फोन ही कर ले कि तेरे सौ ख़ून माफ़ हैं  जी जाऊँगी जैसे ऐसे तन में आये हैं प्राण और वापस मेरा प्यार आ गया है... सीमा असीम 
चोट जब दिल पर लगती है  दर्द तो होता ही है  कोई चिंगारी भड़कती है  शोला बनता ही है  क्या तुम मुझे इस तरह से रुलाओगे  देखना एक दिन तुम सिर पटकते आओगे  नहीं करुँगी माफ़ तुम्हें यह वादा है मेरा  गिरोगे जमीं पर बहुत गहरी चोट खाओगे  काश होता अगर जीवन में एक ख़ून माफ़  तो सबसे पहले तेरा कत्लेआम करती  फिर चौराहे पर तुझे खड़ा कर देती  बताती दुनिया को धोखेबाज की यही सजा है  कोई बच्चों का खेल नहीं प्रेम न सिर्फ मजा है  तबाह हो जाता है जीवन बर्बाद हो जाता है  जो  सच्चे प्रेम में इस तरह दग़ा खाता है  रो रो कर गुजारी है रातें दिन को न सकूं मिला  तूने आग जो जलाई है उसमें तुझे ही भस्म करना है 
 कुछ तो है तेरे मन में जो मुझे तेरी याद हर पल सताती है  कभी आंसू तो कभी मुस्कान तो कभी उदासी छा जाती है  रहे तू कहीं भी किसी के साथ पर मेरे साथ तो हर वक्त मेरे दिल में रहता ह  जैसे कोई परछाई सा संग संग फिरता है  क्यों इस कदर मुझे सताता है  तू खुद ही बता दे तेरा अब मुझसे क्या नाता है  तू क्यों पल भर को भी नहीं मुझे भुलाता है  जो हर पल तेरा ही नाम मेरे लफ्जों पर आता है  दिल में एक आग सी जलाता है  मानो तेरी मोहब्बत मुझमे पकती है और चटक चटक कर मेरे चेहरे पर किसी हीरे की तरह चमकती है गमकती है दमकती है    तू तो सब जानता है  जानकर भी अनजान बना रहता है  कुछ तो राज है जो तू हर पल मुझे याद आता है  कोई तो ऐसी बात है जो हर पल मुझे तेरी यादों की तरफ तेरी बातों की तरफ खिंचे लिए जाती है  किसी दिन तू आएगा जो खुद ही तो खिंचा चला आएगा और  मैं तुझे कह दूंगी नहीं चाहिए तू  जा अब तू अब तू क्यों आया है  सालों का इंतजार यूं ही मैं पल भर में ठुकरा दूंगी  जा तू अब मैं तुझे याद नहीं करूंगी लेकिन  तू ही बता क्...

प्रेम

कितना कठिन होता है न ,  ज़ब आप अपने प्रेम को  किसी और के साथ देखते हो..... सहन ही नहीं होता .... लगता है किसी ने प्राण ही खींच लिए हैं  उसके बाद भी  दिल उसे ही याद करता है  उसके लिए ही तड़पता है  दुआओं में उसे ही मांगता है  मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे  हर जगह एक ही दुआ  ऐसा क्यों होता है  जबकि हम जानते हैं कि  उसने हमें मार दिया है  ब्लॉक करना किसी को  मौत देने से कम नहीं होता  जीते जी मारना और  इसकी सजा कानून नहीं  ईश्वर की अदालत में मिलती है  तुम्हें भी मिलेगी  जानती है मेरी आत्मा  फिर क्यों मेरा मन  तुम्हें ही प्रेम करता है  तुम्हारी ही याद में पल पल जीता है  क्या है यह? क्या यही है सच्चा प्रेम .....💔 सीमा असीम 
 मुबारक हो मुबारक हो तुझे  मुझे हरा कर तू जीत गया  तेरी कामयाबी के लिए तुझे मुबारकबाद  जिसके कारण तुमने मुझे ब्लॉक किया  तूने मेरी आत्मा का खून किया  मुझे हजार हजार आंसू रुलाया  उसे तू आज अपने बगल में खड़ा करके बहुत खुश है  बहुत बहुत ज्यादा महान बन रहा होगा ना तू आज  लेकिन याद रख तेरे कर्म कभी तेरा पीछे नहीं छोडेंगे  तूने जो भी कर्म करे हैं उसका खामियाजा  मां वैष्णो देवी तुझे देंगी और जरूर देंगी  मैं तो आज बहुत खुश हूं कि  मुझे तुझ जैसे राक्षस से माँ ने दूर कर दिया  लेकिन अब तेरे कर्म तेरा कभी पीछा नहीं छोड़ेगे  तेरा अंत निश्चित है  याद रख तुझे कोई नहीं बचा सकता  मां वैष्णो देवीअब तेरा सीना फाड़ के ख़ून पियेंगी..
 नफरत से हम कभी भी प्रेम को नहीं जीत सकते  हमें प्रेम को जीतने के लिए प्रेम ही करना होता है और  जब हम प्रेम करने लगते हैं तो नफरत खुद ही  स्वतः ही खत्म हो जाती है  मिट जाती है और  हमारे जीवन में प्रेम को भर देती है  प्रेम एक ऐसा शब्द है जो फैलता है  खिलता है और कभी-कभी बिखरता भी है  लेकिन बिखर जाने के बाद उसे समेटना हमारे हाथ में  होता है  अगर हम समेट लेते हैं तो हम भी सिमट जाते हैं  अगर हम बिखर जाते हैं  प्रेम को त्याग कर नफरत को अपना लेते हैं तो समझो कुछ नहीं बचा है जीवन खत्म है  इसलिए प्रेम का दामन कभी मत छोड़ाना  बस प्रेम करते रहो जब  आप प्रेम को पकड़े रहोगे तो  प्रेम आपको कभी नहीं छोड़ेगा  कभी अकेला नहीं करेगा  कभी आपके मन में नफरत नहीं भरेगा  ना कभी आपको दर्द देगा  क्योंकि प्रेम शाश्वत है अनंत है ईश्वर है सीमा असीम  18,4,26
 तुमने वहीं किया जो तुम्हें अच्छा लगा  कभी मेरे बारे में सोचा तक नहीं  अगर सोचते समझते कभी मेरी नज़र से  तो तुम कभी ऐसा करते ही नहीं  क्या मिलेगा तुम्हें इन गिरी हरकतों से  मैं सभाल रही तुम्हें तुम गिरते चले गये  अपनी नजरों तक में गिर गये  मेरी नजरें तो तुम्हें पहले ही गिरा चुकी  मान लेते मेरी बात या मुझे समझ लेते  तो प्रिय तुम कभी गिरते ही नहीं  जो गिरा एक बार वो बार बार गिरता है  आखिर तुम भी ऐसे ही निकले  अब क्या कहूँ तुम्हें  अब बचा ही क्या कहने को  अब तुम संभल भी जाओ तो  मेरी नज़र में कभी उठोगे नहीं... सीमा 
मात्र एक शब्द भर नहीं है संघर्ष   बल्कि एक ऐसा शब्द है या फिर  जिंदगी का  जीवन का  वह सच है जो हमें मजबूत बनाता है  जिंदगी जीना सिखाता है  संघर्ष के बिना जिंदगी जिंदगी नहीं होती  जब हमारे रास्ते बहुत आसान होते हैं  तो हम बडी आसानी से चलते रहते हैं  कुछ परेशानी नहीं होती  जब वह रास्ते संघर्ष भरे होते हैं  कठिनाइयों भरे होते हैं तो  हम खुद को पहचान पाते हैं  हम इस कठिन रास्ते पर कैसे चल पाएंगे  कैसे आगे बढ़ पाएंगे  यह  संघर्ष ही हमें सिखाते हैं  खामोशी से अपना काम करते रहना  खामोशी से अपने आप को मजबूत बनाते रहना  भले ही हम भीतर से टूट जाए   खुद को कभी बिखरने न देना  हालात चाहे जैसे भी हो  अपने चाहे कितने भी रूठे हो  खुद हर बार संभल जाना है  खुद को खुद ही संभाल लेना है  कि संघर्ष ही हमारा गुरु होता है   हमें बिना बोले सब कुछ सीखता चला जाता है  जो जिंदगी में संघर्ष करना सीख जाता है  वह कभी हार नहीं मानता है या वह हार कर भी जीत जाता है... ...
 धरा पर रहना है तो घर धरा पर रहना है तो फूलों धरा पर रहना सीख लो पेड़ों पौधों को बचाए रखो पेड़ों पौधों को बचाए रखो फूलों पत्तों से जीना सीख लो नहीं सीख सकते हो तो जीवन व्यर्थ है इसलिए धरती पर रहना व्यर्थ है तुम तो शायद किसी और दुनिया के बने हो कि तुम्हें फूलों पत्तों से पेड़ों पौधों से भी प्यार प्यार नहीं की यही तो है जीवन के वह मंत्र जैसे जीवन बन जाता है खुशियों का तंत्र नमस्कार  बुद्ध तो बहुत सरल है बुद्ध तो बहुत सरल है कि वह त्याग कर चले गए अपना घर बार पति-पत्नी बच्चे और साथ पाठ पर सोचा है कभी यशोधरा के जीवन को पर सोचा है कभी यशोदा के जीवन को की कितने कासन से उसने निकले होंगे जीवन के दिन एवं अवस्था में पति वियोग क्या होता है वह यशोधरा से सीखो कैसे पाला होगा अपने बच्चों को कैसे संभाला होगा राजपथ को कभी सोचा है कि यशोधर ने कैसे गुजरे होंगे दिन अपने यमुनावस्था के गुजार ली होगी बच्चों को भी जैसे तैसे पाल पोस लिया होगा राज पाठ भी जैसे-जैसे संभाल लिया होगा पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी यशोधरा का कठिन जीवन कितनी मुश्क...
 कॉफी पीने के साथ-साथ लैपटॉप भी खोल लेता है और ऑफिस का काम शुरू कर देता है जब ऑफिस के लिए निकलना होता है तो थोड़ा पहले नहीं उठाता है तैयार होता है कॉफी पीकर चला जाता है कभी नाश्ता नहीं करता उसे लगता है कि अगर वह ननाश्ता करेगा तो मामा को परेशान होगी क्योंकि उन्हें तो बहाना मिल जाए बस किचन में जाने का खाना बनाने का फिर बनाएंगे अच्छे तरीके से भरवा पराठे कभी आलू के गोभी के पनीर के उन्हें लगता है कि नाश्ते में पराठे ही खाने चाहिए इसीलिए वह घर में नाश्ता नहीं करता और ऑफिस पहुंचकर दूध कॉर्नफ्लेक्स खा लेता है वही उसका नाश्ता हो जाता है बाकी और नाश्ते में काफी चीज होती है अंडा ब्रेड इडली सांबर चटनी आधी आधी लेकिन वह सिर्फ कौन ब्लैक और मिल्क ही लेता है या कभी का बाय मोस्टली उससे उसका पेट भर जाता है 2:00 बजे थोड़ी सी दाल चावल दिन में काफी कई बार हो जाती है कॉफी पीना उसे पसंद है या फिर आदत हो गई है उसके बिना काम ही नहीं हो पता हर राधे हर दो-तीन घंटे में उसे एक कप कॉफी चाहिए हालांकि हफ्ते में एक या दो दिन ही वह ऑफिस जाता है बाकी दिन घर से ही काम करता है तब वह नाश्ते में जब बेड आ जाती है तो उसे अ...

और तुम

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 घने पेड़ों की छाँव हो  नदी का किनारा हो  थोड़ा सा सकूं हो और  हो थोड़े से सिर्फ तुम... सीमा असीम

चाँद

आती रही याद जिसकी सुबह से शाम तक  अरे वो तो चाँद है  जो छुप जाता है  सूर्य के उगते ही ||| सीमा असीम सक्सेना