कहानी या किस्सा हूँ कोई
मैं तो बस एक कहानी या किस्सा हूँ कोई काश तुम भी एक उपन्यास होते किसकी कहानी जो एक बार लिख दी गयीं बस वही रहती है कभी नहीं बदलती जो लिख गई सो लिख गयीं क्यों हो गये तुम एक अखबार से जो बदल जाता है हर बार हर रोज हर दिन.. सीमा असीम 1,2,26