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मेरा ही रहेगा

 मेरा ही रहा लोगों ने कहा वो चला गया, मैंने कहा नहीं, वो कहीं नहीं गया। वो मेरी प्रार्थनाओं में रहा, मेरी डायरी के कोने में रहा, मेरी चाय की पहली चुस्की में रहा, और मेरी आँखों की नमी में रहा। दुनिया ने कहा उसे भूल जा, मैंने हँस कर कहा - जो दिल में बस जाता है, वो कभी छूटता नहीं। वो मेरा था, वो मेरा है, और किसी न किसी रूप में वो मेरा ही रहेगा। सीमा असीम 
 वो मेरा था, पर मेरा न हुआ वो मेरा था, पर मेरा न हुआ, एक ख्वाब था, जो पूरा न हुआ। उसकी हँसी मेरी सुबह थी, उसकी बातें मेरी शाम थीं, पर उसकी मंज़िल कोई और थी, हम तो बस रास्ते में मिले थे। मैंने उसे अपना जहाँ माना, उसने मुझे एक पल भर माना। मैंने उसके लिए दुआएँ लिखीं, उसने मेरी दुआओं को कभी पढ़ा ही नहीं। शिकायत नहीं है उससे आज भी, प्यार तो अपना काम कर गया। उसने जाना नहीं, पर मैंने तो प्यार करना सीख लिया। वो मेरा था, पर मेरा न हुआ, पर उससे जो प्यार किया, वो हमेशा मेरा ही रहा।
 प्यार लौट आता है कहते हैं प्यार एक बार जाता है तो लौटता नहीं, पर मैं कहती हूँ, सच्चा प्यार तो लौट आता है। भले ही रूप बदल कर, भले ही किसी और के हाथों में, पर लौटता ज़रूर है। कभी माँ की दुआ बनकर, कभी दोस्त की हँसी बनकर, कभी अपने ही बच्चे की नन्ही उँगली थाम कर। जो प्यार तुमने सच्चे दिल से दिया था, वो व्यर्थ नहीं गया। वो ब्रह्मांड में कहीं जमा हो रहा था, और आज ब्याज समेत तुम्हारे पास लौट रहा है। इसलिए जो गया उसका शोक मत करो, जो आ रहा है, उसके लिए दिल के दरवाजे खुले रखो। क्योंकि प्यार - कभी खत्म नहीं होता, बस लौट आता है।
 अब मैं खुद से प्यार करती हूँ अब मैं किसी से शिकायत नहीं करती, जो जैसा है, वैसा स्वीकार करती हूँ। अब आँखों में आँसू नहीं, सपने रखती हूँ, टूटे दिल से भी हँसना सीख गई हूँ। जो चले गए, उन्हें जाने दिया, जो हैं, उन्हें दिल से अपनाया। अब मैं खुद की सबसे अच्छी दोस्त हूँ, अपनी ही रोशनी में सबसे ज्यादा रोज़ हूँ। क्योंकि मैंने समझ लिया है - खोकर ही पाया जाता है, और टूटकर ही बनना आता है।
 मेरा विश्वास पुख्ता हुआ बहुत बार टूटी हूँ, बिखरी हूँ, फिर खुद ही खुद को समेटा है, गिरी हूँ कई बार अंधेरे में, फिर खुद ही दिया जलाया है। लोगों ने कहा, "अब नहीं होगा", रास्तों ने कहा, "अब मंज़िल नहीं", पर हर बार दिल ने धीरे से कहा - "एक कोशिश और सही।" आज पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो हर ज़ख्म एक निशान नहीं, एक मेडल लगता है। कि हाँ, मैं लड़ी थी, और मैं जीती थी। इसलिए आज कहती हूँ, गर्व से, प्यार से, और पूरी साँस लेकर - मेरा विश्वास पुख्ता हुआ। कि मैं कम नहीं हूँ, कि मेरा वक्त आएगा, कि ईश्वर देर भले कर दे, पर अंधेर नहीं करता। और जो हाथ छूट गए, वो छूटने ही थे, ताकि जो हाथ थामने हैं, उनके लिए जगह बन सके। सीमा असीम 

मेरा विश्वास - फिर से

 मेरा विश्वास - फिर से जब तुमने मेरा विश्वास तोड़ा, मेरा विश्वास दुनिया से ही उठ गया। जब तुमने मेरा हाथ छोड़ा, मैंने दुनिया से ही नाता तोड़ दिया। विश्वास तो वो पूँजी थी मेरी, जो सिर्फ़ तुम्हारे नाम की थी। पर तुम उसके लायक ही नहीं थे, ये बात देर से समझी थी। मैं छली गई थी, ठगी गई थी, लड़खड़ा कर वहीं गिर पड़ी थी। फिर धीरे-धीरे, अकेले ही, मैं खुद ही खुद से चल पड़ी थी। फिर मेरा विश्वास खुद जगा, मेरा मनोबल फिर से बढ़ा। मैं अपने ही आत्मबल से फिर से खड़ी हो गई। ये सोचकर कि - अभी भी विश्वास बाकी है इस दुनिया में। सीमा असीम  5,8,26

कविता ❤️

 पुकारो ना मुझे  थोड़ा जोर से पुकारो  शायद तुम्हारी आवाज  मुझ तक नहीं आ पा रही  पुकार तो रहे हो तुम  लेकिन तुम हल्के हल्के पुकार रहे हो  बहुत धीमे-धीमे  तुम्हारी आवाज निकल रही है  थोड़ी जोर से आवाज निकालो  जिससे मेरा तन मन झंकृत हो जाए  रोम रोम खिल जाए और  मां महक जाए  प्रेम के सागर में गोते लगाकर निखार जाए  क्या तुम नहीं जानते  प्रेम कभी कम नहीं होता  वह तो बढ़ता ही जाता है  दूर रहो या पास  उसमें कोई अंतर नहीं आता  प्रेम तो मन में रहता है  क्योंकि प्रेम ना कम होता है  ना प्रेम ज्यादा होता है  प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है... सीमा असीम  17,7,26

कविता ❤️

 आजा रे अब मेरा दिल तुम्हें पुकार रहा है  सच्चे मन से गुहार लगा रहा है   तुम तक मेरी आवाज तो पहुँच जाती होगी ना  तुम्हें भी सोते-सोते नींद खुल जाती होगी ना  और चौंक कर जग जाते होंगे ना और  आसपास देखने लगते होंगे ना  अपने बिस्तर को तटोल कर देखते होंगे ना  शायद तुम्हें एहसास होता होगा कि  मैं तुम्हारे पास नहीं लेटी हूं और  तुम गुनगुनाने लगते हो लग जा गले से  लेकिन तुम मुझे वहां नहीं पाते हो तो  उदास हो जाते होंगे  क्यों नहीं समझते  तुम्हारे बिना उदासी का चोला ही पा लिया है मैंने  तो अब आ जाओ या मुझे पुकार लो  एक बार ही सिर्फ एक बार  ही  सीमा असीम  16,7,26 अपने सच्चे मन से...

कविता

 कभी आसमान के तारों को देखा है  देखना कभी चांद से ज्यादा प्यारे तुम्हें सितारे लगते हैं न  चांद तो सिर्फ एक ही है तारे अनेक  तुम्हें तो सितारों को देखने की आदत भी है ना  एक चांद को कहां तक निहारोगे तुम  1 तारे को देखो  कभी दूसरे तारे को देखो  इस तरह तुम कई तारों को देख सकते हो ना  और चांद बेचारा एक है  तुम्हारा मन कहां लगेगा भला  हैं न 
आने नहीं तो जाने कहां-कहां से चले आते हैं लेना है नहीं 10 घंटे दिमाग का पाया और चले गए और न जाने कितनी ही गालियां उसमें औरत को दे डाली बुजर किसी भी औरत आलू खरीदने के लिए चली आई थी फैला था हाथ में उसमें शायद लौकी रखी हुई थी और आलू खरीदना था लेकिन वह उसके बजट में नहीं थी इसलिए इसलिए इसलिए नहीं खरीदी और आगे बढ़ गई पर सब्जी वाला तो विधिक गया कि भाव पूछ और खरीदी नहीं उसने 50 तरह की गलियां उसको सुना दे पास में बच्ची बैठी हुई थी स्कूल से शायद अच्छी थी इधर ही चली आई थी और अपना बैक खोलकर उसमें से कुछ निकल रही थी बड़े ध्यान से पापा की गलियों को सुनते रहे और कुछ नहीं बोल घर आई तो उसने अपनी मां को बताया मां पता है पापा को बहुत अच्छी-अच्छी गालियां देनी आती है मैं भी सीखना सीख लूंगी धीरे-धीरे फिर मैं भी दूंगी अगर कोई मुझे परेशान करेगा मैं भी ऐसे ही बोलूंगा 19 साल में बहन चोद करके चले आते हैं कहां-कहां से म****** उनकी आदत है बेटी चुप हो गई उसने कुछ नहीं कहा और अपने स्कूल का काम करना शुरू कर दिया की दुकान पर काम जाती है पहले वह रोज पहुंच जाती थी वह बड़ी हो गई है और सब्जी वाले लोगों से घूर-घूर कर देखते...

प्रेम कविता ❤️

 तुम क्या करते हो  क्या नहीं  मुझे नहीं पता लेकिन  मुझे बस इतना पता है कि तुम मुझे और सिर्फ मुझे ही प्रेम करते हो  मेरा सच्चा प्रेम तुम्हारे मन में  हर वक़्त उमड़ता रहता है और  मुझे पुकारता रहता है  याद करता रहता है  तभी तो मैं यहां  हर बार तुम्हें याद करती हूं  तुम्हारी बात करती हूँ  क्योंकि सच्चा प्रेम  हर कोई नहीं करता और  जो सच्चा प्रेम कर लेता है  उसका प्रेम अथाह हो जाता है  अनंत हो जाता है और अमर हो जाता है  और फिर ब्रह्मांड में गूँजता रहता है उनका नाम  जिसे लोग महसूस कर लेते हैं  अहसास में भर लेते हैं.. सीमा असीम  14,7,26

मेरा मन, तेरा मन हिंदी कविता

 कि मेरा मन बस तुम्हारी तरफ ही खिंचा चला जाता है  हर वक्त हर पल हर  क्षण  सिर्फ और सिर्फ तेरा ही नाम लिए चला जाता है  रात को जब आंख खुल जाती है और  पुकारने लगता है तुम्हें ही  किसी काम को करते समय  काम से मन हट जाता है  और  तेरा नाम ले ले कर पुकारता है मेरा मन  न जाने तुझे ही याद करता है  न जाने क्यों तुझे ही पुकारता है  न जाने क्यों खिंचा चला जाता है मेरा मन  तेरी ओर ही बार बार हर बार  जिस राह से तू गुजरा होगा  उस हर राह में तुम्हें भी मेरी ही  याद आई होगी  मेरी ही बातें याद आयीं होगी और  तूने भी मुझे पुकार लिया होगा   जोर से तो नहीं हाँ हल्के से ही  पुकारा होगा  हां तुमने मुझे जरूर अपने मन में गुनगुना लिया होगा  किसी गीत, ग़ज़ल या कविता की तरह  और ब्रह्मांड की ओर नजर उठाई होगी  और मुस्कुरा दिया होगा मन ही मन  सच कहूं यही तो प्रेम है  जो तुम से दूर रहकर भी  कभी कम नहीं हुआ  कमी भुला नहीं और  ना कभी इसमें जरा सा भी दूर होने का  अहस...
 कभी-कभी मुझे लगता है की दुनिया में कुछ भी सच नहीं है पर ही लिखा हुआ है बुरा लगता है कोई झूठा होता है झूठ बोलता है या फिर हर बार वही झूठ बोलता है जो पकड़ में आ जाता है क्योंकि सच जो होता है इतने भी झूठ बोल लिया जाए छुपता नहीं है सच हमेशा सच रहता है उसे अपने आवर्त से त दबा ही नहीं सकता क्योंकि कितना भी झूठ बोल लो सच सामने ही आ जाता है और अक्सर ऐसा होता है जो इंसान झूठ बोल रहा होता है उसका सच हमें पता होता है फिर भी हमें लगता है जो वह बोल रहा है वही सच है लेकिन सच हमेशा सच ही रहता है और झूठ हमेशा झूठ  कितना भी झूठ बोल लो सच सामने आ जाता है   भले ही दुनिया झूठ है लेकिन सच ईश्वर है जिस को कभी नकारा नहीं जा सकता, वह सच जो कभी झूठ हो ही नहीं सकता  ईश्वर है और सच भी है इस दुनिया में...

हिंदी कविता

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 जो मैं तुम्हें बार-बार याद करती हूं   मैं यूं ही तो नहीं तुम्हें स्मृतियों में रखती हूँ  कुछ तो बात होगी जरूर  कुछ तो इसका कारण है अन्यथा  मैं क्यों तुम्हें याद करूं  मैं क्यों तुम्हारी बात करूं  क्यों मैं तुम्हें लिखूं और  क्यों मैं तुम्हें पढ़ूं  मैं तुम्हें ही पढ़ती हूं  रात हो या दिन  हर पल में  हर क्षण में  सिर्फ मैं तुम्हें ही याद करती हूं  तुम्हारी ही बात करती हूं  मन ही मन तुम्हें दोहराती हूं और  फिर उसे कागज पर उतार देते हैं  की मन बहुत बेचैन है  कि मन को चैन ही नहीं है  एक पल भी  तुम्हारे बिना जीने को तैयार ही नहीं होता   जैसे जैसे रात गहराती जाती है  तुम्हारी याद और ज्यादा  और भी ज्यादा बढ़ती जाती है  यह अंधेरा मेरे मन को और जागृत कर देता है  और तुम्हारी यादों से रौशन कर देता है  तुम भी ऐसे ही करते होंगे  शायद तुम भी मुझे यूं ही याद करते होंगे  और मेरी रोशनी से जगमगाते रहते होगे   जैसे कि मैं तुम्हारी रोशनी से जगमगाती...

कविता

 मैं तो इन दिनों बहुत ही अचम्भे में हूं  मैं तुम्हें देखूं या तुम्हारे करतबो को  कैसे कर लेते हो  तुम ऐसे करतब  कैसे तुम फंसा लेते हो  कैसे तुम चल कर लेते हो और  कैसे तुम बिना निभाए  और सबको निभाने को  मजबूर कर देते हो  सच में कमाल हो   तुम जैसा कोई हो ही नहीं सकता इस दुनिया में  कुछ कहा है करने के लिए  मन ही नहीं है  बस सोचती रहती हूँ  कि यह कैसे कर पाते हो तुम   कैसे आखिर कैसे?? सीमा असीम  9,6,26
 है प्रेम जो तूने मुझे दुख दिया  जो तूने मुझे कष्ट दिया  जो तूने मुझे तकलीफें दी  उसके लिए तो क्या ही कहा जाए  उसे तुम्हें कभी नहीं कह सकती  उसे शब्दों में बयां किया ही नहीं जा सकता  लेकिन बस इतनी ही दुआ करती हूं  तेरे लिए की तुझे दवाइयां तो मिले  लेकिन दर्द ना मिले तुझे कोई  तू सब कुछ देखे लेकिन तुझे देखने के लायक कोई अच्छा दृश्य ना मिले  तुझे नींद आए लेकिन कोई सपना ना आए  तुझे गीत तू सुन लेकिन तू कोई धुन ना बन पाए  तुझे नाव तो मिले  तू नाव में बैठे  नाव में घूमें  नाव में सैर करें लेकिन  तुझे कभी नदी ना मिले  तेरे ऊपर प्रेम के कोर ही कोर बरसते रहे  कोड़े तो बरसे लेकिन तेरी पीठ पर एक भी नीला निशान ना मिले  कि तू मेरे दर्द को क्या समझेगा  कैसे समझ सकता है कि  कभी दरवाजे को पकड़ के रोना  कभी पेड़ पौधों को चिपक चिपक के बातें करना  रोना उनसे अपने दुख दर्द को कहना  फूलों के साथ बतियाना  लेकिन तू कहां समझेगा यह सब  इसीलिए तुझे बस यही है कि तुझे कभी नदी ना मिले...
 भारतीय सिनेमा और टेलीविजन की एक वरिष्ठ और दिग्गज चरित्र अभिनेत्री हिमानी शिव परी को हिमानी शिवपुरी को कौन नहीं जानता देहरादून में 2022 24 अक्टूबर 1960 को हिमानी का जन्म हुआ था वीक लगभग 4 दशक से बहुत सारी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम कर चुके हैं जिसमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे कुछ-कुछ होता है हम आपके हैं कौन और उसके अलावा टीवी के भी बहुत सारे यादगार सो हैं जिन्होंने जिसमें उन्होंने भूमिका निभाई है उनका जन्म देहरादून में 24 अक्टूबर 1960 को हुआ था और उनके पिता हरि दत्त भट्ट शैलेश एक प्रसिद्ध हिंदी कवि है और हिंदी के शिक्षक भी दून कॉलेज में शिक्षक थे जहां से अमिताभ बच्चन ने भी पढ़ाई की मां शैली भट्ट जो की ग्रहणी है हिमांशी पुरी की शुरुआती शिक्षा दोनों स्कूल से ही हुई थी उसके बाद उन्होंने दव कॉलेज देहरादून से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया थिएटर वह कॉलेज के दिनों से ही करने लगी थी क्योंकि उनकी नाटक करने में बहुत रुचि थी और इसलिए उन्होंने अपने पार्ट टाइम में कभी भी वह शाम को टाइम मिलता था तो वह थिएटर करती थी वह कहती थी कि वह कहती है कि जब स्कूल पढ़ाई करने के बाद जब एक घंट...
 हे ईश्वर मुझे आपसे बहुत सारी शिकायतें हैं बहुत सारी बातें हैं जो मैं आपसे कहना चाहती हूं उससे पहले बात तो यह है कि आप मुझे हमेशा इतना कम क्यों देते हो मुझे तो बहुत सारा चाहिए बहुत सारा, दुनिया की सारी खुशियां चाहिए और दुनिया में जितने सुख है वह सब मुझे चाहिए लेकिन आप समझते ही नहीं हो, क्यों नहीं समझते हो? मुझे वह सब चाहिए जो इस दुनिया में है और मैं खूब बड़ा सम्मान लेना चाहती हूं इस दुनिया का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान और मैं कम से कम दो बंगले तो जरूर चाहती हूं मैं बड़ी-बड़ी दो गाड़ियां भी चाहती हूं और मैं बहुत सारा, बहुत सारा, बहुत सारा धन दौलत भी चाहती हूं लेकिन आप कंजूसी करने लगते हो,क्यों करते हो नहीं पता..  मैं चाहती हूं मेरा बेटा अमन बहुत बड़ी कंपनी का मालिक बन जाए और पूरी कंपनी में उसके कम से कम हजार नौकर हो जिसकी देखभाल करने लायक बन जाए, आपको करना होगा ना क्योंकि ऐसे तो काम ही नहीं चलेगा, आपको देना ही होगा मुझे बहुत सारा बहुत सारा सब कुछ...खुशियां,प्रेम, मान, सम्मान, इज्जत और धन दौलत...
 
 उसने छोटा सा एक फूल उठाकर मुझे दिया कहां आंटी आपके पास रखो और बात करके फिर एक फूल और लेकर आ गई यह आप अंकल को दे देना अच्छा हो थैंक यू बेटा आप मुझे क्यों बोल दे रहे हो क्योंकि आप मुझे बहुत प्यारी लग रही हो इसलिए मैं आपको एक फूल दे रही हूं आप इसको संभाल के रखना या फिर ऐसा करो आप इसको बालों में लगा लो छोटी सी यीशु ने वह बच्चे थैंक यू बेटा मैं जाकर अंकल को दे दूंगी