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कहानी या किस्सा हूँ कोई

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 मैं तो बस एक कहानी  या किस्सा हूँ कोई   काश तुम भी  एक उपन्यास होते  किसकी कहानी   जो एक बार लिख दी गयीं  बस वही रहती है  कभी नहीं बदलती  जो लिख गई  सो लिख गयीं  क्यों हो गये तुम  एक अखबार से  जो बदल जाता है  हर बार  हर रोज  हर दिन.. सीमा असीम  1,2,26

न दुआ न बद्दुआ

रुला कर मुझे हँसने वाले  दुखा कर दिल मेरा खुश होने वाले   है हम तो अब ईश के सहारे  कि नहीं तू मेरी अब बद्दुआ के भी काबिल.. सीमा असीम  1,2,26

जो अपना है

 पा लिया तो क्या पाया  खो दिया तो क्या खोया  जो अपना है संग है सदा  दूर है जो तो क्या गया  याद किया, क्या याद किया  जो भुला दिया तो क्या भूला  जो रहता है अहसासों में  लौट आया तो क्या लौटा!! सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बिखरना

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 हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में  खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते  इसलिए जो बिखर गया है  उसे बिखर जाने दो क्योंकि  कभी-कभी बिखरी हुई चीजें   सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं  प्यारी लगती हैं  जैसे की बिखरी हुई नदी  जैसे कि पहाड़  जैसे की आकाश  बिखरे हुए खेत  जंगल  अगर इनको समेट देंगे तो  उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए  बिखरी हुई चीजें भी  कभी-कभी अच्छी लगती हैं  है ना हम बिखरे हुए हैं और  तुम भी तो बिखरे हुए हो  पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बेचैनी

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 मन की हर बेचैनी को  कैसे मैं शब्दों में ढाल दूँ  कि हद है शब्दों की  पर मेरी बेचैनी की  कोई भी हद है कहाँ.. सीमा असीम  30,1,26

इंतजार

 अब तो कोई आस भी नहीं है  अब तो कोई उम्मीद भी नहीं है  फिर भी क्यों रहता है मुझे  इंतजार तेरा  हर बार तेरे लौट आने का  लेकिन इंतजार कैसा  लौंटने का  कि जब तुम कहीं गये ही नहीं हो  पल भर को भी  मेरे मन से दूर... सीमा असीम सक्सेना  29,1,26

वजह

 मुस्कुराने के लिए किसी वजह का होना तो जरूरी नहीं है  हम मुस्कुरा तो कभी भी सकते हैं  हम मुस्कुरा तो कहीं भी सकते हैं  किसी भी प्रकार अपनी मुस्कान को कायम रख सकते हैं और सबसे अच्छी बात यह है  कि हम अक्सर बेवजह मुस्कुरा देते हैं.... सीमा असीम  29,1,26

जीत या हार

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 कभी-कभी तुम सोचते होंगे या मुझे लगता है कि  तुम हमेशा यही सोचते होंगे  कि तुम जीत गए  तुमने सबको हरा दिया  पर सच तो यह है   कि तुम हारे ही नहीं बल्कि  पूरी तरह से हार गए और  हम जीत गए  तुम्हें नहीं पता  हाँ नहीं पता कि  जीत क्या होती है और  हार क्या  तुम जीत कर भी हारे हुए हो  हम हार कर भी जीत गए हैं... सीमा असीम  28,1,26

प्रेम

 प्रेम  प्रेम एक ऐसा शब्द है  जिसे सिर्फ अनुभूत किया जा सकता है  महसूस किया जा सकता है   उसका अहसास किया जा सकता है  उसे लिखा नहीं जा सकता हाँ प्रेम को लिखा नहीं जा सकता  है ना... सीमा असीम  27,1,26

पुकार

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 पुकारता है क्यों  क्यों पुकरता है  क्या नहीं जानता  क्या नहीं है पता  कि दिल को सब पता है  कि दिल सब समझता है  अहसासों के वन में  यूँ अकेला पड़ा है  कि पुकारता है क्यों... सीमा असीम  26,1,26

चक्की

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 चक्की चलाती महिला  जब इस तस्वीर को देखा तो मन में एक ख्याल आया,  पुराने जमाने के लोगों तक मुझे इस तस्वीर ने पहुंचाया   जहां होते होंगे गांव चक्की खेत खलियान और भरे पूरे मिटटी के घर  हालांकि अभी भी होते होंगे  पर नहीं दिखते कहीं ऐसे  कच्चे घर चक्की चूल्हा   जिसे देखते ही मन खुशी से भर जाए   मानों मन को सकुं का अहसास करा जाए   कितनी मेहनत करती पहले की औरतें  कितना काम करती घर की औरतें  जब वे सुबह सवेरे घर को साफ सुथरा करके लीप पोत कर  अपनी चक्की लेकर बैठ जाती   उसमें अनाज डाल कर पीसती   साथ ही और भी बहुत कुछ पीस लेती होंगी  आसपास कुछ और औरतें भी साथ में आकर भी बैठ जाती होगी  बोलते बतियाते हँसते मुस्कुराते कब उनका काम खत्म हो जाता होगा  पता ही नहीं चलता होगा संग साथ में किसी दुःख दर्द का भान भी नहीं होता होगा   यह मेहनती महिलायें कितना मेहनत करती सुबह से लेकर रात तक  घर के एक-एक काम को बड़ी लगन के साथ  करीने के साथ  करती रहती  कभी गाने गाती...

मुलाक़ात

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 सोचती हूँ  जब कभी उनसे मुलाकात होगी  क्या मन की सब उनसे बात होगी  कह भी पाऊंगी कुछ या  सब भूल जाऊंगी  आंखों से आंसू बहेंगे या  या जुबां तक कोई बात आएगी... सीमा असीम सक्सेना  22,1,26

तुम्हें

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 तुम्हें किस कदर चाहा है  तुम्हें किस कदर माना है  अहसास तक नहीं तुमको  तुम्हें किस कदर पुकारा है!! सीमा असीम 

खुश देखना तुम्हें

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 जिसे हम प्रेम करते हैं  मोहब्बत करते हैं और  अपना प्यार लुटा देते हैं  उसे खुश देखना  दुनिया का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है  लेकिन किसी गैर के साथ  नहीं   खुद के साथ!! सीमा असीम सक्सेना  20,1,26

तुम्हारा सच

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 तुम्हारा सच क्या है  तुम ही जानते हो  हम तो बस अंदाज लगाते रहते हैं  पर सच क्या है सच में हम नहीं जानते  हां बस दिल दुखता है थोड़ा  जब हम तुम्हें किसी और का होते देखते हैं  तब भी नहीं पता कि सच क्या है क्या नहीं  वह तो तुम ही जानते हो ना  सिर्फ तुम ही तो जानते हो कि  तुम्हारा सच है क्या आखिर... सीमा असीम  19,1,26
कि तुम याद आते हो  कि क्यों तुम याद आते हो  भर देते हो मन एक बेचैनी सी  कि किसी तरह से भी तुम दूर नहीं जाते हो  रहते मेरे मन के हरदम आसपास  बिना बुलाये क्यों चले आते हो  क्या तुम नहीं जानते मैं  याद नहीं करती हूँ तुम्हें पल भर को भी  पर तुम तुम क्षण भर को भी मेरे मन को  खाली होने का अहसास नहीं करते हो  मानों धुनी रमाये मेरे मन में बैठ जाते हो  कि हर जगह  हर किसी में मुझे तुम ही दिख जाते हो  तो बताओ न तुम  मुझे क्यों याद आते हो ? हाँ क्यों बेसबब याद आते हो ? सीमा असीम सक्सेना, बरेली  19,1,26 
गुनगुना रहे हैं गीत अकेले ही बैठकर  किसी मूरत के सामने ही बैठकर  कि नदीं उफान पर है आजकल  लहरों को गिन रहे हैं वहीं बैठकर || सीमा असीम  24 ,12,25   नहीं नहीं अब मुझे यह बच्चा नहीं चाहिए कुछ करो कुछ भी करो लेकिन अब मैं इसका पालन पोषण नहीं कर सकती देखभाल नहीं कर सकती तो पैदा क्यों करूं अब मेरा मन तो पूजा पाठ में राम गया है मैंने तो व्रत मन कर लिया है संसार से मेरे बच्चे बड़े हो गए मेरे दो बच्चों की शादी हो गई अब मैं इस उम्र में मैन बनूंगी कैसा लगेगा नहीं मुझे यह बच्चा नहीं चाहिए वह एकदम से चीख पड़ी थी   लेकिन ईश्वर के आगे कभी किसी की चली है भला जो ईश्वर को मंजूर होता है वही होता है जिसको इस दुनिया में भेजना होता है वह किसी तरह से आ ही जाता है किसी की भी कोख से पैदा हो जाता है और जिसको नहीं आना होता है वह कोख में ही खत्म हो जाता है इस दुनिया का मुंह नहीं देख पता ऐसा ही उसके साथ हुआ था  लाख चेतन किए लाख दवाइयां खाई लाख उपाय आजमाए लेकिन इस बच्चे को मेरी कोख में आना है मेरी कोख से ही पैदा होना है तो अब क्या करें वह डॉक्टर के पास गए तुम इस बच्चे को ...

चाह

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 चाहत तो बस इतनी सी है कि जिंदगी में हमारी भरपूर खुशियां ही खुशियां हो   प्राकृतिक वातावरण का माहौल हमारे आसपास हो बहुत सारा प्यार हो और तुम्हारा साथ हो   एक खूबसूरत सा महल जैसा घर हो इसमें हमारा एक नया संसार हो   दर्द का ना हो नाम तो निशान जरा सा भी बस खुशी और सुख की बस बौछार हो   मैं बना लूं खुद को एक बहुत बेहतर इंसान और मेरी आत्मा एकदम पवित्र हो  मेरे चेहरे से झलके मेरी मासूमियत मेरे मन में इतनी ज्यादा पारदर्शिता हो   हमारी सारी चाहते पूरी हो जाए और सारे सपने हो पूरे बस इतनी सी तो ख्वाहिश है  जीवन में वह सब मिल जाए इसके लिए हम हकदार हैं  एक सुंदर सा महल हो सपने जैसा और उसमें हो प्रेम ढेर सारा  अपनों का साथ हो और भरपूर अपनापन हो  बस इतनी सी ही तो चाहत है जैसे भी हो बस पूरी हो जाए  कैसे भी करके इच्छाएं हमारी पूरी हो जाए  क्षितिज के पार जाने की जो चाहत है  आसमान को छूने की जो चाहत है  वह पल भर में पूरी हो जाए  जैसा चाहूं जैसा सोचूँ  बस वैसा होता जाए  अपने आप से सारे रास्ते ...

धैर्य

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 धैर्य एक ऐसा शब्द जो आपको कभी भी निराश नहीं होने देता अगर आप धैर्य का दामन थाम लेते हैं तो आप कभी भी परेशान नहीं हो सकते क्योंकि धैर्य हमें सिखाता है अपने सपनों को जीने का तरीका क्योंकि अगर हम धैर्य के साथ काम करते हैं तो हम अपने सपनों को जीते रहते हैं  अगर हमारे पास सपने नहीं होंगे तो जीवन क्या होगा.. ऐसा जीवन किस काम का होगा.. मेरे ख्याल से जैसे कोई पक्षी होता है तो उसके पंख टूट जाते हैं तो वह आसमान में अपनी ऊंची उड़ान कभी नहीं भर सकता इसलिए जीवन में सपनों का होना बहुत जरूरी है  जब सपने नहीं होते हैं या फिर हम सपनों को छोड़ देते हैं या सपनों को भूल जाते हैं तो जीवन किसी बर्फ के सामान जमा हुआ लगता है जिसमें कोई गरमाहट नहीं  जैसे कोई बंजर सा मैदान बन जाता है जिसमें नहीं उगते कोई फूल.. टूटे हुए पंखों वाला पक्षी कभी आसमान में उड़ा सकता है  नहीं न.. तो हमें अपने सपनों को धैर्य के साथ थामें रहना चाहिए  पकड़े रहना चाहिए तब तक  जब तक है जीवन  जब तक है दुनिया और  जब तक है हम!!!! सीमा असीम सक्सेना  20,12,25

क्यों छोड़ा, क्यों तोड़ा रूह को

 क्या तुम जानते हो या तुम्हें पता है कि  तुमने किस तरह हमारा त्याग कर दिया था  जिस दिन तुम्हारी आत्मा ने मेरी आत्मा को किसी एक दूसरी आत्मा के लिए त्याग किया था  उस दिन काँप उठी थी धरती,नदियों में बाढ़ आ गई थी, धरती घबराकर हिलने लगी थी  क्या तुम्हें पता है जिस दिन तुमने मुझसे प्रेम किया था उसे दिन दुनिया बहुत खूबसूरत हो गई थी  फूलों की  खुशबू से सराबोर  हो गई थी,  मैं मौन थी  चुप थी  खामोश थी  फिर भी हमारा प्रेम बहुत गहरा होता चला जा रहा था  बहुत ही गहरा  मानो हमारी आत्माएं एक दूसरे से बांध गई थी लेकिन  तुमने बंधी हुई दोनों आत्माओं को मेरी और तुम्हारी आत्मा को अलग किया किसी दूसरी आत्मा से रिश्ता जोड़ने के लिए  क्या तुमने कभी सोचा नहीं  क्या तुम्हारे मन में एक ख्याल भी नहीं आया कि  तुमने ऐसा कैसे किया  किसी आत्मा को कष्ट देना  कितना बड़ा पाप है  मेरी रूह तुम्हारे लिए हर समय आवाज लगाती थी  अभी भी आवाज लगाती है  अभी भी तड़प होती है  व्याकुल होकर मैं तुम्हें ढूंढती फिरती हू...