धरा पर रहना है तो घर धरा पर रहना है तो फूलों धरा पर रहना सीख लो पेड़ों पौधों को बचाए रखो पेड़ों पौधों को बचाए रखो फूलों पत्तों से जीना सीख लो नहीं सीख सकते हो तो जीवन व्यर्थ है इसलिए धरती पर रहना व्यर्थ है तुम तो शायद किसी और दुनिया के बने हो कि तुम्हें फूलों पत्तों से पेड़ों पौधों से भी प्यार प्यार नहीं की यही तो है जीवन के वह मंत्र जैसे जीवन बन जाता है खुशियों का तंत्र नमस्कार बुद्ध तो बहुत सरल है बुद्ध तो बहुत सरल है कि वह त्याग कर चले गए अपना घर बार पति-पत्नी बच्चे और साथ पाठ पर सोचा है कभी यशोधरा के जीवन को पर सोचा है कभी यशोदा के जीवन को की कितने कासन से उसने निकले होंगे जीवन के दिन एवं अवस्था में पति वियोग क्या होता है वह यशोधरा से सीखो कैसे पाला होगा अपने बच्चों को कैसे संभाला होगा राजपथ को कभी सोचा है कि यशोधर ने कैसे गुजरे होंगे दिन अपने यमुनावस्था के गुजार ली होगी बच्चों को भी जैसे तैसे पाल पोस लिया होगा राज पाठ भी जैसे-जैसे संभाल लिया होगा पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी यशोधरा का कठिन जीवन कितनी मुश्क...
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कॉफी पीने के साथ-साथ लैपटॉप भी खोल लेता है और ऑफिस का काम शुरू कर देता है जब ऑफिस के लिए निकलना होता है तो थोड़ा पहले नहीं उठाता है तैयार होता है कॉफी पीकर चला जाता है कभी नाश्ता नहीं करता उसे लगता है कि अगर वह ननाश्ता करेगा तो मामा को परेशान होगी क्योंकि उन्हें तो बहाना मिल जाए बस किचन में जाने का खाना बनाने का फिर बनाएंगे अच्छे तरीके से भरवा पराठे कभी आलू के गोभी के पनीर के उन्हें लगता है कि नाश्ते में पराठे ही खाने चाहिए इसीलिए वह घर में नाश्ता नहीं करता और ऑफिस पहुंचकर दूध कॉर्नफ्लेक्स खा लेता है वही उसका नाश्ता हो जाता है बाकी और नाश्ते में काफी चीज होती है अंडा ब्रेड इडली सांबर चटनी आधी आधी लेकिन वह सिर्फ कौन ब्लैक और मिल्क ही लेता है या कभी का बाय मोस्टली उससे उसका पेट भर जाता है 2:00 बजे थोड़ी सी दाल चावल दिन में काफी कई बार हो जाती है कॉफी पीना उसे पसंद है या फिर आदत हो गई है उसके बिना काम ही नहीं हो पता हर राधे हर दो-तीन घंटे में उसे एक कप कॉफी चाहिए हालांकि हफ्ते में एक या दो दिन ही वह ऑफिस जाता है बाकी दिन घर से ही काम करता है तब वह नाश्ते में जब बेड आ जाती है तो उसे अ...
बिखरना
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हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते इसलिए जो बिखर गया है उसे बिखर जाने दो क्योंकि कभी-कभी बिखरी हुई चीजें सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं प्यारी लगती हैं जैसे की बिखरी हुई नदी जैसे कि पहाड़ जैसे की आकाश बिखरे हुए खेत जंगल अगर इनको समेट देंगे तो उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए बिखरी हुई चीजें भी कभी-कभी अच्छी लगती हैं है ना हम बिखरे हुए हैं और तुम भी तो बिखरे हुए हो पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना 31,1,26
जीत या हार
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कभी-कभी तुम सोचते होंगे या मुझे लगता है कि तुम हमेशा यही सोचते होंगे कि तुम जीत गए तुमने सबको हरा दिया पर सच तो यह है कि तुम हारे ही नहीं बल्कि पूरी तरह से हार गए और हम जीत गए तुम्हें नहीं पता हाँ नहीं पता कि जीत क्या होती है और हार क्या तुम जीत कर भी हारे हुए हो हम हार कर भी जीत गए हैं... सीमा असीम 28,1,26
चक्की
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चक्की चलाती महिला जब इस तस्वीर को देखा तो मन में एक ख्याल आया, पुराने जमाने के लोगों तक मुझे इस तस्वीर ने पहुंचाया जहां होते होंगे गांव चक्की खेत खलियान और भरे पूरे मिटटी के घर हालांकि अभी भी होते होंगे पर नहीं दिखते कहीं ऐसे कच्चे घर चक्की चूल्हा जिसे देखते ही मन खुशी से भर जाए मानों मन को सकुं का अहसास करा जाए कितनी मेहनत करती पहले की औरतें कितना काम करती घर की औरतें जब वे सुबह सवेरे घर को साफ सुथरा करके लीप पोत कर अपनी चक्की लेकर बैठ जाती उसमें अनाज डाल कर पीसती साथ ही और भी बहुत कुछ पीस लेती होंगी आसपास कुछ और औरतें भी साथ में आकर भी बैठ जाती होगी बोलते बतियाते हँसते मुस्कुराते कब उनका काम खत्म हो जाता होगा पता ही नहीं चलता होगा संग साथ में किसी दुःख दर्द का भान भी नहीं होता होगा यह मेहनती महिलायें कितना मेहनत करती सुबह से लेकर रात तक घर के एक-एक काम को बड़ी लगन के साथ करीने के साथ करती रहती कभी गाने गाती...
तुम्हारा सच
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तुम्हारा सच क्या है तुम ही जानते हो हम तो बस अंदाज लगाते रहते हैं पर सच क्या है सच में हम नहीं जानते हां बस दिल दुखता है थोड़ा जब हम तुम्हें किसी और का होते देखते हैं तब भी नहीं पता कि सच क्या है क्या नहीं वह तो तुम ही जानते हो ना सिर्फ तुम ही तो जानते हो कि तुम्हारा सच है क्या आखिर... सीमा असीम 19,1,26
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कि तुम याद आते हो कि क्यों तुम याद आते हो भर देते हो मन एक बेचैनी सी कि किसी तरह से भी तुम दूर नहीं जाते हो रहते मेरे मन के हरदम आसपास बिना बुलाये क्यों चले आते हो क्या तुम नहीं जानते मैं याद नहीं करती हूँ तुम्हें पल भर को भी पर तुम तुम क्षण भर को भी मेरे मन को खाली होने का अहसास नहीं करते हो मानों धुनी रमाये मेरे मन में बैठ जाते हो कि हर जगह हर किसी में मुझे तुम ही दिख जाते हो तो बताओ न तुम मुझे क्यों याद आते हो ? हाँ क्यों बेसबब याद आते हो ? सीमा असीम सक्सेना, बरेली 19,1,26