Posts

Showing posts from 2026
 धरा पर रहना है तो घर धरा पर रहना है तो फूलों धरा पर रहना सीख लो पेड़ों पौधों को बचाए रखो पेड़ों पौधों को बचाए रखो फूलों पत्तों से जीना सीख लो नहीं सीख सकते हो तो जीवन व्यर्थ है इसलिए धरती पर रहना व्यर्थ है तुम तो शायद किसी और दुनिया के बने हो कि तुम्हें फूलों पत्तों से पेड़ों पौधों से भी प्यार प्यार नहीं की यही तो है जीवन के वह मंत्र जैसे जीवन बन जाता है खुशियों का तंत्र नमस्कार  बुद्ध तो बहुत सरल है बुद्ध तो बहुत सरल है कि वह त्याग कर चले गए अपना घर बार पति-पत्नी बच्चे और साथ पाठ पर सोचा है कभी यशोधरा के जीवन को पर सोचा है कभी यशोदा के जीवन को की कितने कासन से उसने निकले होंगे जीवन के दिन एवं अवस्था में पति वियोग क्या होता है वह यशोधरा से सीखो कैसे पाला होगा अपने बच्चों को कैसे संभाला होगा राजपथ को कभी सोचा है कि यशोधर ने कैसे गुजरे होंगे दिन अपने यमुनावस्था के गुजार ली होगी बच्चों को भी जैसे तैसे पाल पोस लिया होगा राज पाठ भी जैसे-जैसे संभाल लिया होगा पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी पर पति का सुख क्या होता है वह कभी भूल पाई होगी यशोधरा का कठिन जीवन कितनी मुश्क...
 कॉफी पीने के साथ-साथ लैपटॉप भी खोल लेता है और ऑफिस का काम शुरू कर देता है जब ऑफिस के लिए निकलना होता है तो थोड़ा पहले नहीं उठाता है तैयार होता है कॉफी पीकर चला जाता है कभी नाश्ता नहीं करता उसे लगता है कि अगर वह ननाश्ता करेगा तो मामा को परेशान होगी क्योंकि उन्हें तो बहाना मिल जाए बस किचन में जाने का खाना बनाने का फिर बनाएंगे अच्छे तरीके से भरवा पराठे कभी आलू के गोभी के पनीर के उन्हें लगता है कि नाश्ते में पराठे ही खाने चाहिए इसीलिए वह घर में नाश्ता नहीं करता और ऑफिस पहुंचकर दूध कॉर्नफ्लेक्स खा लेता है वही उसका नाश्ता हो जाता है बाकी और नाश्ते में काफी चीज होती है अंडा ब्रेड इडली सांबर चटनी आधी आधी लेकिन वह सिर्फ कौन ब्लैक और मिल्क ही लेता है या कभी का बाय मोस्टली उससे उसका पेट भर जाता है 2:00 बजे थोड़ी सी दाल चावल दिन में काफी कई बार हो जाती है कॉफी पीना उसे पसंद है या फिर आदत हो गई है उसके बिना काम ही नहीं हो पता हर राधे हर दो-तीन घंटे में उसे एक कप कॉफी चाहिए हालांकि हफ्ते में एक या दो दिन ही वह ऑफिस जाता है बाकी दिन घर से ही काम करता है तब वह नाश्ते में जब बेड आ जाती है तो उसे अ...

और तुम

Image
 घने पेड़ों की छाँव हो  नदी का किनारा हो  थोड़ा सा सकूं हो और  हो थोड़े से सिर्फ तुम... सीमा असीम

चाँद

आती रही याद जिसकी सुबह से शाम तक  अरे वो तो चाँद है  जो छुप जाता है  सूर्य के उगते ही ||| सीमा असीम सक्सेना 
 गुजर जाता है वक़्त  पर वक़्त गुजरता नहीं  ठहर जाता मन वही  पर वहाँ से कभी हटता नहीं  अब तुम ही बताओ जरा  ऐसा होता है तो क्यों होता है  वैसा क्यों होता नहीं  जो चाहों वो पाओ  दिल क्यों अटका रहता है वहीं.... सीमा असीम  8,2,26

कहानी या किस्सा हूँ कोई

Image
 मैं तो बस एक कहानी  या किस्सा हूँ कोई   काश तुम भी  एक उपन्यास होते  किसकी कहानी   जो एक बार लिख दी गयीं  बस वही रहती है  कभी नहीं बदलती  जो लिख गई  सो लिख गयीं  क्यों हो गये तुम  एक अखबार से  जो बदल जाता है  हर बार  हर रोज  हर दिन.. सीमा असीम  1,2,26

न दुआ न बद्दुआ

रुला कर मुझे हँसने वाले  दुखा कर दिल मेरा खुश होने वाले   है हम तो अब ईश के सहारे  कि नहीं तू मेरी अब बद्दुआ के भी काबिल.. सीमा असीम  1,2,26

जो अपना है

 पा लिया तो क्या पाया  खो दिया तो क्या खोया  जो अपना है संग है सदा  दूर है जो तो क्या गया  याद किया, क्या याद किया  जो भुला दिया तो क्या भूला  जो रहता है अहसासों में  लौट आया तो क्या लौटा!! सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बिखरना

Image
 हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में  खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते  इसलिए जो बिखर गया है  उसे बिखर जाने दो क्योंकि  कभी-कभी बिखरी हुई चीजें   सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं  प्यारी लगती हैं  जैसे की बिखरी हुई नदी  जैसे कि पहाड़  जैसे की आकाश  बिखरे हुए खेत  जंगल  अगर इनको समेट देंगे तो  उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए  बिखरी हुई चीजें भी  कभी-कभी अच्छी लगती हैं  है ना हम बिखरे हुए हैं और  तुम भी तो बिखरे हुए हो  पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बेचैनी

Image
 मन की हर बेचैनी को  कैसे मैं शब्दों में ढाल दूँ  कि हद है शब्दों की  पर मेरी बेचैनी की  कोई भी हद है कहाँ.. सीमा असीम  30,1,26

इंतजार

 अब तो कोई आस भी नहीं है  अब तो कोई उम्मीद भी नहीं है  फिर भी क्यों रहता है मुझे  इंतजार तेरा  हर बार तेरे लौट आने का  लेकिन इंतजार कैसा  लौंटने का  कि जब तुम कहीं गये ही नहीं हो  पल भर को भी  मेरे मन से दूर... सीमा असीम सक्सेना  29,1,26

वजह

 मुस्कुराने के लिए किसी वजह का होना तो जरूरी नहीं है  हम मुस्कुरा तो कभी भी सकते हैं  हम मुस्कुरा तो कहीं भी सकते हैं  किसी भी प्रकार अपनी मुस्कान को कायम रख सकते हैं और सबसे अच्छी बात यह है  कि हम अक्सर बेवजह मुस्कुरा देते हैं.... सीमा असीम  29,1,26

जीत या हार

Image
 कभी-कभी तुम सोचते होंगे या मुझे लगता है कि  तुम हमेशा यही सोचते होंगे  कि तुम जीत गए  तुमने सबको हरा दिया  पर सच तो यह है   कि तुम हारे ही नहीं बल्कि  पूरी तरह से हार गए और  हम जीत गए  तुम्हें नहीं पता  हाँ नहीं पता कि  जीत क्या होती है और  हार क्या  तुम जीत कर भी हारे हुए हो  हम हार कर भी जीत गए हैं... सीमा असीम  28,1,26

प्रेम

 प्रेम  प्रेम एक ऐसा शब्द है  जिसे सिर्फ अनुभूत किया जा सकता है  महसूस किया जा सकता है   उसका अहसास किया जा सकता है  उसे लिखा नहीं जा सकता हाँ प्रेम को लिखा नहीं जा सकता  है ना... सीमा असीम  27,1,26

पुकार

Image
 पुकारता है क्यों  क्यों पुकरता है  क्या नहीं जानता  क्या नहीं है पता  कि दिल को सब पता है  कि दिल सब समझता है  अहसासों के वन में  यूँ अकेला पड़ा है  कि पुकारता है क्यों... सीमा असीम  26,1,26

चक्की

Image
 चक्की चलाती महिला  जब इस तस्वीर को देखा तो मन में एक ख्याल आया,  पुराने जमाने के लोगों तक मुझे इस तस्वीर ने पहुंचाया   जहां होते होंगे गांव चक्की खेत खलियान और भरे पूरे मिटटी के घर  हालांकि अभी भी होते होंगे  पर नहीं दिखते कहीं ऐसे  कच्चे घर चक्की चूल्हा   जिसे देखते ही मन खुशी से भर जाए   मानों मन को सकुं का अहसास करा जाए   कितनी मेहनत करती पहले की औरतें  कितना काम करती घर की औरतें  जब वे सुबह सवेरे घर को साफ सुथरा करके लीप पोत कर  अपनी चक्की लेकर बैठ जाती   उसमें अनाज डाल कर पीसती   साथ ही और भी बहुत कुछ पीस लेती होंगी  आसपास कुछ और औरतें भी साथ में आकर भी बैठ जाती होगी  बोलते बतियाते हँसते मुस्कुराते कब उनका काम खत्म हो जाता होगा  पता ही नहीं चलता होगा संग साथ में किसी दुःख दर्द का भान भी नहीं होता होगा   यह मेहनती महिलायें कितना मेहनत करती सुबह से लेकर रात तक  घर के एक-एक काम को बड़ी लगन के साथ  करीने के साथ  करती रहती  कभी गाने गाती...

मुलाक़ात

Image
 सोचती हूँ  जब कभी उनसे मुलाकात होगी  क्या मन की सब उनसे बात होगी  कह भी पाऊंगी कुछ या  सब भूल जाऊंगी  आंखों से आंसू बहेंगे या  या जुबां तक कोई बात आएगी... सीमा असीम सक्सेना  22,1,26

तुम्हें

Image
 तुम्हें किस कदर चाहा है  तुम्हें किस कदर माना है  अहसास तक नहीं तुमको  तुम्हें किस कदर पुकारा है!! सीमा असीम 

खुश देखना तुम्हें

Image
 जिसे हम प्रेम करते हैं  मोहब्बत करते हैं और  अपना प्यार लुटा देते हैं  उसे खुश देखना  दुनिया का सबसे खूबसूरत लम्हा होता है  लेकिन किसी गैर के साथ  नहीं   खुद के साथ!! सीमा असीम सक्सेना  20,1,26

तुम्हारा सच

Image
 तुम्हारा सच क्या है  तुम ही जानते हो  हम तो बस अंदाज लगाते रहते हैं  पर सच क्या है सच में हम नहीं जानते  हां बस दिल दुखता है थोड़ा  जब हम तुम्हें किसी और का होते देखते हैं  तब भी नहीं पता कि सच क्या है क्या नहीं  वह तो तुम ही जानते हो ना  सिर्फ तुम ही तो जानते हो कि  तुम्हारा सच है क्या आखिर... सीमा असीम  19,1,26
कि तुम याद आते हो  कि क्यों तुम याद आते हो  भर देते हो मन एक बेचैनी सी  कि किसी तरह से भी तुम दूर नहीं जाते हो  रहते मेरे मन के हरदम आसपास  बिना बुलाये क्यों चले आते हो  क्या तुम नहीं जानते मैं  याद नहीं करती हूँ तुम्हें पल भर को भी  पर तुम तुम क्षण भर को भी मेरे मन को  खाली होने का अहसास नहीं करते हो  मानों धुनी रमाये मेरे मन में बैठ जाते हो  कि हर जगह  हर किसी में मुझे तुम ही दिख जाते हो  तो बताओ न तुम  मुझे क्यों याद आते हो ? हाँ क्यों बेसबब याद आते हो ? सीमा असीम सक्सेना, बरेली  19,1,26