सार संक्षेप उपन्यास – “ और उसने found the way “ लेखिका – सीमा असीम , बरेली 9458606469 Seema4094@gmail.com उसके बराबर वाले बेड पर सोनिया और प्रियंका सोते थे लेकिन आज वह दोनों नहीं है , उनके खाली पड़े बेड उसका मुँह चिड़ा रहे थे । कल सुबह ही वे दोनों अपने घर के लिए निकल गए थे । उन दोनों के घर करीब ही है लेकिन मानसी , वह कैसे चली जाती , एक तो बुखार और दूसरे उसका घर भी काफी दूर है, उसे फ्लाइट से ही जाना पड़ता और फ्लाइट में जाने के लिए उसे टेस्टिंग और सारे चेकअप भी कराने पड़ते तभी उसे एयरपोर्ट पर अंदर जाने को मिलता । अगर कुछ निकल आया तो फिर तो गयी काम से, यही सोचकर वह यहीं पर रुक गई थी । क्यों आई मुझे याद माँ की माँ तुम क्यों याद आती है .... “माँ अक्सर बताती रहती कि तुम्हें तो इस दुनिया में आना था, इतनी दवाइयां खाने के बाद भी तुम आ गई वरना हमारी कोई उम्र थो डे ही ना थी बच्चे पैदा करने की । पता है , जब तुम पैदा हुई तब हमारी उम्र बहुत ज्यादा थी , मुझे तो लगता है कि तुम्हें तो सीधे स्वर्ग से भगवान ने ही भेजा है कि जाओ और अ...
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सीमा असीम, बरेली कालका शिमला की धरोहर टॉय ट्रेन और बाबा भलखु यात्रा वृतांत शिमला के वरिष्ठ साहित्यकार एस आर हरनोट जी द्वारा आयोजित बाबा भलखु स्मृति कालका शिमला की साहित्यिक यात्रा के लिए जाना था, इसमें करीब 35 साहित्यकारों को बुलाया गया था, अन्य साहित्यकारों के साथ इसमें मेरा भी नाम शामिल हो गया था यह जानकार जाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी थी ! उस दिन ही कंफर्म टिकट मिल गया तो खुशी दोगुनी हो गई! अब तो कोई अड़चन नहीं आयेगी, अब तो जाने को मिल ही जायेगा इस यात्रा से ज्यादा ख़ुशी इस बात की थी कि सब साहित्यकारों से मिलना होगा, उनके विचारों से अवगत होना खुद को और भी ज्यादा समृद्ध करता है, अपने जैसे लोगों के बीच होना, बोलना चालना खाना पीना सब साथ साथ ! दो दिन की यात्रा थी, 8 और 9 जुलाई को और दो दिन आने जाने में यानी कुल मिला कर चार दिन की यात्रा थी ! घर में भी सब लोग मान गए थे किसी ने मना नहीं किया! एक तो शिमला जाने की खुशी और दूसरे साहित्यिक यात्रा की खुशी थी, साथ ही हमारे टिकट भी कंफर्म थे! हमारे साथ में जाने वाली एक महिला जो बरेली शहर...