बंधन
तुम्हें हर पल याद करना
इतना मुश्किल नहीं है
जितना मुश्किल है
तुम्हें पल भर को भूल जाना
कि तुम खुद चले आते हो
कभी मेरे ख्यालों में
कभी मेरे ख्वाबों में
कभी मेरी बातों में
कहाँ भूलते होगे तुम भी
मुझे पल भर को
जब हर पल मैं तुम्हें याद करती हूँ
तुमसे बात करती हूँ
मन ही मन में
कि बध गए हो तुम मेरे मन के बंधन में
और मन के बंधन से कैसे मुक्ति मिलेगी
न जीते जी
न ही मरने के बाद
हां बांध लिया है मैंने तुम्हें
बन के बंधन में
जन्म जन्मांतर के लिए!!
सीमा असीम
25,1,22
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