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Showing posts from October, 2020
सनम हरजाई
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कैसी जमी है थोड़ी सी नमी है छल छल छलकती है बरसात आंखों से एक तेरी कमी है यह तेरी कमी है ज़ब यादों का बबंडर सीने में उठता है दिल फिर किसी हाल नहीं संभलता है तू हरदम साथ होने का अहसास देता है तो मन क्यों मेरा इतना मचलता है तू लग जाये आकर मेरे गले से हर शय से बस यह दिल दुआ करता है पोछ देना मेरे बह बह कर सूखे हूए आँसू लेकिन यह बता तू क्यों इतनी सजा देता है मेरे मर्ज़ को बढ़ाकर तू मुझे मार देता है सनम कहूं तुझे या हरजाई कह दूँ बनाता ही क्यों है ज़ब बार बार मिटा देता है... सीमा असीम 21, 10, 20
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कोरोना वायरस के कारण देश की अर्थ व्यवस्था लड़खड़ा गयी थी। लग रहा था कि अपना विकासशील देश लुढ़ककर अविकसित देश की गोद में जा बैठेगा। सरकार परेशान थीं। ज्यादातर राज्य की सरकारों ने फल/सब्जी/केमिस्ट और पंसारी की दुकानें खुलवा रखी थीं। लेकिन अर्थ व्यवस्था की डूबती नैया को इन तिनकों से उबारना अब मुश्किल लग रहा था। अचानक सरकार को जाने क्या सूझी! उसने नशेडिय़ों के सिर पर देश की अर्थ व्यवस्था का भार लादने की ठान ली। शराब प्रेमियों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अर्थ व्यवस्था को अपने कंघे पर मजबूती से धरा और आगा-पीछा देखे बिना ही दौड़ पड़े। लड़खड़ाकर यहाँ - वहाँ गिरे / पड़े, शौकीन और बेसुध लोग सच्ची मायने में बैसाखी साबित हुए।
अपना सा
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जब उससे बार-बार बात करने को जी चाहे जब वह बात करे तो हमें गुस्सा आ जाए जब बात ना करें तो मेरा दिल घबराए कैसे अनजान से रिश्ते में मन बंधा बंधा जाए दूर कोई चमकता सितारा आपके मन में समा जाये कभी मुस्कुराने को जी चाहे, कभी मिलने को अंजाना कोई, अपना सा लगने लग जाए सच में कुछ समझ में ना आए कभी समझ में ना आए.... सीमा असीम 15 10 20
जिंदगी
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जिंदगी आईने की जैसी होती है जब आप मुस्कुराते हो यह भी मुस्कुरा देती है जब आप रोते हो तो यह भी रो देती है जब कभी हो जाते हो आप उदास तो इसके चेहरे पर भी उदासी छाने लगती है इसलिए जिंदगी को खुद के अनुसार जियो अपने में खुश होकर जियो आप अगर खुद में खुश होकर जीते हो तो आपको कभी किसी से कोई उम्मीद ही नहीं होती दूसरों से उम्मीद करना मतलब जीवन में निराश हो जाना... सीमा असीम 12, 10, 20
खुशियाँ
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जब अपने हो साथ जब अपने साथ होते हैं तो हमें मिल जाती हैं अनगिनत खुशियाँ सुख और शांति छोटी छोटी प्यारी प्यारी अपनों की बातें हमें यादगार पलों से नवाज़ देती हैं जब कभी तेज हवाएँ चलती हैं तो मन घबरा जाता है लेकिन यही हवाएँ हमें मंजिल का पता देती हैं धीरे धीरे गुजर जाता है वक्त हम सोचते रह जाते हैं कभी इसमें व्यस्त कभी उसमें लगे हुए दुनिया की रस्में निभाते हुए भूल जाते हैं खुद को अपने सपने अपनी उम्मीदें सब कर देते हैं दरकिनार जीवन जी ही नहीं पाते और न अपने लिए कभी कुछ कर पाते हैं मन की खुशी क्या है कभी जान ही नहीं पाते कभी तुम सोचना अपने लिए भी अपनी खुशियों के लिए भी कि सच क्या है झूठ क्या है और क्या है जीवन को जीने का सच्चा अर्थ ॥ सीमा असीम 7, 10, 20
यात्रा
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इस कोरोनावायरस 6 महीने तक लगातार कोई घर में बंद रहेगा तो तो उसका दम तो करना ही है उस सांस लेने को मजबूर हो जाएगा आखिर क्या करें लिखना पढ़ना और दिमाग खफा है रहना कितना ज्यादा डिप्रेशन हो गया आखिर घर से बाहर निकलना बहुत जरूरी होता है ना एक लिखने वाले के लिए लेकिन घर से कोई जाने वाला नहीं था और और मुझे बाहर कहीं घूमने जाना था घर में किसी के पास समय नहीं नहीं और किसी का मन भी नहीं सब अपने लैपटॉप लेकर घर के काम ऑफिस के काम में लगे हुए आंखें मैंने एक युक्ति निकालेंगे देखा फेसबुक पर एक सज्जन जो मेरे जाने वाले थे पहले से और वरिष्ठ साहित्यकार भी उन्होंने फेसबुक पर डाला कि घूमने जाना है कोई साथ चलना चाहे तो चले मैं अंधा क्या चाहे दो आंखें बस उसने फौरन वहां पर कमेंट में लिख दिया मुझे चलना है मुझे ले जा सकते हो तो ले चलो उनका देख लो अगर तुम्हारे साथ जाने के लिए कोई और महिला तैयार है तो ठीक है चलो हम तीन लोग हो जाएंगे और साथ साथ घूम कर आ जाएंगे मुझे भी अच्छा लगा उनका यह जवाब और मैंने एक लड़की और तलाशी ली और हम तीन लोग मिलकर घर से जाने के लिए तैयार हो गए आप जाएं कहां क्योंकि घर से बाहर निकलना एक बहु...
ख्वाब
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कितने ख्वाब हम बुनते हैं सोते जागते उठते बैठते बारीक बारीक सुंदर सजीले ख्वाब कितनी उम्मीदें कितनी आशाएं कितनी आकांक्षाएं हम पाल लेते हैं मन ही मन में सोचते रहते हैं उन ख्वाबों के बारे में ख्यालों के बारे में आशाओं के बारे मेंऔर पूरे करने के लिए हर तरह से प्रयास करते हैं किसी भी बात की परवाह किए बिना हम हर ख्वाब को पूरा करना चाहते हैं लेकिन कहां होते हैं कोई ख्वाब पूरा कोई खयाल पूरा कोई आस पूरी कोई आकांक्षा पूरी लेकिन होती है पूरी कभी-कभी जब हम उसको सच्चे मन से करते हैं पवित्र आत्मा से करते हैं अपने पूरे दिल से करते हैं तो पूरे हो जाते हैं हर ख्वाब हर ख्याल और हर आशा पूरी सीमा असीम 6, 10, 20
तुम्हें याद करती हूँ
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हर पल हर क्षण में बस तुम्हें मैं याद करती हूँ मन ही मन पुकारती रहती हूं तुम्हारा नाम मैं गुजर इसी तरह मैं सुबह से शाम करती हूँ मुस्कुराती हूँ कभी मैं नाम लेकर तुम्हारा कभी मैं चुपचाप खामोश रहती हूं भूल जाती हूँ मैं दुनिया की सारी रस्में इतना मैं खुद में ही खो जाया करती हूँ कभी बेचैन होती हूं मैं इतनी ज्यादा कि रातों को नींद भी नहीं आती और कभी-कभी मैं तुम्हें ख्वाबों में लाने को बहुत जल्दी और बार बार सो जाया करती हूँ तुम भी शायद ऐसे ही परेशान तो होते होंगे या सब कुछ भुला कर अपनी दुनिया में खोए रहते होगे खुश रहते होगे या रोते होगे इस सोच सोचकर अक्सर मैं उदास रहती हूँ हां मैं तुम्हें याद करती हूँ बार-बार करती हूँ हर बार करती हूं सुबह से शाम करती हूं और अपना दिन तुम में ही खोए रहकर गुजार देती हूं एक एक बात में एक एक चीज में बस सिर्फ तुम और तुम ही तुम...... सीमा असीम 5, 10, 20
मुस्कुराना
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कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20