यह चाहत की कैसी सजा पाई है हमने
कि दिल हर नस बहुत दुखती है
   सुनो प्रिय
              कहना चाह कर भी कह नहीं पाती हूँ मन की  हर बात मन में ही रखे रह जाती हूँ कितना दर्द और कितनी तकलीफ से भर जाती हूँ ,,,क्या तुम जानते हो इस तकलीफ को, समझते हो न कि मन के अहसासों और भावनाओं का क़त्ल कर देना कितनी तकलीफ देता है, मुझे लगता है कि तुम जान बुझ कर समझना नहीं चाहते या फिर मुझे दुःख देकर तुम्हें ख़ुशी मिलती है तभी तो तुम अनजान बनने की कोशिश करते हो लेकिन अनजान नहीं रह पाते हो , वो कौन सी तकनीक है जो तुम मेरी पीड़ा को बिना कहे सुने ही समझ जाते हो और फिर आ जाते हो सामने ,हाँ खड़े हो जाते हो आकर सामने और फिर उन तकलीफों को सहते हुए दर्द से आँखों में बहते आंसुओं को पोंछ देते हो और इतने प्यार से सहला देते हो कि सरे दुःख दर्द पल भर में छूमंतर हो जाते हैं न जाने कहाँ हवा हो जाते है रह जाती हैं तो सिर्फ  खुशियाँ, मुस्कुराते  हुए लव और चमकती हुई आँखें \~
       सच में प्रेम में ऐसा ही होता है अगर प्रेम सच्चा हो तो क्योंकि यह का रिश्ता हो जाना iजिससे हम प्रेम करते हैं तो हम उसे ही जी रहे होते हैं न खुद को नहीं ,,रूह से रुह का रिश्ता हो जाना इतना सरल कहाँ है और इतना मुश्किल भी नहीं है बस थोड़ा सा ख्याल और थोड़ी सी परवाह प्रेम को कभी न तो कमजोर होने देती है न ही कभी मरने देती है ये दर्द का रिश्ता है जितना दर्द होता है उतना ही रिश्ता मजबूत होता जाता है लेकिन प्रिय यह दर्द कभी कभी इतना असहनीय हो जाता है कि संभाले नहीं सम्भलता उस वक्त ही जीवन व्यर्थ महसूस होता है और मर जाने का मन करता है काश यह जीना और मरना हमारे ही हाथ में होता तो कभी मर मर कर न जीना पड़ता और कभी इस तरह से जहर न पीना पड़ता ,,,न ही घुट घुट कर जीना पड़ता ,,,,
तुम्हारी हर बात पर मेरा मन निसार होता है
तुम जैसे भी हो मुझे स्वीकार हो सदा ,,,,,,
सीमा असीम
२,९,19

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद