न दर्द ठहरता है न आँसू रुकते हैं मेरे
ये कैसा दुःख आया है कि जाता ही नहीं !!
कभी कभी ये समझ नहीं आता है कि आखिर तुम्हें किस बात की कमी थी ? कौन सी वो अधूरी चाह थी जो तुम संभल नहीं पाए ! तुम्हें तो कभी कोई कमी नहीं रही, जिसकी तुमने ख्वाहिश की थी, सब दिया मैंने फिर ऐसा क्यों किया ? क्यों मुझे बर्बाद किया और किसलिए मुझे आग के दरिया में पिघलने को धकेल दिया ? सनम तेरा दिल भी रोता होगा जितना मेरा रोता है ,तेरे भी आंसूं बहते होंगे, जैसे मेरे नहीं रुकते हैं ,काश तूमने कोई वादा न किया होता , काश तुमने सच्ची वफ़ा की कसमें न खाई होती ,काश कि तेरी नियत में खोट नहीं होता !
खैर क्या हो सकता है तुम्हे अपनी कही बातों का ख्याल आता होगा तो अपनी नजरों में गिर जाता होगा, तुम्हे भी लगता होगा क्या कहा था और क्या किया ,,,,,पता नहीं लगता भी होगा या नहीं हर तरह से मुझे बर्बाद करने वाले खुदा के बन्दे सच बता तुम्हे नींद तो आ जाती है, तुम्हे कभी सकूँ तो आता है, तुम्हे अपनी गलतियों का अफ़सोस तो होता है न। ....
क्योंकि मैंने तो तुम्हे प्रेम ही नहीं किया बल्कि समर्पित किया है खुद को, तन, मन और धन सहित , बस आज इतना बता तूमने क्या किया है मेरे लिए या मेरे साथ ,,,,,,,,,दिल को करार आये, मेरे जिगर का दर्द रुक जाये, जरा पल भर चैन आये, कि जीते जी मार दिया है मुझे ,,,,,अब मैं मर चुकी हूँ या जैसे बेजान हो गयी हूँ मैं।
मैंने कभी कोई शिकवा नहीं किया, कोई नाज नखरे तुम्हे नहीं दिखाए और मैं तेरी ख़ुशी में ख़ुशी ढूंढती रही पर मुझे सच बताओ ? क्या तुम खुश हो ? मैंने कभी कोई गलती नहीं की, फिर सजा सिर्फ मुझे क्यों दी ,बोलो , सिर्फ सच बोलो , .....
कभी तो ख़ुशी आये कभी तो लब मुस्कुराएं
आओ ओ मेरे सनम तुम तो मेरे ही हो न। ....,,,,,
सीमा असीम
१२,९ ,१९
ये कैसा दुःख आया है कि जाता ही नहीं !!
कभी कभी ये समझ नहीं आता है कि आखिर तुम्हें किस बात की कमी थी ? कौन सी वो अधूरी चाह थी जो तुम संभल नहीं पाए ! तुम्हें तो कभी कोई कमी नहीं रही, जिसकी तुमने ख्वाहिश की थी, सब दिया मैंने फिर ऐसा क्यों किया ? क्यों मुझे बर्बाद किया और किसलिए मुझे आग के दरिया में पिघलने को धकेल दिया ? सनम तेरा दिल भी रोता होगा जितना मेरा रोता है ,तेरे भी आंसूं बहते होंगे, जैसे मेरे नहीं रुकते हैं ,काश तूमने कोई वादा न किया होता , काश तुमने सच्ची वफ़ा की कसमें न खाई होती ,काश कि तेरी नियत में खोट नहीं होता !
खैर क्या हो सकता है तुम्हे अपनी कही बातों का ख्याल आता होगा तो अपनी नजरों में गिर जाता होगा, तुम्हे भी लगता होगा क्या कहा था और क्या किया ,,,,,पता नहीं लगता भी होगा या नहीं हर तरह से मुझे बर्बाद करने वाले खुदा के बन्दे सच बता तुम्हे नींद तो आ जाती है, तुम्हे कभी सकूँ तो आता है, तुम्हे अपनी गलतियों का अफ़सोस तो होता है न। ....
क्योंकि मैंने तो तुम्हे प्रेम ही नहीं किया बल्कि समर्पित किया है खुद को, तन, मन और धन सहित , बस आज इतना बता तूमने क्या किया है मेरे लिए या मेरे साथ ,,,,,,,,,दिल को करार आये, मेरे जिगर का दर्द रुक जाये, जरा पल भर चैन आये, कि जीते जी मार दिया है मुझे ,,,,,अब मैं मर चुकी हूँ या जैसे बेजान हो गयी हूँ मैं।
मैंने कभी कोई शिकवा नहीं किया, कोई नाज नखरे तुम्हे नहीं दिखाए और मैं तेरी ख़ुशी में ख़ुशी ढूंढती रही पर मुझे सच बताओ ? क्या तुम खुश हो ? मैंने कभी कोई गलती नहीं की, फिर सजा सिर्फ मुझे क्यों दी ,बोलो , सिर्फ सच बोलो , .....
कभी तो ख़ुशी आये कभी तो लब मुस्कुराएं
आओ ओ मेरे सनम तुम तो मेरे ही हो न। ....,,,,,
सीमा असीम
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