डुबाया है इस कदर मुझे सनम आपकी मोहब्बत ने
उबरने का सोचती भी हूँ तो कुछ और डूब जाती हूँ !
रग रग में जो बहता है वो तो लहू है मेरे सनम
आँख से बहने वाले इस दर्द को मैं क्या नाम दूँ !!
सुनो प्रिय
आज इतने दिनों के बाद एक एक शब्द जोड़ कर तुम्हें लिखने का दिल किया है ॥....न जाने क्यों लगता है जैसे कि तुम सिर्फ मेरे हो ,,,,,,दिल से आवाज आती है कि तुम मुझे उतना ही प्रेम करते हो जितना मैं करती हूँ लेकिन यह फांस की तरह से क्या दिल में चुभता रहता है प्रिय यकीन जानों यह बहुत दर्द करता है बहुत तकलीफ देता है ,,,,मेरे प्रिय क्या इस तकलीफ को तुम भी महसूस करते हो ?मैं इस दर्द से निजात तो नहीं पाना चाहती हूँ परंतु इस दर्द के साथ जीना तो मरने से भी बदतर है, समझ ही नहीं आता है कभी कभी कि क्या मैं जीवित भी हूँ या नहीं ? मरने के समान जीते हुए भी मैं तुम्हें खुश देखकार पल भर को जी उठती हूँ और फिर उसी अवस्था में आ जाती हूँ ..............सारी रात उस चमकती हुई हरी बत्ती को देखते हुए गुजारती हूँ और दिन तुम्हारा मनन करते हुए ......प्रिय क्या प्रेम में ऐसा ही होता है ? क्या प्रेम इतना दर्द देता है ?
शायद प्रेम दर्द नहीं देता बल्कि छल और बेवफाई दर्द देते हैं .........प्रेम तो जीवन में खुशबू बिखेरता है ....मन के उपवन में हमेशा फूल खिले रहते हैं .......हाँ यही सच है और ऐसा ही होता है ॥...
कुछ ऐसा हो कि आपके प्यार में हम सबरने लगे, निखरने लगे, लौट आए चेहरे पर वही मासूम मुस्कान कि अश्क भी अब खिलखिलाना चाहते हैं.........
कितना प्यारा है आपका अंदाज
कितने प्यारे आप हो
नजर हटती नहीं है
दिल बहलता नहीं है
आपके लिए ही है मेरा सजना सवरना
आपके बिना जीना निस्सार है !!
सीमा असीम
उबरने का सोचती भी हूँ तो कुछ और डूब जाती हूँ !
रग रग में जो बहता है वो तो लहू है मेरे सनम
आँख से बहने वाले इस दर्द को मैं क्या नाम दूँ !!
सुनो प्रिय
आज इतने दिनों के बाद एक एक शब्द जोड़ कर तुम्हें लिखने का दिल किया है ॥....न जाने क्यों लगता है जैसे कि तुम सिर्फ मेरे हो ,,,,,,दिल से आवाज आती है कि तुम मुझे उतना ही प्रेम करते हो जितना मैं करती हूँ लेकिन यह फांस की तरह से क्या दिल में चुभता रहता है प्रिय यकीन जानों यह बहुत दर्द करता है बहुत तकलीफ देता है ,,,,मेरे प्रिय क्या इस तकलीफ को तुम भी महसूस करते हो ?मैं इस दर्द से निजात तो नहीं पाना चाहती हूँ परंतु इस दर्द के साथ जीना तो मरने से भी बदतर है, समझ ही नहीं आता है कभी कभी कि क्या मैं जीवित भी हूँ या नहीं ? मरने के समान जीते हुए भी मैं तुम्हें खुश देखकार पल भर को जी उठती हूँ और फिर उसी अवस्था में आ जाती हूँ ..............सारी रात उस चमकती हुई हरी बत्ती को देखते हुए गुजारती हूँ और दिन तुम्हारा मनन करते हुए ......प्रिय क्या प्रेम में ऐसा ही होता है ? क्या प्रेम इतना दर्द देता है ?
शायद प्रेम दर्द नहीं देता बल्कि छल और बेवफाई दर्द देते हैं .........प्रेम तो जीवन में खुशबू बिखेरता है ....मन के उपवन में हमेशा फूल खिले रहते हैं .......हाँ यही सच है और ऐसा ही होता है ॥...
कुछ ऐसा हो कि आपके प्यार में हम सबरने लगे, निखरने लगे, लौट आए चेहरे पर वही मासूम मुस्कान कि अश्क भी अब खिलखिलाना चाहते हैं.........
कितना प्यारा है आपका अंदाज
कितने प्यारे आप हो
नजर हटती नहीं है
दिल बहलता नहीं है
आपके लिए ही है मेरा सजना सवरना
आपके बिना जीना निस्सार है !!
सीमा असीम
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