हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ........
सुनो प्रिय,
मैं सिर्फ इतना जानती हूँ कि मैं तुमसे प्रेम करती हूँ बस और कुछ भी नहीं ,,,,इसके सिवा कुछ और जानने समझने की चाहत भी नहीं है न ही कभी होगी ,,,मैं तुमसे कल भी उतना प्रेम करती थी और आज भी उतना ही ....मेरे लबों पर कल भी तुम्हारा नाम था ,,,, आज भी है और कल भी रहेगा ,,,आँखों में नमी और दिल में दुआएं भी वैसी ही हैं ,,मेरी बाहें आज भी उसी तरह से तुम्हें अपनी बाहों में भरने को उतावली रहती हैं और एक झलक पाने को आँखें हरदम इंतजार करती हैं ,,,मैं सिर्फ इतना ही जानती हूँ कि तुम मेरे प्रेमी हो और मैं तुम्हारी प्रेमिका ......कल भी कुछ और जानने की तमन्ना नहीं थी और न ही आज ॥न कभी होगी ही ,, बस इतना रहम तुम भी करना मुझे कुछ बताने समझाने की कोशिश मत करना क्योंकि मैंने अपने सच्चे दिल से तुम्हें चाहा और तुम्हें पाया फिर कैसी किसी और बात की गुंजाइश बची ,,,,,तुम्हें पा लेना ही मेरे सच्चे प्रेम का सूचक है मेरी सच्चाई है ,,,.... मेरे दिल की गहराइयों में बसा है तुम्हारा प्रेम ,तुम्हारी चाहत ,,,तभी तो मैं महकती रहती हूँ प्रेम की खुशबू से ,,, दिल कभी बेचैन होता है तो तड़प उठती हूँ और तब मैं तुम्हें पुकारती हूँ मैं चाहती हूँ उस वक्त तुम्हारा साथ ,,दर्द इस कदर तकलीफ देता है कि जिस्म बेजान हो जाता सिर्फ जान निकलनी बाकी रह जाती है
,,,,, प्रिय मैं हमेशा तुम्हें निभाती रहूँगी अपने प्रेम को हरा भरा खिला खिला रहने दूँगी दुनियाँ की किसी भी परवाह से बेपरवाह होकर ,,,॥
दिल के खेल में प्रिय दिमाग का कोई काम नहीं है
प्यार किया इसमें कभी पल भर का आराम नहीं है
लूटा देंगे जान हम इसी तरह आपकी चाहत में सनम
नशा है ये सच्चे प्रेम का कोई हाथ का ये जाम नहीं है !!
सीमा असीम
सुनो प्रिय,
मैं सिर्फ इतना जानती हूँ कि मैं तुमसे प्रेम करती हूँ बस और कुछ भी नहीं ,,,,इसके सिवा कुछ और जानने समझने की चाहत भी नहीं है न ही कभी होगी ,,,मैं तुमसे कल भी उतना प्रेम करती थी और आज भी उतना ही ....मेरे लबों पर कल भी तुम्हारा नाम था ,,,, आज भी है और कल भी रहेगा ,,,आँखों में नमी और दिल में दुआएं भी वैसी ही हैं ,,मेरी बाहें आज भी उसी तरह से तुम्हें अपनी बाहों में भरने को उतावली रहती हैं और एक झलक पाने को आँखें हरदम इंतजार करती हैं ,,,मैं सिर्फ इतना ही जानती हूँ कि तुम मेरे प्रेमी हो और मैं तुम्हारी प्रेमिका ......कल भी कुछ और जानने की तमन्ना नहीं थी और न ही आज ॥न कभी होगी ही ,, बस इतना रहम तुम भी करना मुझे कुछ बताने समझाने की कोशिश मत करना क्योंकि मैंने अपने सच्चे दिल से तुम्हें चाहा और तुम्हें पाया फिर कैसी किसी और बात की गुंजाइश बची ,,,,,तुम्हें पा लेना ही मेरे सच्चे प्रेम का सूचक है मेरी सच्चाई है ,,,.... मेरे दिल की गहराइयों में बसा है तुम्हारा प्रेम ,तुम्हारी चाहत ,,,तभी तो मैं महकती रहती हूँ प्रेम की खुशबू से ,,, दिल कभी बेचैन होता है तो तड़प उठती हूँ और तब मैं तुम्हें पुकारती हूँ मैं चाहती हूँ उस वक्त तुम्हारा साथ ,,दर्द इस कदर तकलीफ देता है कि जिस्म बेजान हो जाता सिर्फ जान निकलनी बाकी रह जाती है
,,,,, प्रिय मैं हमेशा तुम्हें निभाती रहूँगी अपने प्रेम को हरा भरा खिला खिला रहने दूँगी दुनियाँ की किसी भी परवाह से बेपरवाह होकर ,,,॥
दिल के खेल में प्रिय दिमाग का कोई काम नहीं है
प्यार किया इसमें कभी पल भर का आराम नहीं है
लूटा देंगे जान हम इसी तरह आपकी चाहत में सनम
नशा है ये सच्चे प्रेम का कोई हाथ का ये जाम नहीं है !!
सीमा असीम

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