मैं इतनी ज़ोर से नाची आज 
कि घुंघरू टूट गए !!
 
बिछा दो राह में बस फूल ही फूल 
कि साजन घर आ गए हैं 
सुनो प्रिय, 
           कोई जरूरी तो नहीं है न कि तुम चाहों मुझे उतना ही कि जितना मैं तुम्हें चाहती हूँ .....जरूरी तो नहीं कि निभाओ तुम उतनी ही वफा कि जितनी मैं वफा निभाती हूँ ,,,,,,हाँ प्रिय बहुत काफी है मेरा चाहना ही तुम्हें क्योंकि प्रेम कभी मांगा नहीं जाता, कभी पाया नहीं जाता सिर्फ देने का नाम ही तो प्रेम है,, लूटा देना अपना सब कुछ अपने प्रिय के नाम पर बस यही प्रेम है ,,,,,प्रेम के लिए बर्बाद कर देना मिटा देना बिना किसी स्वार्थ के कि प्रेम है है यह कोई सौदेबाजी नहीं है कोई व्यापार नहीं है .....मेरे प्रिय तुम तो मानसिक रूप से हरदम मेरे साथ ही रहते हो क्योंकि मैं पल भर को भी तुमसे दूर जाती ही नहीं जोड़े रखती हूँ अपने मन का तुमहरे मन से बंधन ,,,,जग के समाज के बंधन वाले बंधन की मेरे प्रेम को दरकार ही नहीं है ..........कर का मनका छोड़ के अब मन का मनका फेरती रहती हूँ प्रिय आपके लिए अपनी जान नियोछावर किए रहती हूँ .....मेरे प्रेम की जीत तुम हो हार भी तुम ही हो जैसे आपकी मंशा आप जानो क्योंकि मेरा मुझमे कुछ बाकी बचा ही कब है ...जो कुछ है सो तोर .....आप ही आप हो अब हर तरफ कि नजर कुछ और आता नहीं है ...लाख खुशियाँ बिछी हो राहों में कि कोई और राह मन लुभाता नहीं है ........देखो प्रिय यह अजूबा ही है कि आपका नाम लेते ही कैसे खुशी बिखर गयी देखो आँखों की नमीं मुस्करा दी है फूल जैसे स्वयम बोल पड़े है खुशबू बिखर गयी है .....प्रिय प्रेम है मेरे सच्चे मन का ॥सच्ची आत्मा का ...बिना किसी छल कपट या भेदभाव के .......झूम उठा जहां  और थिरकने लगे मेरे पाँव भूल के लोक लाज ...बिसरा के हर बात ....गुजारिश तो रब से बस इतनी सी है कि खिलने दो इन फूलों को महकने दो इन फूलों को .....नजर न लगे मेरे प्रेम को कभी किसी बला की ...........
धरती पर न मेरे पाँव पड़े 
पिया सदा तू मेरे संग रहे 
मुझे पंख दिये है परवाने से 
मेरे अंग अंग में अरमान सजे !!!
सीमा असीम

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद