दुनिया में होने वाली हर बात से है वो बेखबर उसे नहीं पता कि आज है मजदूर दिवस जहां दुनिया में राष्ट्रीय अवकाश मनाया जा रहा है वहीं पर वह सुबह से लगी है घर के कामों में वह स्त्री है तो उसका काम है घर की देखभाल करना घर की साफ सफाई करना उसमें सुबह उठकर सबसे पहले घर में फूल झाड़ू से सारे घर की धूल झाड़ दी है और चमका दिया कोने-कोने को बड़े बुजुर्गों की झिडकियां भी सह लेती है और चुपचाप कोने में जाकर रो लेती है कि नहीं सिखाया उसे बड़ों को जवाब देना पलट कर कुछ कहना भी नहीं उसे बस इतना पता है कि वह हाउसवाइफ है तो उसे घर के सारे काम करने हैं साफ सफाई से लेकर खाना बनाने से लेकर हर किसी की देखभाल करनी है हर किसी को उसका उचित मान सम्मान देना है वो इस बात का भी शुक्र मानती है कि नहीं है कामकाजी वरना उसे काम से लौटकर देखना पड़ता घर गृहस्ती को चूल्हे चौके को और बाल बच्चों को भी बसअब लिपत है घर में ही खुश है और घर के काम करने में सुखी है क्योंकि ह...
पतझड़ तो चला गया है दुम दबाकर बसंत ने अपना साम्राज्य फैला दिया है दस्तक दे दी हैआहिस्ता से गर्मी ने सूरज की किरणों ने व्याकुल कर दिया पशु पक्षी के साथ साथ हम इंसान भी तपती धूप से बचने को छाया की ओट तलाशने लगे हैं मौसम की मार ने सदा गरीबों और निरीहों को ही अपना शिकार बना लिया !!! सीमा असीम ३०,4,२४
मुस्कुराते हुऐ हर ग़म को छुपा लेते हैं चाँद तारों को अपना दर्द बता देते हैं कर लेते हैं बात बड़ी ख़ामोशी से हम तुम्हें यूँ ख्वाबों ख़्यालों में सजा लेते हैं!! सीमा असीम 29,4,24
सुरमई शाम में तुम याद बनकर चले आते हो जब रात होती है तो ख्वाब में चले आते हो रोशन है मेरा तन मन तुम्हारे प्रेम की खातिर सुबह आती है तो किरण बनकर चले आते हो यूं ही सदा आते हो तुम जाते तो हो नहीं कभी फिर क्यों मैं तुम्हें कहती हूं तुम बिरहा दे जाते हो..
तुम चाहें किसी भी तरह से मुझे परेशान करो याद करके या फिर भुलाकर हर स्थिति में स्थिति में है मैं तो सिर्फ तुम्हारे ही मन में हूं और तुम्हारी बातों में भी हूं भले ही उन बातों को तुम कभी किसी से कह नहीं पाते हो सुन नहीं पाते हो खुद ही खुद मन ही मन दोहराते रहते हो, कहते रहते हो और सुनते भी रहते हो बस यही तो प्रेम है सीमा असीम