स्त्री

 दुनिया में होने वाली हर बात से है वो बेखबर 

उसे नहीं पता कि आज है मजदूर दिवस

 जहां दुनिया में राष्ट्रीय अवकाश मनाया जा रहा है

 वहीं पर वह सुबह से लगी है घर के कामों में 

वह स्त्री है तो उसका काम है घर की देखभाल करना 

घर की साफ सफाई करना 

उसमें सुबह उठकर सबसे पहले घर में फूल झाड़ू से सारे घर की धूल झाड़ दी है और चमका दिया कोने-कोने को 

बड़े बुजुर्गों की झिडकियां भी सह लेती है

 और चुपचाप कोने में जाकर रो लेती है 

कि नहीं सिखाया उसे बड़ों को जवाब देना 

पलट कर कुछ कहना भी नहीं 

उसे बस इतना पता है कि वह हाउसवाइफ है

 तो उसे घर के सारे काम करने हैं 

साफ सफाई से लेकर 

खाना बनाने से लेकर 

हर किसी की देखभाल करनी है

 हर किसी को उसका उचित मान सम्मान देना है 

वो इस बात का भी शुक्र मानती है

 कि नहीं है कामकाजी 

वरना उसे काम से लौटकर देखना पड़ता

 घर गृहस्ती को 

चूल्हे चौके को और

 बाल बच्चों को भी 

बसअब लिपत है घर में ही

 खुश है और घर के काम करने में सुखी है 

क्योंकि हाउसवाइफ है और घर का काम करना है उनकी नियति है 

उनके होने से ही तो बच्चों में है हंसी-खुशी और 

पुरुषों में है पौरुषता 

बड़े बुजुर्गो में अकखड़ता 

वे यूं ही खुशी खुशी चमकाती रहती है 

अपने घर को संभालती रहती है 

उस घर को जो उनका है नहीं 

कहाँ होता है महिलाओं का कोई घर 

फिर भी मगन है 

अपने हर काम को लगन के साथ करने के लिए 

श्रम करती हुई यह घर के स्त्री...

सीमा असीम 

1,5,24

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