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आँखों में

जब कभी याद करते हुए तुमको खो जाती हूँ मैं ख्वाबों में तो लगता है हूँ वहीँ पर जहाँ गुजरे थे मैंने संग संग दिन और रात हर वक्त साथ साथ कभी मेरा हाथ पकड कर मुझे सहारा दे देना और कभी मेरे सामान को खुद ही उठा लेना कितना ख्याल कितनी परवाह कितनी चाहत छलक उठती थी तुम्हारी आँखों में मानों दुनिया की सारी खुशियाँ मेरे क़दमों में डाल देना चाहते थे और खुद बिखर जाना चाहते थे मेरी राहों में कि छू न सके कोई तकलीफ मुझे कहीं मैं घबरा न जाऊं किसी भी तरह से सब नजर आता था तुम्हारी आँखों में सीमा असीम

तुम हो संग सदा

हर रूप में तुम्हें पा लेती हूँ मैं और तुम मुझे हर किसी में देख लेते होगे तभी तो मैं जानती हूँ कि तुम हो हर कहीं हर समय में मुझे अच्छा लगता है कि तुम्हें पल भर कोभी न बुला पाती हूँ तुम भी मुझे कभी भूल नहीं पाते हो आज जब मैं इस वक्त कुछ लिख रही हूँ तो मुझे लगता है तुम हो मेरे पास मेरे साथ मेरी उँगलियों के माध्यम से की बोर्ड को चलते हुए मेरे पास बैठे मुस्कुराते हुए यह मेरा वहम नहीं है यह सच है और हाँ बस यही एक सच है !!! सीमा असीम

नमी

यह जो मेरी आँखों में नमी भर आती है वो कोई पानी नहीं बल्कि तुम हो जो बार बार तुम पिघलते हो और यहाँ मेरी आँखों से छलकते हो सुनो क्यों तुम मुझे इतना याद करते हो मैं हूँ न तुम्हारे साथ साथ हरदम आसपास किसी परछाईं की तरह या कलाई में चलती हुई नब्ज की तरह पल भर को दूर नहीं हूँ तुम जानते तो हो न मुझे अब समझ भी गए होगे सच हूँ मैं एकदम सच हाँ मैं तुम्हारा सच हूँ और रहूंगी हमेशा जन्मों तक जैसे हो तुम मेरे ही जन्मों जन्मों तक .... सीमा असीम  कैसी बातें कर रही हो ईशा को ही मां-बाप अपने बच्चों का बुरा थोड़ी ना सोते हैं वह तो भला ही सोचेंगे हर हाल में वह तो उन्होंने जब अपने बच्चों को पैदा किया पहले पोशाक सहायक बनाया तो उनका तो हक बनता है ना कि अपने बच्चों के अच्छे बुरे को समझें और वैसा ही करें और शादी करने के लिए 25 साल कोई कम उम्र तो होती नहीं है तुमने वह कहावत थी इसलिए की 25 साल तक ब्रह्मचर्य उसके बाद ग्रस्त फिर 50 साल के बाद बनप्रस्थ और 75 साल के बाद सन्यास ले लेना चाहिए   अच्छा ऐसी बात है फिर तुमने 25 साल की उम्र तक ब्रह्मचर्य क्यों नहीं पालन किया इसने मुस्कुरा कर रतन...

रंग

रंग______ थोड़े से रंग मुट्ठी भर रंग नहीं रंग सकते पूरी दुनिया को पर रंग सकते हैं एक मन को एक तन को कि जरूरी है ना एक मुट्ठी रंग ताकि रंग सके हम अपना मन देखा है कभी किसी रंगे हुए मन को नजर आती है उसे रंगी हुई सारी दुनिया सारा जहां यूं ही तो रंगा था राधा ने भी अपने मन को मुट्ठी भर रंग प्रेम का रंग रंग लिया खुद को और हो गई प्रेम मय उस रंग को बिखेर दिया पूरी दुनिया में पूरे जहाँ में रंग प्रेम का और हो गया उनका जीवन सार्थक ।।।। सीमा असीम
जैसा कि आजकल के दौर में जलन सा हो गया है शादी की कुछ साल रहे और समझ नहीं आया तो सोचा कर चले गए प्रत्यारोप लगा लगा कर एक दूसरे को नीचा दिखा कर नीचे गिरा कर खुद को अच्छा समझ कर उठने की चाहत रखने वाले अनेक परिवार ऐसे हैं जहां पर इसी तरह का माहौल देखने को मिलता है नहीं सोचते परिवार के बारे में अपने बारे में मां बाप के बारे में बताओ वह बच्चों के बारे में या होने वाले बच्चे के बारे में भी मैं तो बस यह समझते हैं कि वह जो कर रहे हैं बस वही सही है और उसके अलावा सब गलत इसी बात को बाबा जी ने बहुत अच्छे से समझा कि परिवार को बिगड़ने में पल भर का पल भर लगता है और उसे संभालने में पूरी जिंदगी गुजर जाती है तू जहां पर भी देखा कि कोई परिवार बिखर रहा है टूट रहा है या पति पत्नी के बीच में कोई झगड़ा फसाद हो रहा है तो आगे बढ़कर बाबा जी ने सब कुछ सही करने की कोशिश की उनके परिवार को एक करने की कोशिश की और बहुत से ऐसे परिवार टूट गए थे जो रिश्ते तोड़ के खत्म हो रहे थे या अलग-अलग रास्तों पर जा रहे थे उनको एक रास्ते पर लाया आज भी परिवार सुखी और खुशहाल है क्योंकि बाबा जी कहां तुम पर है उनकी बीवी वह सीख उनकी दी हुई ...
दुनिया को देखकर ऐसा लगता है कि जिसके जीवन में जितने सुख और जितने दुख ईश्वर ने लिख दिया वह उससे किसी ना किसी रूप में मिलकर ही रहेंगे आप चार लाख कोशिश कर लो लाख प्रार्थना कर लो लाख दुआएं मांग लो मन्नतें कर लो कुछ भी कर लो लेकिन उस ईश्वर के आगे किसी की नहीं चलती जैसा हो जाता है वैसा ही होता है वही एक है ना हुई है सोई जो राम रचि राखा को कर्क तरक बढ़ावे साखा आप कितनी भी कोशिश करोगे इतनी भी अरगुमेंट्स करोगे बहस करोगे कुछ नहीं होगा होगा वही सोच रखा है तुम्हारे लिए हमारे लिए और सभी के लिए यही चीज सबके जीवन में लागू होती है बाबा जी भी तो कितने अच्छे इंसान किसी का भी दिल नहीं दुखाया होगा लेकिन हमें प्रारब्ध का फल भोगना ही होता है कोई ना कोई ऐसा करो जो हमें किसी भी जाकर यहां पर किसी न किसी देश में मिल जाता है हमारे सामने आ जाता है और हमें वह दुख बुकस्टॉल को तकलीफ मिलती है जिसे हम ख्वाहिश रखते हैं कि हमें उससे सुख मिलेगा हमारे सारे दुख दूर हो जाएंगे जो भी हुआ अच्छा ही हुआ पापा जी की एक उम्मीद थी जिस उम्मीद के लिए उन्होंने शादी की थी वह मिथुन की पूरी हुई और उनके यहां एक बा बाबा पैदा हुआ उससे पहले ए...