रंग

रंग______ थोड़े से रंग मुट्ठी भर रंग नहीं रंग सकते पूरी दुनिया को पर रंग सकते हैं एक मन को एक तन को कि जरूरी है ना एक मुट्ठी रंग ताकि रंग सके हम अपना मन देखा है कभी किसी रंगे हुए मन को नजर आती है उसे रंगी हुई सारी दुनिया सारा जहां यूं ही तो रंगा था राधा ने भी अपने मन को मुट्ठी भर रंग प्रेम का रंग रंग लिया खुद को और हो गई प्रेम मय उस रंग को बिखेर दिया पूरी दुनिया में पूरे जहाँ में रंग प्रेम का और हो गया उनका जीवन सार्थक ।।।। सीमा असीम

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