तुम हो संग सदा

हर रूप में तुम्हें पा लेती हूँ मैं और तुम मुझे हर किसी में देख लेते होगे तभी तो मैं जानती हूँ कि तुम हो हर कहीं हर समय में मुझे अच्छा लगता है कि तुम्हें पल भर कोभी न बुला पाती हूँ तुम भी मुझे कभी भूल नहीं पाते हो आज जब मैं इस वक्त कुछ लिख रही हूँ तो मुझे लगता है तुम हो मेरे पास मेरे साथ मेरी उँगलियों के माध्यम से की बोर्ड को चलते हुए मेरे पास बैठे मुस्कुराते हुए यह मेरा वहम नहीं है यह सच है और हाँ बस यही एक सच है !!! सीमा असीम

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