आँखों में

जब कभी याद करते हुए तुमको खो जाती हूँ मैं ख्वाबों में तो लगता है हूँ वहीँ पर जहाँ गुजरे थे मैंने संग संग दिन और रात हर वक्त साथ साथ कभी मेरा हाथ पकड कर मुझे सहारा दे देना और कभी मेरे सामान को खुद ही उठा लेना कितना ख्याल कितनी परवाह कितनी चाहत छलक उठती थी तुम्हारी आँखों में मानों दुनिया की सारी खुशियाँ मेरे क़दमों में डाल देना चाहते थे और खुद बिखर जाना चाहते थे मेरी राहों में कि छू न सके कोई तकलीफ मुझे कहीं मैं घबरा न जाऊं किसी भी तरह से सब नजर आता था तुम्हारी आँखों में सीमा असीम

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