दुनिया को देखकर ऐसा लगता है कि जिसके जीवन में जितने सुख और जितने दुख ईश्वर ने लिख दिया वह उससे किसी ना किसी रूप में मिलकर ही रहेंगे आप चार लाख कोशिश कर लो लाख प्रार्थना कर लो लाख दुआएं मांग लो मन्नतें कर लो कुछ भी कर लो लेकिन उस ईश्वर के आगे किसी की नहीं चलती जैसा हो जाता है वैसा ही होता है वही एक है ना हुई है सोई जो राम रचि राखा को कर्क तरक बढ़ावे साखा आप कितनी भी कोशिश करोगे इतनी भी अरगुमेंट्स करोगे बहस करोगे कुछ नहीं होगा होगा वही सोच रखा है तुम्हारे लिए हमारे लिए और सभी के लिए यही चीज सबके जीवन में लागू होती है बाबा जी भी तो कितने अच्छे इंसान किसी का भी दिल नहीं दुखाया होगा लेकिन हमें प्रारब्ध का फल भोगना ही होता है कोई ना कोई ऐसा करो जो हमें किसी भी जाकर यहां पर किसी न किसी देश में मिल जाता है हमारे सामने आ जाता है और हमें वह दुख बुकस्टॉल को तकलीफ मिलती है जिसे हम ख्वाहिश रखते हैं कि हमें उससे सुख मिलेगा हमारे सारे दुख दूर हो जाएंगे जो भी हुआ अच्छा ही हुआ पापा जी की एक उम्मीद थी जिस उम्मीद के लिए उन्होंने शादी की थी वह मिथुन की पूरी हुई और उनके यहां एक बा बाबा पैदा हुआ उससे पहले एक लड़की पैदा हुई थी लड़की बड़ी थी वह लड़का पर छोटा लड़की का पैदा हुई थी बात करते उनका खून इस संसार में आ गया है लेकिन जब लड़का पैदा हुआ तो बाबा जी के खुशी के गाने कोई ठिकाना ही नहीं थे बाबा जी बताते हैं मैं तो उसके चेहरे को देखकर एकदम से जी उठा था मुझे लगा था कि मेरा बचपन दोबारा लौट आया आप इतने ही मैं अपनी सारी खुशियां और सारी तो ढूंढ लूंगा इसको अपनी पलकों की छांव तले रखूंगा कि दुनिया की कोई नजर से ना सता है कि तू किसको ना आए कोई आंच ना आए किसी भी तरह की तू तू तू पास पटक ही ना पाए शिवाय सुख ओके बाबा जी ने उसकी खुशी में न जाने कितने पुण्य कर्म कर डाले न जाने कितने हरदा से ना जाने कितनी संगति बुला लेगी और ना जाने कितने रंगारकारा डाले पापा जी को लगाओ लगा कि अब तूने कोई तकलीफ नहीं होगी अ टोफू दुखों को लेकर आ जाती है मन में परेशानियों को पैदा कर देती है तकलीफ से गिरकर हम न जाने किस अंधेरे कुएं में गिर जाते हैं लगता है कि सारे दुख हमें क्यों मिल गए अक्सर ऐसा ही होता है लेकिन ऐसा नहीं है एक तो सब ईश्वर की माया है कहीं धूप तो कहीं छाया है अरे दुख इसलिए हो गए थे क्योंकि उनकी पत्नी बाबा को लेकर चली गई थी लड़का और लड़की दोनों बच्चों को लेकर उनके घर से मायके में चली गई बाबा जी बहुत फिर से परेशान हो गए थे और परेशानियां का साथ इनके जीवन में कभी नहीं छोड़ा कुछ दिनों के लिए वह आ जाती पत्नी बच्चों को लेकर अगर तो एक खुशी के मारे फुले नहीं समाते बाबा जी का चेहरा एकदम गुलाब कीमत नींद खिल जाता ना जाने वह किस बात पर झगड़ा कर लेती या खुद पर कुंठित हो जाती और बच्चों को लेकर चली जाती तो बाबा का मुरझा जाते उदास हो जाते और निराश हो जाते क्या यही जीवन है क्या यही जीवन भर चलेगा इसी तरह से अब जीवन कटेगाब तूने कोई दुखी नहीं सताएगा उनके वंश का चिराग जो पैदा हो गया है उनके जीवन में रोशनी बिखेरने के लिए इस सूरज की किरण किरण आ गई है उनके घर आंगन में उनके पूर्वजों के पुण्य कर्मों को उजागर करने के लिए और सच भी यही था पर खुशियां सर बहुत जल्दी लग जाती है नजर

Comments

Popular posts from this blog

मुस्कुराना

याद