पक्षी सभी पक्षियों को देखो ध्यान से उड़ते हुए जाते हैं आती है आते हैं आसमान की ऊंचाई तक करते हुए उड़ते हुए भाषा आते हैं पहुंचा आते हैं संदेश से बादलों त आप बर्गर कुर्ते चले आते हैं बरस बरस जाते हैंब जाकर पक्षी ही तो होती है जो ईश्वर के भेजे हुए दूध होते हैंतुम्हारे सिवा नजर नहीं आता कोई जो कुछ हो सिर्फ तुम हो रोम रोम का अर्थ है मेरा सिर्फ तुम्हारा जुबां पर रहता है हरदम एक ही नाम तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा मेरा फैसला मेरा कंगना मेरा रोना मेरा मुस्कुराना सब कुछ तो तुम जानती हो सब समझते हो फिर क्यों क्यों किसलिए बस्सी क्यों की तलाश में मैं भटक रही हूं तड़प रही हूं मचल रही कब से ना जाने कब से और ना जाने कब तक जब मिलेगा मुझे इस सवाल का जवाब तब शायद मन को सुकून आएगा चैन आएगा घबराहट दूर चली जाएगी खत्म हो जाएगी क्योंकि तलाश पूरी हो जाएगी
बाबा जितेंद्र पाल सिंह सोनी जी का जन्मबंदा बहादुर साहिब गुरुद्वारा रियासी जम्मू कश्मीर जम्मू में हुआ था 1944 में 2 अक्टूबर 1944 को जम्मू शहर में हुआ था उनको जब जन्म हुआ था उससे पहले रिया से देरी पर थे वहां से उनकी मां को लेकर जा रहे थे उनके पापा लव पर बैठकर नदी के रास्ते जा रहे थे साथ में उनके नाना-नानी चाचा चाची और भी कई लोग थे तब उनके पापा के मन में एक गलत खयाल आया अगर यह ना लग जाए तो फिर जितने भी लोग बैठे हैं इनका सारा धन दौलत पैसा मुझे मिल जाएगा इस चक्कर में उन्होंने ना को रखवा दियाप्रेम
जहाँ प्रेम है वहाँ सुख है ख़ुशी है जहाँ सुख है ख़ुशी है वहाँ है प्रेम प्रेम क्षणभंगूर नहीं अनंत काल की यात्रा है एक जीवन में कहाँ पूरा होता है प्रेम न जाने कैसे कर लेते हैं लोग छोटे से जीवन में किसी से घृणा प्रेम नफ़रत और जरा देर में बदल लेते हैं अपनी भावनाओं को वो कब समझेंगे क्या होता है प्रेम न कहने से न सुनने से अहसासों की भाषा है यह आत्मा से आत्मा का मिलना है प्रेम फूल इंद्रधनुष बारिश ओस देख मुस्कुरा देता है मन भोला भोला मासूमियत से भरा होता है प्रेम प्रेम करते हैं सभी जीवन में एक बार जरूर जो निभा ले सच्चे मन से वहां ईश्वर बन जाता है प्रेम!! सीमा असीम
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