एक नाविक था उसके पास एक नाव थी नाविक अपनी नाव से बहुत प्रेम करता था वह जहां जाता उसको अपने साथ लेकर चलता था वह नाव में ही रहता और नाव पर ही अपना खाना खाता और उसी के साथ घूमता फिरता सवारियों को लेकर इधर से उधर नदी पार कर आता इसी तरह बहुत साल गुजरते रहे दोनों भी बहुत अच्छी थी कभी भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया उसको कभी किसी तरह के उसके यात्रियों को कोई तकलीफ नहीं होने दी बस मजे में नाम के साथ खुश थी उसका नाम खुशी बहुत प्रेम करता है इन दोनों का प्यार ऐसे ही बना रहे 1 दिन क्या हुआ नाविक नाव को लेकर जा रहा था तभी उसको मन में आया यह इतनी पुराने नाम हो गई है इस को यहीं छोड़ देते हैं और वह पता नहीं क्या सोच कर नाव को विस्तार में छोड़कर खुद करते हुए किनारे से आ लगा नाव को तैरना तो आता नहीं था वह तो नाविक के इशारे पर ही चलती थी ना ना ना विक्की सर बहा ले जाता वह उधर बहती चली जाती जिधर कहता उधर सर्दी चली जाती थी किसी तरह से चलता रहा था लेकिन अब जब नाभिक दे उसको छोड़ दिया बीच मझधार में उसे समझ नहीं आ रहा था वह क्या करें कहां जाए कैसे जाए आखिर उसने इधर-उधर से इतना धूप तो सकती नहीं थी क्योंकि उसमें कोई चैट नहीं था ऐसे ही करती रही इधर उधर बरसती रहे एक बार नाविक नई ना उसे उसी नदी में घूमने के लिए निकला अचानक से उसकी नाव में छेद हो गया और पानी भरने लगा सारे यात्री रो रो कर चुप चुप के चिल्लाने लगे बचाओ बचाओ अबू नवज्योति वह उधर ही आसपास घूम रही थी बिना नाविक के बिना पतवार के ऐसे ही पालन नदी में तो उसने हो पास में गई और सारे यात्री उसमें चल गया था उसमें उतना खोखे के किनारे से लगा दिया सभी यात्रियों की जान बच गई नाविक से बहुत खुश हुआ और वह एहसान मानने लगा कर सच में जो सही है वह हमेशा सही ही रहता है और नाभिक को आज अपने किए पर बहुत पछतावा हो रहा था वह बहुत दुखी था कि मैंने ऐसा क्यों किया मैंने ना को बीच मझधार में क्यों छोड़ दिया अकेले डूबने उतर आने के लिए पर अब क्या हो सकता था वह तो कर ही चुका था और ना नाविक ने अपने कर्म किए और ना होने अपने कर्म की जो जैसा करता है वैसा भरता तो है ही लेकिन नाम तो अपने अच्छे कर्म कर रही थी और नाविक बुरे कर्मों की तरफ अग्रसर हो गया था
जरूरी तो नहीं कि इंतजार हर बार सुखद ही होता हो लेकिन इंतजार अक्सर सुख ही देता है अगर आप इंतजार करते हुए थकते नहीं, परेशान नहीं होते और कभी बोर नहीं होते क्योंकि हर चीज की एक हद होती है नियत समय होता है जैसे फल हमेशा अपने समय पर ही आता है, माली पौधों को सीचता है, गुडाई रोपाई करता रहता है इस इंतजार में कि समय आने पर उस पर फल लगेगी आखिर उसमें पहले फूल आता है फिर बाद में फल भी आ जाता है माली का इंतजार पूरा हो जाता है जब वह फलों को तोड़ता है। ऐसे ही हर इंतजार कष्ट कर तो होता है थोड़ा लंबा तो होता है लेकिन फल हमेशा सुखदाई ही होता है इसलिए इंतजार करना बुरा नहीं, दुःख दर्द कष्ट या तकलीफ़ को सुख खुशी या आराम में बदलने के लिये।।।
असीम q
मुस्कुराना
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
Comments
Post a Comment