जैसा कि आजकल के दौर में जलन सा हो गया है शादी की कुछ साल रहे और समझ नहीं आया तो सोचा कर चले गए प्रत्यारोप लगा लगा कर एक दूसरे को नीचा दिखा कर नीचे गिरा कर खुद को अच्छा समझ कर उठने की चाहत रखने वाले अनेक परिवार ऐसे हैं जहां पर इसी तरह का माहौल देखने को मिलता है नहीं सोचते परिवार के बारे में अपने बारे में मां बाप के बारे में बताओ वह बच्चों के बारे में या होने वाले बच्चे के बारे में भी मैं तो बस यह समझते हैं कि वह जो कर रहे हैं बस वही सही है और उसके अलावा सब गलत इसी बात को बाबा जी ने बहुत अच्छे से समझा कि परिवार को बिगड़ने में पल भर का पल भर लगता है और उसे संभालने में पूरी जिंदगी गुजर जाती है तू जहां पर भी देखा कि कोई परिवार बिखर रहा है टूट रहा है या पति पत्नी के बीच में कोई झगड़ा फसाद हो रहा है तो आगे बढ़कर बाबा जी ने सब कुछ सही करने की कोशिश की उनके परिवार को एक करने की कोशिश की और बहुत से ऐसे परिवार टूट गए थे जो रिश्ते तोड़ के खत्म हो रहे थे या अलग-अलग रास्तों पर जा रहे थे उनको एक रास्ते पर लाया आज भी परिवार सुखी और खुशहाल है क्योंकि बाबा जी कहां तुम पर है उनकी बीवी वह सीख उनकी दी हुई ...
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दुनिया को देखकर ऐसा लगता है कि जिसके जीवन में जितने सुख और जितने दुख ईश्वर ने लिख दिया वह उससे किसी ना किसी रूप में मिलकर ही रहेंगे आप चार लाख कोशिश कर लो लाख प्रार्थना कर लो लाख दुआएं मांग लो मन्नतें कर लो कुछ भी कर लो लेकिन उस ईश्वर के आगे किसी की नहीं चलती जैसा हो जाता है वैसा ही होता है वही एक है ना हुई है सोई जो राम रचि राखा को कर्क तरक बढ़ावे साखा आप कितनी भी कोशिश करोगे इतनी भी अरगुमेंट्स करोगे बहस करोगे कुछ नहीं होगा होगा वही सोच रखा है तुम्हारे लिए हमारे लिए और सभी के लिए यही चीज सबके जीवन में लागू होती है बाबा जी भी तो कितने अच्छे इंसान किसी का भी दिल नहीं दुखाया होगा लेकिन हमें प्रारब्ध का फल भोगना ही होता है कोई ना कोई ऐसा करो जो हमें किसी भी जाकर यहां पर किसी न किसी देश में मिल जाता है हमारे सामने आ जाता है और हमें वह दुख बुकस्टॉल को तकलीफ मिलती है जिसे हम ख्वाहिश रखते हैं कि हमें उससे सुख मिलेगा हमारे सारे दुख दूर हो जाएंगे जो भी हुआ अच्छा ही हुआ पापा जी की एक उम्मीद थी जिस उम्मीद के लिए उन्होंने शादी की थी वह मिथुन की पूरी हुई और उनके यहां एक बा बाबा पैदा हुआ उससे पहले ए...
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एक नाविक था उसके पास एक नाव थी नाविक अपनी नाव से बहुत प्रेम करता था वह जहां जाता उसको अपने साथ लेकर चलता था वह नाव में ही रहता और नाव पर ही अपना खाना खाता और उसी के साथ घूमता फिरता सवारियों को लेकर इधर से उधर नदी पार कर आता इसी तरह बहुत साल गुजरते रहे दोनों भी बहुत अच्छी थी कभी भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया उसको कभी किसी तरह के उसके यात्रियों को कोई तकलीफ नहीं होने दी बस मजे में नाम के साथ खुश थी उसका नाम खुशी बहुत प्रेम करता है इन दोनों का प्यार ऐसे ही बना रहे 1 दिन क्या हुआ नाविक नाव को लेकर जा रहा था तभी उसको मन में आया यह इतनी पुराने नाम हो गई है इस को यहीं छोड़ देते हैं और वह पता नहीं क्या सोच कर नाव को विस्तार में छोड़कर खुद करते हुए किनारे से आ लगा नाव को तैरना तो आता नहीं था वह तो नाविक के इशारे पर ही चलती थी ना ना ना विक्की सर बहा ले जाता वह उधर बहती चली जाती जिधर कहता उधर सर्दी चली जाती थी किसी तरह से चलता रहा था लेकिन अब जब नाभिक दे उसको छोड़ दिया बीच मझधार में उसे समझ नहीं आ रहा था वह क्या करें कहां जाए कैसे जाए आखिर उसने इधर-उधर से इतना धूप तो सकती नहीं थी क्योंकि उसमें कोई...
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पक्षी सभी पक्षियों को देखो ध्यान से उड़ते हुए जाते हैं आती है आते हैं आसमान की ऊंचाई तक करते हुए उड़ते हुए भाषा आते हैं पहुंचा आते हैं संदेश से बादलों त आप बर्गर कुर्ते चले आते हैं बरस बरस जाते हैंब जाकर पक्षी ही तो होती है जो ईश्वर के भेजे हुए दूध होते हैंतुम्हारे सिवा नजर नहीं आता कोई जो कुछ हो सिर्फ तुम हो रोम रोम का अर्थ है मेरा सिर्फ तुम्हारा जुबां पर रहता है हरदम एक ही नाम तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा मेरा फैसला मेरा कंगना मेरा रोना मेरा मुस्कुराना सब कुछ तो तुम जानती हो सब समझते हो फिर क्यों क्यों किसलिए बस्सी क्यों की तलाश में मैं भटक रही हूं तड़प रही हूं मचल रही कब से ना जाने कब से और ना जाने कब तक जब मिलेगा मुझे इस सवाल का जवाब तब शायद मन को सुकून आएगा चैन आएगा घबराहट दूर चली जाएगी खत्म हो जाएगी क्योंकि तलाश पूरी हो जाएगी बाबा जितेंद्र पाल सिंह सोनी जी का जन्मबंदा बहादुर साहिब गुरुद्वारा रियासी जम्मू कश्मीर जम्मू में हुआ था 1944 में 2 अक्टूबर 1944 को जम्मू शहर में हुआ था उनको जब जन्म हुआ था उससे पहले रिया से देरी पर थे वहां से उनकी मां को लेकर जा रहे थे उनके पापा लव पर बैठक...
N जाने क्यों
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आँख खुल जाती है चौक कर गहरी नींद से जग जाती हूँ दिल घबराने लगता है और कुछ समझ नही आता है कि मैं क्या करूँ कहाँ चली जाऊँ क्या तुम्हे मेरा जरा सा भी ख्याल नही आता होगा, क्या तुम इतने बेदर्द हो या फिर कोई दानव हो जो मुझ मासूम सी जान को यूँ तकलीफ दे रहे हो हे ईश्वर मुझे मेरे सवालों के जवाब दो, मुझे नही पता कि वो राक्षस क्यों मुझे धीरे धीरे निगल रहा है Seema aseem 26,1,23
समझ नहीं आता
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समझ नहीं आता क्यों इतना दिल उदास हो जाता है क्यों नही मन सम्भल पाता है आँसू क्यों बहते रहते हैं क्यों नही रोके रुकते हैं लगता है में हार गयी हूँ मै टूट गयी हूँ बिखर गयी हूँ न जाने कैसे संभले गा न जाने कैसे बहलेगा कोई तो बताये मुझे कोई तो समझा ये मुझे कि बहुत भारी हो गया मन मेरा देखो न बादल भी भारी हैं संग मेरे और बरसते रहे रात भर संग मेरे बारिश को मिला धरती का सहारा सम्भल गया बादल मैं रिस ती रही मैं बहती रही मचलती और सुबकती रही यूँ ही तन्हा यूँ अकेले तुम्हारे लिए तुम्हारे लिए।। सीमा असीम 25,1,23
जो भी सिर्फ तुम ही हो
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तुम्हारे सिवा नजर नहीं आता कोई और जो कुछ हो सिर्फ तुम हो मेरा रोम रोम पुकारता है तुम्हें सिर्फ तुम्हारा नाम जुबां पर रहता है हरदम एक ही नाम तुम्हारा सिर्फ तुम्हारा मेरा हँसना, मेरा कं मेरा रोना मेरा मुस्कुराना सब कुछ तो तुम जानती हो सब समझते हो फिर क्यों क्यों किसलिए बस्सी क्यों की तलाश में मैं भटक रही हूं तड़प रही हूं मचल रही कब से ना जाने कब से और ना जाने कब तक जब मिलेगा मुझे इस सवाल का जवाब तब शायद मन को सुकून आएगा चैन आएगा घबराहट दूर चली जाएगी खत्म हो जाएगी क्योंकि तलाश पूरी हो जाएगी