चलो मां मैं कल चली ही जाती हूं जब भी तो इतना कह रही है आज आप फिर इतने दिनों के बाद हमारा संग साथ होगा तो अच्छा लगेगा लेकिन एक बात सुनो मैं पैकिंग तो कर लेती हूं 2 दिन का प्रोग्राम है पर आप कुछ खाली मैं परेशान नहीं होगी और कुछ बनाएंगे नहीं जाकर हमेशा किचन में खड़ी रहती हैं कुछ ना कुछ बनाने के लिए आशियाने खुश होकर मां से बात हुई थी ना जाने कितने दिनों के बाद उसके मन को थोड़ा सा सुकून से आया था कहीं जाने में बाहर निकलने में लोगों से मिलने के बाद मन तो अच्छा होता ही है और जब विचार ही आया जाने का तभी इतना अच्छा लग रहा है
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जी चाहता है सारी दुनिया में ले आऊं तबाही भोले बाबा की तरह अपना तीसरा नेत्र खोल दूँ इतना घबराता है जी कभी-कभी कितना भी रो लूँ पूरा नहीं होता कुछ भी करने को दिल चाहता है पूरी दुनिया से पानी पानी सिर्फ पानी सिर्फ पानी भर देने को जी चाहता है पूछना चाहती हूं मैं ईश्वर से एक बार मिलकर अगर तूने दुनिया बनाई है यह दूनिया तो तूने अच्छे इंसान नहीं बनाये कुछ तो आंखों में इंसान की शर्म दी होती कुछ तो आंखों में दर्द दिया होता छल कपट प्रपंच रचने के अलावा कुछ तो इंसानों के अंदर इंसानियत होती ईश्वर मैं तो सिर्फ यह पूछना चाहती हूं सिर्फ कि तूने मुझे इतने दुख क्यों दिये कि मेरी आंखों के आंसू थमते नहीं हैं असीम
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कहाँ हो आर्यन तुम और बिना बताए कहां चले गए चंपारण वापस आ जाओ वरना मैं मर जाऊंगीमेसेज करने के बाद मन को थोड़ा सकून आया कि अब उसका आर्यन वापस आ जायेगा क्योंकि यह पढ़ने के बाद वो मेरी स्थिति समझ जायेगा उसी समय उसका फोन की घंटी बज उठी है और वह अपनी तरह से तुमचा से बाहर निकल आई है क्योंकि वह तुम्हारे ख्यालों में खोई हुई थी उसका फोन तो नहीं है किसका फोन है वह जल्दी से फोन का बटन दबा कर बात करने लगी कल तू आ रही है सैया हम लोगों को सुबह जल्दी निकलना है भाई और हम और तुम तीनों चल रहे हैं वहां पर हम लोग बहुत मजे करेंगे कितने दिनों के बाद साथ जाने का मौका मिला है और तू ऐसा कैसे कर सकती है कि ना जाए तो जा रही है हमारे साथ हर हाल में कोई बहाना नहीं चलेगा बड़े दिनों के बाद तो हाथ लगी है और तेरा साथ मतलब खुशियों का भंडार तो तू जहां भी रहती है बस खुशियां ही खुशियां होती है लेख लेकिन तुम मुझे अब पहले जैसी नहीं लगी तो कल बड़ी उदास निराश और हताश थी क्या हुआ है तो मुझे बताना मैं तो तेरी ही हूं तेरी सहेली तेरी अपनी तेरी सब कुछ हां हां यार मैं सब पता होगी तो इतनी सारी बातें करेगी ए...
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na जाने क्यों आदत सी हो गयी है हर किसी को हर बात पर शक सुबह करने की लोग तो अक्सर इश्वर पर भी शक करने लगते हैं समझते ही नहीं कि जो इश्वर करता है या कर रहा है वो हमारे भले के लिए ही कर रहा है जो कुछ भी वो करता है उसमें हमारा कुछ न कुछ अच्छा ही हो रहा होता है की भी हमारे साथ अगर कुछ भी गलत करता है तो उसका अंजाम उसे खुद ब खुद जरुर मिलता है तो फिर हम क्यों उस पर ऊँगली उठाते है क्यों उसे गलत ठहराने के लिए कमर कस लेते हैं और हर तरह से नीचा दिखने का प्रयास करते हैं उसके लिए हमें चाहें कितने भी साम भेड़ क्यों न अपनाने पड़े आखिर उसे गलत साबित कर देते हैं तभी सकूं पाते हैं जबकि जो गलत करता है वो खुद ही उसकी सजा भुगत रहा होता है अपने मन ही मन में हमें तो विश्वास रखना है सिर्फ खुद पर और अपने इश्वर पर फिर चाहें कोई कुछ करे हमें कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला है हमें मस्त रहना है खुश रहना है बहुत हुआ अब जियो शान से और दिखा दो दुनिया को कि हमारे साथ ईश्वर है वो...
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कभी-कभी हम मजबूर होते हैं बेइंतिहा मजबूर होते हैं हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते लेकिन हम भले ही कुछ नहीं कर पाते या नहीं कर रहे होते हैं पर हमारा ईश्वर जो सब देख रहा होता है वो अंदर ही अंदर हमारे भले के लिए कर रहा होता है जैसा हम चाहते हैं उससे भी कहीं ज्यादा एक सुंदर संसार रच रहा होता है और जब ईश्वर करता है न तो फ़िर सारी दूनिया सिर्फ भौचक होकर देखती रह जाती है.. क्योंकि तुम किसी की सरलता का फायदा उठा कर उसे यूँ फेंक देते हो न उस वक्त ईश्वर अपनी बाँहों का सहारा दे देते हैं और हर तरह से संभाल लेते हैं... सीमा असीम