Posts

दर्द

 जब मन अकुलाता  है तो आंखों से बरस जाता है  न जाने कैसी हूक सी उठती है पेट में  फिर कुछ भी समझ में नहीं आता है  बस रोता ही रहता है समझता ही नहीं किसी भी हाल समझता ही नहीं ना जाने कितनी देर तक रोता रहता है सुबकता रहता है किसी की कोई बात याद आती है उसके वह शब्द जो हमारे दिल को दुख देते हैं  या उसकी वे बातें जो बार-बार दिल में दर्द पैदा करती है और हम रोते रहते हैं समझते ही नहीं है समझ आता ही नहीं है होता है होता है ऐसा अक्सर ही होता है मेरे साथ... क्यों दुखाते हैं दिल लोग आपका,क्यों कहते हैं ऐसी बातें जिससे आपके दिल को चोट पहुंचती है? क्यों करते हैं वे काम वे बातें जो आपको अच्छी नहीं लगती और जिसको देखकर आप अपने आप को संभाल नहीं पाते तब सिर्फ रोना ही आपके बस में रह जाता है... और फिर आप हल्के हो जाते हो और माफ कर देते हो उसे बिना कुछ कहे ही... सीमा असीम 1,2,21

तिलक

 हटो हटो हटो दूर हटो, रात को कोई तिलक लगाता है जाओ जाओ किसी और के लगाओ, हम नहीं लगाते तिलक रात को!  बुरी तरह से झिड़क दिया था उस छोटे से मासूम बच्चे को एक गरबीले, घमंडी,नकचढे इंसान ने, यह देखते ही मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी सी पैदा हो गई उस बच्चे के लिए मन में दर्द भरा आया और आंखों में हल्की सी नमी भर गई!  कोई ऐसा कैसे कर सकता है किसी के मन में किसी के प्रति इतना दुर्भाव कैसे हो सकता है? क्या गलती है उसकी वो माथे पर तिलक ही तो लगाना चाहता है जब आप रात को मंदिर जा सकते हो तो तिलक रात को क्यों नहीं लगा सकते अनेकों सवाल मेरे मन में उमड़ने लगे!  वह भी तो एक इंसान ही है, माना कि वह इतना सक्षम नहीं है तुम्हारी तरह धन दौलत से भरपूर नहीं है तुम्हारी तरह, लेकिन खाता तो वह भी रोटी ही है, हो सकता है  जो तुम मक्खन या घी में भिगोकर रोटी खाते हो और वह नमक से सूखी रोटी खाकर गुजर कर लेता है!  सुबह ही निकल पड़ता होगा चंदन की कटोरी लेकर के मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के माथे पर तिलक लगाकर कुछ पैसे कमा लेगा, हर कोई पैसे कमाता है कोई  पैसे तिजोरी भरने को कमाता है और...

बांसुरी

 मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर वह दिनभर बेचती है मोर पंख लगी बांसुरी  कुछ बिक जाती है और कुछ रह जाती हैं  कुछ लोग खरीद लेते हैं प्यार से उसे पूरे पैसे दे देते हैं  और कुछ मोलभाव करते हैं और फिर खरीदते भी नहीं छोड़ कर चले जाते हैं  कुछ लोग उसे झड़प देते हैं हटो हटो नहीं चाहिए  दिन भर मेहनत करने के बाद बमुश्किल कुछ कमा पाती होंगी ₹10 की बेच के एक बांसुरी है न जाने कितनी बांसुरी बेच पाती होगी या शायद कभी एक बांसुरी भी नहीं बेच पाती होगी  ना जाने कितने लोग होते होंगे उसके घर में ना जाने वह कैसे लोग का पेट भर पाती होगी  शायद वह अकेले ही रहती होगी  शायद उसका एक बेटा होगा या शायद उसकी एक बेटी होगी  जो राह तकते रहते होंगे कि मां आएगी कुछ पैसे कमा कर लाएगी और उसका पेट भर पाएगी  सुहागन तो कहीं से नहीं लगती पति नहीं होगा शायद या होगा भी तो शराबी होगा  या फिर बिगड़ा हुआ होगा नहीं करता होगा देखभाल अपनी पत्नी की अपने छोटे बच्चों की  ज्यादा उम्र तो नहीं लगती इसकी मुश्किल से 35 साल होगी या 30 साल  बच्चे अभी छोटे ही होंगे इसके ...

उड़ान

Image
 उठो जागो चलो और लग जाओ अपने काम पर कि यह  जिंदगी दोबारा नहीं मिलती है कि जिंदगी मिल भी जाए तो जवानी फिर नहीं मिलती है...  निर्भय होकर नम्रता के साथ अपने कर्म पथ पर लग जाओ देखना मंजिल बहुत करीब होगी, इतनी ऊंची उड़ान भरो कि लोग देखें तो देखते रह जाए पंछी तुम्हारा साथ पाना जाए...  हमारी खुशी दूसरों की खुशी में तो है पर अपने अंतर्मन को हमेशा पाक साफ रखो कि उसमें इतनी ऊर्जा भर जाए उसमें इतनी उष्मा भर जाए कि आपका मन कभी थके ही नहीं..चलता जाए, चलता जाए  हर काम हर बात को हर बाधा को दूर करते हुए आगे बढ़ता ही चला जाए..  अपना समय अपनी उर्जा को यू व्यर्थ जाया मत करो, बेकार की चीजों में मत लगाओ अपने समय को अपने काम को अपनी ख्वाहिशों को, अपनी उम्मीदों को,अपने ख्वाबों को पूरा करने में लगा दो....  पर करो पर चलो पर आगे बढ़ो पर उड़ान भरो  लेकिन अपने अनुभवों में कुछ अच्छे हो या बुरे कभी घबराओ मत उनका उनका सामना करो उनका डटकर सामना करो....  फिर देखना आपके किरदार से क्या महक आती है  अपने किरदार को इतना निखारो, इतना सवारो कि पूरी दुनिया ही महक जाए दुनिया में...

ख़ुशी के लिए

Image
 प्रेम को पाने के लिए प्रेम में डूबना पड़ता है यह आग का दरिया है जलकर भस्म होना पड़ता है यूँ ही मिल जाता किसी को प्रेम तो मीरा दीवानी नहीं होती जहर के प्याले को अमृत समझ नहीं पीती.... कृष्ण भी कहाँ द्रोपदी का चीर बढ़ाते न उसकी एक पुकार पर दौड़े चले आते.... जंगलो की खाक झानते फिरे राम वनवास में सीता के प्रेम मे स्वर्ण मृग का न शिकार करने जाते भूल कर सुध बुध प्रिय सीते सीते पुकारते रहे वे भगवान थे फिर भी  प्रेम को भगवान मानते रहे.... प्रेम कोई खेल नहीं कि इंसान इसे खेले  खुद की ख़ुशी के लिए  दूसरों को दुःख दे दे.... आचमन नहीं है प्रेम कि चखा और छिड़क दिया सिर माथे पर लगाकर पहले खुद की ख़ुशी भूले जीना पड़ता है उसके लिए सब कुछ भुला कर  प्रेम करने से पहले जरा सच्चे इंसान होले... सीमा असीम 12,1,21