प्रेम है मुझे...
जब होती बार बार बारिश तो
भीगे हुए फूलों को देखते हुए
हरियाली के पास से गुजरते हुए
अक्सर यही तो सोचती हूं मैं
यूं ही नहीं होती है यह बारिश
कहीं तुम मुझे याद करके रोते हो
करते होंगे गुहार आसमा से और
बादलों के संग बरस पढ़ते होंगे
तभी तो मुस्कुरा देता है मेरा भी मन कभी-कभी
रुक जाए बारिश और तुम भी मुस्कुरा दो
पोंछ कर अपनी नम आंखों को
ख़ुश हो जाओ
कि जरूरी है इस अहसास को महसूस करना
जीने के लिए अपनी भावनाओं को कहना
नहीं तो घुट जाओगे मन ही मन
कोई नहीं समझेगा तुम्हे
न तुम्हारे जज्बातो को
कहो और कहते रहो
कि प्रेम है मुझे
हाँ प्रेम है मुझे
तुमसे ही सिर्फ
तुमसे ही.....
सीमा असीम
18,9,24
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