जिस तरह तैरती हैं पानी में....
जिस तरह से तैरती है पानी में मछलियां
ठीक उस तरह से तुम मेरी आंखों में तैरते हो
याद ना करना चाहूं तो भी तुम
हर वक्त मेरी यादों में रहते हो
यूँ कम तो नहीं हैं मेरी भरी भरी आंखें
किसी नदी से
जहां तुम दिन रात अठखेलिया करते हो
आ जाओ कभी तो रूबरू मेरे सपनों के
राजकुमार की तरह घोड़े पर सवार होकर
या कभी चले आओ यूँ ही चहलकदमी करते हुए
और मेरी पलकों पर हाथ रख दो
अगर घबरा जाऊं मैं तो समेट लो मुझे अपनी बाहों में
और मुझे अपने प्रेम से तर बतर कर दो
यह सब ख्याल यूं ही तो नहीं आते मेरे मन में
गूंजती है कोई सदा ब्रह्मांड में
तो जोड़ देती है हमें आपस में
और यू शब्द उतर जाते हैं
कागज पर....
सीमा असीम
17,9,24
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