चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
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बारिश
आज मौसम की पहली बारिश हुई तेज हवाएं चली और बदल ले आई कल घने पानी भरे हुए बादल चले आए लहराते हुए मचलते इतराते और इठलाते हुए बरस गए झूम कर और भिगो गए मेरा मन तब याद आए तुम बहुत याद आए क्या तुम बारिश बन कर चले आए मुझे भिगोने के लिए आंगन को गीला करने के लिए हां तुम ही तो थे जो बारिश बनकर आए और छूकर बरस कर दुखी मन को सुख में बदल गए मौसम की बारिश और तुम याद आए सीमा असीम 24,4,24
तन के बंधन तो तोड़े जा सकते हैं पर मन के बंधन कोई कैसे तोड़ सकता है भला जो रिश्ते आत्मा से जुड़ जाते है उन पर जन्म या मृत्यु का कोई प्रभाव कहां पड़ता है जोड़े है हमने आपस में आत्मा से आत्मा के तार एक तार खींचता है तो दूसरे को महसूस होता है दूसरा अगर जोर से खींचता है तो पहला दर्द से भर जाता है आत्मा का बंधन है हां सच्ची आत्मा का सच्चा बंधन.. असीम

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