तुझे लेकर बाहों में तेरा मुंह
चूम लेना है
यू ही तेरे प्यार में अब जीना
और मरना हैं
सुनो प्रिय
कितना प्यारा रिश्ता होता है न प्रेम का ,,,दो लोगों के बीच बेहद स्नेहिल प्यारा और जान
कि बाजी लगा देने वाला ,,खुद की खुशी से अनभिज्ञ होकर दूसरे की
खुशी में निसार हो जाने वाला ,,,,,हाँ प्रिय मैं तुम्हें ऐसा
ही प्रेम करती हूँ सच्चाई से भरा निर्मल जल धारा सा बहता हुआ प्रेम ,,,,,कोई कठिनाई नहीं ,कोई मुश्किल नहीं , कोई भी रुकावट नहीं ,,क्योंकि प्रेम अगर सच्चा है तो
वो अपना रास्ता स्यम बना लेता है ,अपने आप चलता रहता है उसे कोई
परवाह नहीं होती हवाओं के विपरीत होने पर भी कभी दम नहीं तोड़ता ,,,हैं न प्रिय क्योंकि प्रेम को जीवित रखने के लिए खुद के भीतर प्रेम और विश्वास
का होना जरूरी है ,,,,जब कभी मैं बहुत दुखी हो जाती हूँ तब अपने
मन को तसल्ली देती हूँ की कष्ट थोड़े से सामी के लिए है बस कुछ ही समय में हमारा प्रेम
पहले से भी ज्यादा हारा भरा होकर लहलहाने लगेगा ,,,,मुझे पता
है अगर मैं तुमसे सच्चा प्रेम करती हूँ तो मेरे विश्वास को तुम भी नहीं तोड़ पाओगे और
मुझे मुझसे भी ज्यादा प्रेम करोगे हैं न ? ऐसा ही तो होता है
,,,,लेकिन प्रिय एक बात हमेशा याद रखना ,,निर्मल मन जन सो मोही पावा ,,मोही कपात छल छिद्र न भावा
,,,जितना साफ मन रखोगे उतना ही प्रेम के नजदीक होते जाओगे और
जरा से गलत विचार से तुम प्रेम से दूर पटक दिये जाओगे .....प्रिय हमारे इस बेहद प्यारे
प्रेम की लाज यूं ही बनाए रखना ,,,यूं ही फलते फूलते और पल्लवित
होने देना ...क्योंकि
यह प्रेम मेरा जीवन है और जीवन
का आधार भी
कभी ढेंस पहुंचे मेरे मन को ऐसी
बात मत करना ,,,,,
सीमा असीम
5,10,19
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