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बिखरना

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 हम अक्सर बिखरी हुई चीजों को समेटने में  खुद इतना बिखर जाते हैं की संभल ही नहीं पाते  इसलिए जो बिखर गया है  उसे बिखर जाने दो क्योंकि  कभी-कभी बिखरी हुई चीजें   सुंदर लगती हैं अच्छी लगती हैं  प्यारी लगती हैं  जैसे की बिखरी हुई नदी  जैसे कि पहाड़  जैसे की आकाश  बिखरे हुए खेत  जंगल  अगर इनको समेट देंगे तो  उनकी सुंदरता चली जाएगी इसीलिए  बिखरी हुई चीजें भी  कभी-कभी अच्छी लगती हैं  है ना हम बिखरे हुए हैं और  तुम भी तो बिखरे हुए हो  पर अच्छा है ना... सीमा असीम सक्सेना  31,1,26

बेचैनी

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 मन की हर बेचैनी को  कैसे मैं शब्दों में ढाल दूँ  कि हद है शब्दों की  पर मेरी बेचैनी की  कोई भी हद है कहाँ.. सीमा असीम  30,1,26

इंतजार

 अब तो कोई आस भी नहीं है  अब तो कोई उम्मीद भी नहीं है  फिर भी क्यों रहता है मुझे  इंतजार तेरा  हर बार तेरे लौट आने का  लेकिन इंतजार कैसा  लौंटने का  कि जब तुम कहीं गये ही नहीं हो  पल भर को भी  मेरे मन से दूर... सीमा असीम सक्सेना  29,1,26

वजह

 मुस्कुराने के लिए किसी वजह का होना तो जरूरी नहीं है  हम मुस्कुरा तो कभी भी सकते हैं  हम मुस्कुरा तो कहीं भी सकते हैं  किसी भी प्रकार अपनी मुस्कान को कायम रख सकते हैं और सबसे अच्छी बात यह है  कि हम अक्सर बेवजह मुस्कुरा देते हैं.... सीमा असीम  29,1,26

जीत या हार

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 कभी-कभी तुम सोचते होंगे या मुझे लगता है कि  तुम हमेशा यही सोचते होंगे  कि तुम जीत गए  तुमने सबको हरा दिया  पर सच तो यह है   कि तुम हारे ही नहीं बल्कि  पूरी तरह से हार गए और  हम जीत गए  तुम्हें नहीं पता  हाँ नहीं पता कि  जीत क्या होती है और  हार क्या  तुम जीत कर भी हारे हुए हो  हम हार कर भी जीत गए हैं... सीमा असीम  28,1,26

प्रेम

 प्रेम  प्रेम एक ऐसा शब्द है  जिसे सिर्फ अनुभूत किया जा सकता है  महसूस किया जा सकता है   उसका अहसास किया जा सकता है  उसे लिखा नहीं जा सकता हाँ प्रेम को लिखा नहीं जा सकता  है ना... सीमा असीम  27,1,26

पुकार

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 पुकारता है क्यों  क्यों पुकरता है  क्या नहीं जानता  क्या नहीं है पता  कि दिल को सब पता है  कि दिल सब समझता है  अहसासों के वन में  यूँ अकेला पड़ा है  कि पुकारता है क्यों... सीमा असीम  26,1,26