शब्द
अब अगर ख़ुशी लिखी जाए तो जरूरी तो नहीं कि सुख में ही लिखी जाए उदास चेहरे से या निराशा में भी तो ख़ुशी लिखी जा सकती है ख़ुशी पर कोई कविता ख़ुशी पर कोई कहानी या फिर खुशी पर कोई गीत हां यह अलग बात है कि खुशी लिखते लिखते सचमुच ही खुशी आ जाए सुख जाए और हताशा भरे पलों में चेहरे पर प्यारी सी मुस्कुराहट खिल जाए कि शब्द मात्र शब्द नहीं होते बल्कि शब्दों के भी वजूद होते है कहते भी तो हैं न कि शब्द ब्रह्म होते हैं और यह बात अक्षरसा सत्य है या फिर सत्य हो जाती है चाहे शब्द बोले जाए या फिर शब्दों को लिखा जाए है ना... सीमा