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 मैं तुम पर बहुत ज्यादा विश्वास करती हूं हद से ज्यादा कोई एक बात भी अपने मन में नहीं रखती सारी बातें मैं तुमसे कह देती हूं दिल में कुछ रहता ही नहीं है मेरे तुम्हारे सिवा कुछ यहां तक कि जो भी बात मुझसे कोई कुछ कहता है वह भी मैं तुम्हें बता देती हूं मैं कभी कुछ तुमसे छुपाना ही नहीं चाहती मैं बार-बार तुम्हें जताना चाहती हूं लेकिन जब तुम मेरे विश्वास को ठेस पहुंचाते हो उसे झूठ बोलते हो कोई भी एक बात वह चीज मुझे रुलाती रहती है बरसो बरसो दिन रात सुबह दोपहर जब भी वह चीज भी रहती है दिल में और वह मुझे रुलाती है कि तुमने मुझसे झूठ बोला..मुझे सच भी तो कह सकते थे  हर बार वही झूठ को अधूरा ना बार-बार उसे झूठ को कहना इतनी सफाई के साथ कहना मैंने तो तुमसे कभी कोई सफाई नहीं मांगी तुम अगर मुझे कोई बात बता भी रहे हो तो सच बताओ झूठ बताने का क्या मतलब बनता है उसे छुपाने का क्या मतलब बताएं मैं तो तुमसे पैसे भी हमेशा ही तुम्हारी हूं तुम्हें प्रेम करती हूं हद से ज्यादा करती हूं कोई नहीं कर सकता इतना तुम्हें प्रेम  पवित्र और सच्चा प्रेम उसमें नाम मात्र को भी कोई मिलावट नहीं है प्रेम में इतना पारदर...
घर पर बात हो जाने से मन में संतुष्टि का भाव आ गया था ना अभी तो बहुत फिक्र लगी हुई थी कि घर पर सब परेशान हो रहे होंगे खैर अब बात हो गई तो अब जाकर आराम से हम सो सकते हैं क्योंकि सोनू अगर नहीं सोएंगे तो अगले दिन उठ नहीं पाएंगे और हमारी थकान कम नहीं होगी  बिस्तर पर लेटते ही नींद में आकर बसेरा डाल दिया और हम गहरी नींद में सो गए आंख सुबह 6:00 बजे के करीब खुली तो देखा पहाड़ों से दूर छन छन के हमारी टेंट के अंदर आ रही है मैंने उसके बाहर निकल आई जब मैं इतनी दूर आई हूं तो इस प्रेशियस को क्यों ना महसूस किया जाए और यहां के वातावरण को क्यों ना महसूस किया जाए आंखों क्यों ना जिया जाए केवल हम देखने के लिए सोने के लिए आराम उठाने के लिए तो नहीं आए थे ना  सूर्य देव भगवान पहाड़ों पर आराम से उतरते जा रहे थे मानव पहाड़ ऊपर अधूरे नीचे आ गया हो नदी की कलकल की आवाज कानों में आ रही थी सामने ही तो नदी है कितनी सीट मिली थी टेंट और सड़क के उस पार नदी बीच में नदी ही थी थोड़ा सा नीचे उतर कर जाओ तो सड़क को पार करके जा और नदी सामने दिख रही थी अभी तो खैर नहीं नदी हम थोड़ी देर बाद जाएंगे थोड़ा धूप निकल आए और अच्...
 सनम तुम न करना कभी बेवफाई मुझसे भले ही पिला देना जहर का प्याला क्योंकि नहीं जी पाऊँगी मैं बिन तुम्हारे या होकर तुमसे जुदा मैं कि हूँ मैं सिर्फ ही और तुम्हें मानती हूँ सिर्फ अपना हाँ तुम मेरे ही हो सिर्फ मेरे तभी तो चलती हैं हमारी स्वांस साथ साथ धड़कती है धड़कन साथ साथ और हो तुम मेरे जैसे ही जैसे मैं बन गयी हूँ तुम्हारे जैसी... सीमा असीम 

सावन

 कल फिर रोया सावन  तड़प तड़प के रोया  तुमने जी दुखाया   बिन बात के सताया  कितना समझाया पर  मन समझ नहीं पाया  सोते हुए जगते रोया  खाते रोया पीते रोया  मचल मचल के रोया  तरस तरस के रोया  मजबूर था दिल के हाथों  किसी भी हाल दिल न बहला  आंखों के प पोटे सूज गए लाल लाल  गालों पर बहती रही लंबी लंबी धार  बिखर गए थे बाल चारों तरफ  जिस्म हो गया बेजान जार जार  बिस्तर से तन को उठाया ना गया  हाल मन का किसी से छुपाया ना गया  बेदर्दी निर्दई जालिम  क्या सुख पाया तूने  सता कर रुलाकर तड़पा कर  प्यास एक की तक तो तुझ से पूछा या ना गया दुनिया भर में तू बरसता फिरा  तब भी तू रह गया प्यासा का प्यासा  मुझसे भी कहीं ज्यादा तरसता तड़पता मचलता हुआ सीमा असीम 
 जिंदगी की राहों पर चलना सिखाए  इंसानियत का पढ़ाई पाठ और चीन सिखाएं  धैर्य धर्म-कर्म का पाठ पढ़ाते हुए  हर मुश्किल में हर कठिनाई में बस मुस्कुराना सिखाएं  डग डग पर हो उसका साथ  परछाई की तरह रिश्ता निभाएं  सम्मान के साथ जिसके आगे झुक जाए बार-बार सर  बस वही श्रेष्ठ गुरु कहलाये  सूर्य से ऊर्जा होश में और चांद से शीतलता  अंबर सा विस्तार है उनमे  नदी की सी निश्छल कल कल कल कल  गुरु की गरिमा से बड़ा नहीं कोई और ना उससे बड़ा कोई आकाश है मन में रखो विश्वास सच्ची भक्ति ही कर देगी बेडा पार 
करीब 6 महीने से घर से बाहर हम लोगों झाँके नहीं थे. कभी लॉकडाउन कभी कोरोनावायरस और कभी लहर बस इन्हीं सब चीजों के बीच झूल रहे थे और डिप्रेशन का शिकार हो रहे थे घर से बाहर निकल पाना भी एक बहुत बड़ी त्रासदी है एक ही कमरे में बैठे गाना तेरा ना सोचते रहना न जाने कितने बुरे बुरे ख्याल आगमन को परेशान करते रहते हैं थोड़ी देर को घर घर से बाहर जाने को मिले थे शायद ना कर दो पेशंट कम हो जाए ऐसा यह सोचते सोचते कितना दिन निकल गए थे आखिर हम लोगों ने करीब 10 महीने के बाद एक प्लान बना लिया घूमने का  हमारा पसंदीदा प्रदेश हिमाचल प्रदेश यह पिक अभी कहीं घूमने जाने का प्लान बनता तो हम लोग हिमाचल प्रदेश जाने का ही प्लान बनाते हैं कि वहां की हरियाली वहां की वादियां और वहां की हवाएं शुद्ध हो मतलब तुम होती और मन को तरोताजा भी करती और फिर ऐसे माहौल से निकल कर जा रहे थे तब तो फ्रेश एयर में जाने के लिए सबसे अच्छा जगह अगर कोई है तो हिमाचल प्रदेश ही लगी मुझे  हालांकि हम लोग उत्तराखंड भी जा सकते थे घर के करीब भी है उत्तराखंड लेकिन वहां पर आईटी पीएसी की रिपोर्ट लेकर जानी थी और भी बहुत सारे झंझट है जबकि हिमाचल ...