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 मेरी आत्मा में उठता हुआ दर्द तुम तक जरूर पहुँचता होगा तभी तो बहते हैं मेरे आँसू और लगातार बहते जाते हैं,,, यक़ीनन जितना तुमने मुझे रुलाया है उससे कई नदियों भर गयी होंगी या शायद कई समुन्द्र भी क्योंकि यह आँसू बहुत मीठे थे अब खारे लगते हैं... काश तुम समझ जाते कि प्रेम क्या होता है पर तुम कहाँ समझोगे भला? तुम्हें कहाँ होती है कोई परवाह अगर होती तो कभी यूँ शब्दों के तीर न चुभाये होते न कभी यूँ मुझे रोने तड़पने दिया होता... तुम ऐसे क्यों हो बताओ मुझे क्यों तुम इतने मस्त हो हर्फ़न मौला? कि तुम्हें जरा भी दर्द नहीं होता है... तुम्हें भी हो जाये मोहब्बत सच्ची तो समझ आयेगा सब कुछ अभी तक तो हुई नहीं न अगर होती तो कभी यूँ न करते तुम?
 अब मैं तुम्हें नहीं पढूंगी कि पढ़ती हूँ ज़ब भी तुम्हें मुझे दुःख होता है बेपनाह दर्द जिसे मैं किसी हाल संभाल नहीं पाती हूँ... दर्द से बेहाल हो मैं न जी पाती हूँ और न कुछ कर पाती हूँ... तुम तो मुझे हमेशा से दुःख देते आये हो, हर बार तुम मुझे ऐसे ही तो रुलाते हो और तड़पाते हो फ़िर भी मैं आ जाती हूँ लौट लौट कर तुम्हारे पास,, जानती हूँ अब तुम्हें अच्छे से कि तुम उचश्रनखल हो,, तुम्हारा कोई दीन ईमान नहीं है तुम खुद की नजरों में भी गिर चुके हो बस जी रहे हो इसलिए ऊँची ऊँची हाँकते हो आखिर तुम ऐसे क्यों हो जरा सी फिसलन पर फिसल जाते हो, ज़ब देखो तब गिरी हरकत पर उतर आते हो, कभी meri भावनाओं की कद्र ही नहीं तुम्हें... हैरत होती है तुम्हारी इंसानियत पर क्या तुम अब इंसान भी नहीं रहे... क्या तुम्हारे दिल में कोई भाव ही नहीं हैं? बेदिल बेभाव के शख्स,,, तुम जी कैसे पाते हो? मुझे शर्मिंदगी है कि तुम मेरे अपने हो,, ऐसे अपने जिसे मेरी जरा भी परवाह नहीं... लेकिन सुनो मुझ गरीब को सता कर तुम भी खुश नहीं रह पाओगे... क्योंकि एक गरीब की आह सात आसमां के पार जाती है.. किसी को मत सताओ मत दो इतने दुःख दर्द और तकलीफ ज...
 जीवन क्या है  जब हम दुनिया में आते हैं लोग कितने खुश होते हैं मां बाप भाई बहन इतने सारे रिश्ते नाते बनते चले जाते हैं हम अपनी आंखें खोलते हैं दुनिया को देखते हैं दुनिया बहुत प्यारी लगती है एकदम नया नया सब कुछ जीवन को जीने की इच्छा मन में शक्ति है उछलते कूदते बड़े होते चले जाते हैं पढ़ लिखकर बुद्धिमान बनते जाते हैं यार जैसे जैसे दुनिया को देखते जाते हैं वैसे-वैसे बनने की कोशिश करते हैं हमारे मन में छल कपट प्रपंच जाने क्या-क्या झूठ सब शामिल होता चला जाता है हमारे निश्चल तरह एक होती चली जाती है फिर धीरे-धीरे करके हम अपने गृहस्ती परिवार में मगन हो जाते हैं अपने मां-बाप जिनको हम जिन्होंने में पैदा किया वह हम उनको ना हम देखते हैं ना सुनते हैं बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने मां-बाप का भी सहारा बनते हैं फिर वह अपनी गृहस्थी में मगन होते हैं अपने बच्चों के साथ में खुश रहते हैं बच्चे बड़े हो जाते हैं अपने पांव पर खड़े हो जाते हैं और फिर 1 दिन हम इस दुनिया को छोड़ कर फिदा हो जाते हैं खत्म हो जाता है सब कुछ सब कुछ यहीं से हमने पाया होता है और यही सब छोड़ जाते हैं जो ब्रह्मांड में खड़ा क...
कहते हैं वहां पर बहुत मुश्किल से मिलती है मोहब्बत अगर मिल जाए तो समझती नहीं है इसलिए कोशिश करनी चाहिए मोहब्बत को ज्यादा जोर से मत पकड़ो और ढील भी मत दो क्योंकि ढील देने से वह बिछड़ जाती है और कस के पकड़ने से घायल हो जाती है तो प्रेम को बस प्रेम से सहेजे रखो  लेकिन उसने तो डील भी नहीं दी और कस कर भी नहीं पकड़ा फिर ऐसा क्या हुआ और फिर एक बार बिछड़ जाए दूर चला जाए फिर का मिलना मुश्किल है तभी तो उसके जाते ही मौसम बहुत खराब हो गया था  मुझसे मिलने के लिए आया वे लेकिन मौसम को शायद मंजूर नहीं था और उसका मिलना संभव नहीं हो पाया  हाथों से भगवान पर ही सहारा था अगर वह मिला ही नहीं तो मिल जाएगी नहीं तो हमारी कोई भी कोशिश काम नहीं आने वाली क्योंकि प्यार मोहब्बत इश्क इश्क किस्मत से मिलते हैं यह किस्मत के खेल होते हैं   कितनी ही दिन गुजर गए ना तो उसमें जॉब शुरू की और ना ही उसने थिएटर ज्वाइन किया हां बस कोचिंग क्लास जरूर शुरू कर दिए थे  अब बस एक यही ख्वाब रह गया था कि किसी तरीके से कंपटीशन निकालना है और किस डिपार्टमेंट में सरकारी ऑफिसर की जॉब करनी है 
तुम जो कहते हो लिखते हो या सोचते भी हो सब समझ आ जाती है मुझे तुम्हारी हर बात सुनो ज़ब तुम सांस भी लेते हो या छोड़ते हो मुझे पता चल जाता है इसलिए कभी कोशिश मत करना तुम मुझे किसी भी तरह से समझाने बुझाने की क्योंकि मैं कहती हूं तुम्हारी नस नस में लहू बनकर...