Posts

Image
पुलकित है धरा सर्द कठोर हवाओं के मध्य बहने लगती हैं मृदुहवाएं सहलाने लगती हैं बालों औ गालों को चूमकर ओ आसमां यह हवाओं का चूमना नहीं बल्कि था म लेना है तुम्हारा चुपके से आकर गा उठती है सुंदर गीत फिज़ाएँ उस गायन में साथ देने लगते हैं स्वर से स्वर मिलाकर धरा साथ है हमेशा हरहाल में वादा है खुद का खुद से धरा का दूर नहीं तुझसे भले ही असम्भव हो मिलन धरा आसमां का वे संग हैं मन से एक गौरैया फुदकती हुई आकर बैठ जाती है पेड़ की शाख पर चीं चीं कर चहकती गुनगुनाती सी वो गवाह है इस बात की कि प्रेम मृदु हवाओं सा बहता है जो कभी नहीं मिटेगा मि टा ने की तमाम कोशिशों के बाद भी रहेगा यूँ ही अमिट अनंत काल तक धरा का प्यार है आसमां है उसकी चाहत पुलकित हो उठती है धरा अहसास भर से ही मृदु हवाएं बहती रहती है पत्ते शाखों संग झू मने लगते हैं दरख़्त एकटक हो निहारने लगते हैं आसमां मुस्कुरा जो देता है स्नेह से भरकर देख कर धरा को यूँ खुश होते हुए !!!   सीमा असीम
Image
गतांक से आगे ओ मेरे हमदम ओ मेरे प्यारे सनम हम तो तुम्हारे हैं, हाँ तुम्हारे सनम सुनो प्रिय,  मैं तुम्हें ही गुनगुना रही थी, उदास थी और आँखों से आँसू छलक छलक जा रहे थे ,,प्रिय तुम्हें पता है न, मैं तुमसे कुछ कह नहीं पाती हूँ लेकिन मेरा दिल बहुत दुखता है, बहुत दर्द होता है.... तुम सब समझते हो, सब कुछ जानते हो,,फिर ऐसा क्यों करते हो ? प्रेम यह तो नहीं होता कि किसी का बेवजह दिल दुखाओ, उसे रुलाओ,... मैं तुम्हें प्रेम करती हूँ और हमेशा यूं ही करूंगी क्योंकि मैं खुद पर विश्वास करती हूँ ,,मैं जानती हूँ अपनी हकीकत ,,अपनी सच्चाई ,,,नहीं भटकने दूँगी अपना मन ,, मेरे लिए तो इतना ही काफी है कि मैं तुमसे प्रेम करती हूँ ,,,आसान नहीं है और इतना मुश्किल भी नहीं है किसी को अपना बनाना ,उसे निभाना और सच्चे दिल से उसे चाहते रहना ॥बिलकुल भी नहीं बस यह सोचकर दुखी होते ही न जाने कहाँ से लबों पर मुस्कान आकर बैठ गयी ,,,,तुम आ गये मुस्कराते हुए ,,,कल कह ही नहीं पाये जो बातें, वो आज तुम सब कह गए, अपना दिल खोलकर रख दिया, प्रिय मैं जानती हूँ मुझे तुम्हें कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है जब मैं अपनी ज...
Image
  कहाँ सोचा था ऐसा भी हो जायेगा भूल जाऊँगी ख़ुद को तुम याद रह जाओगे छोड़ आऊंगी मैं अपना सारा सुख दुख तुम्हारा अपने संग ले आऊंगी चैन दिन का नींद रातों की बिसरा कर आँखों में सपने भर लाउँगी गुनगुनाती रहूंगी कोई मधुर गीत कभी जी भर आँसू बहाऊँगी भूल कर जीवन की लय ताल तुम्हारी महक में खो जाऊँगी कैसा जादू है या कोई इन्द्रजाल तुम्हारे इंतज़ार की जोत जलाऊँगी हैं मन में कितने ही गिले मिलते ही तुमसे कहाँ कुछ कह पाऊंगी खो जायेंगे न जाने कहाँ आँसू सिर्फ़ तब जी भरकर मुस्कराऊँगी लुटाकर खुशियों का सागर आँचल सुख से भर लाउँगी ! ! सीमा
Image
गतांक से आगे भेजी थी एक दुआ जो आसमां से टकरा गयी ! आ गए वे यूं रूबरू दिल की धड़कने बढ़ा गयी !! सुनो प्रिय                कितना घबरा गयी थी इस तरह तुम्हें देखकर इतनी खुशी मिली कि इसे शब्दों में बयां ही नहीं किया जा सकता ,, मेरे मुँह से एक शब्द भी नहीं निकल सका , तुमने भी तो कुछ नहीं कहा बस एकटक देखते ही रह गए ,, बिना पलक झपकाए अपलक ,,,,, कितनी तेज हो गयी थी दिल की धड़कनें , उन्हें संभालना कितना मुश्किल हो रहा था , नहीं देखा गया और मैंने अपनी पलकें बंद कर ली ....मेरी खुशी का कोई परावार ही नहीं था ...मेरे प्रिय उस अहसास को मैं कैसे उकेर दूँ ? नहीं चाहती चाहती उकेरना ,,,, अमेजिंग ,,,,, ओहह मेरे प्रिय चाहती थी कि ज़िंदगी यही पर थम जाये ...रुक जाये वक्त ,,,, लेकिन न तो वक्त रुका और न ही मेरे दिल की धड़कने ही रुकी ,,,,, कैसे उतावली सी हो गयी थी मैं ,,, मैं तुम्हें कसकर अपने गले लगा लेने को आतुर हो गयी थी ,, खुशी से मेरे आँसू बहने लग पड़े मैं नहीं चाहती कि तुम मेरे आंसुओं की एक बूंद भी देखो ,, भले ही वो...
हम तेरे बिन अब रह नहीं सकते तेरे बिना क्या वजूद मेरा तुझसे जुदा गर हो जाएँगे तो खुद से ही हो जाएंगे जुदा क्योंकि तुम ही हो अब तुम ही हो ज़िन्दगी अब तुम ही हो चैन भी, मेरा दर्द भी मेरी आशिकी अब तुम ही हो तेरा मेरा रिश्ता है कैसा इक पल दूर गंवारा नहीं तेरे लिए हर रोज़ हैं जीते तुझको दिया मेरा वक़्त सभी कोई लम्हा मेरा न हो तेरे बिना हर सांस पे नाम तेरा क्योंकि तुम ही हो...
कबीर, रहीम के दोहे कहते को कही जान दे, गुरु की सीख तू लेय।  साकट जन औश्वान को, फेरि जवाब न देय। इष्ट मिले अरु मन मिले, मिले सकल रस रीति।  कहैं कबीर तहँ जाइये, यह सन्तन की प्रीति।  बन्दे तू कर बन्दगी, तो पावै दीदार।  औसर मानुष जन्म का, बहुरि न बारम्बार। पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित भया न कोय,   ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।  रहिमन ओछे नरन सो, बैर भली न प्रीत.  काटे चाटे स्वान के, दोउ भाँती विपरीत. रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारी.  जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारी. समय पाय फल होता हैं, समय पाय झरी जात.  सदा रहे नहीं एक सी, का रहीम पछितात. रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय.  सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लैहैं कोय.
Image
गतांक से आगे  ऐसी बाजी़ प्रेमकी, जो मैं खेली पी के संग, जीत गयी तो पिया मोरे, जो मैं हारी पी के संग  सुनो प्रिय,               यह कैसा खेल है जो मेरी समझ से एकदम परे है समझ ही नहीं आता कुछ भी ,,,क्या तुम जानते हो कितना उदास होता है मन, कितना दुखी होता है , आँखों में भर कर आँसू रब से बस एक फरियाद करता है कि वे खुश रहें ,,,,जब कभी भी मेरा दिल उदास होता है और आँखों से आँसू बहते हैं तो न जाने कैसी आशंका सी मन में आ जाती है कि कहीं वे परेशान तो नहीं ,,,किसी बात से दुखी तो नहीं ,,, ऐसे भूल जाती हूँ अपने सारे दर्द कि कहीं तुम्हें अहसास न हो जाये ,,, कैसे घूंट घूंट पी जाती हूँ जहर सा ,,,,गटक लेती हूँ बिना मौत कि परवाह किए ,,,,कि न हो कोई तकलीफ तुम्हें ,,,,कैसे यूं ही मुस्करा देती हूँ मैं रोते रोते ,,,,,कि बिखरी रहे तुम्हारे लबों पर मुस्कान ,,, फिर मैं सोचने पर मजबूर हो जाती हूँ कि क्या तुम्हें मेरी किसी भी तकलीफ का जरा भी अहसास नहीं होता ?  जबकि मेरा पल पल सिर्फ तुम्हारा है ...हाँ प्रिय तुम हमेशा और हर पल में मेरे ख्यालों में रहते हो,...