सीमा असीम, सक्सेना
महिलाओं का दर्द और मणिपुर हिंसा
दरअसल मणिपुर में जो
महिलाओं के प्रति हिंसा हुई, भीड़ ने जिस तरह से उन पर अत्याचार किए, उनको परेशान किया,शोषण किया और उसका वीडियो बनाकर
वायरल कर दिया वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है निंदनीय है, मणिपुर एक ऐसा राज्य है जहां की जनसंख्या बहुत कम है, यहाँ पर महिलाएं हर चीज में आगे रहती हैं, यहाँ के बाजारों में अधिकतर दुकानें महिलाएं ही चलाती है, उस राज्य में करीब 2 महीने से अधिक समय से लोग दंगे कर
रहे है , अत्याचार हो रहे हैं लोगों के घर
जला दिए गए हैं, सैकड़ों के करीब इन दंगों में लोगों की हत्या कर दी गयी
है, सरेआम हथियार लेकर बेख़ौफ़ घूमते हुए
लोग जिन्हें किसी का डर ही नहीं है !
यहां की साक्षरता दर भी बहुत अच्छी है, उसके बाद भी युवाओं और किशोरों ने अपने जो उनके मसले हैं उन्हें खुद
ही निपटाने हैं इसलिए बन्दूक लेकर चल देते हैं ! और अपने ही राज्य की स्त्री को
मात्र एक देह समझ उस पर हर तरह के अत्याचार करना शुरू कर देते हैं ! बेहद दुख होता
है कि स्त्रियों के साथ ऐसा क्यों किया ? क्योंकि वे शारीरिक रूप से कमजोर
हैं इसलिए ? क्या स्त्रियों का शरीर उनकी कुंठा को शांत करने के लिए
ही है ? न जाने ऐसा क्यों सोचते हैं पुरुष ? क्या उनके घर में महिलाएं नहीं होती ? क्या उनकी माँ, बहन, बीवी, बेटी या अन्य किसी अपनी रिश्तेदार स्त्री का शरीर वैसा नहीं होता ? ऐसे ही अनगिनत सवाल जेहन में पैदा करते हैं इस तरह के होने वाले
कुकृत्य !
सब कुछ वैसा ही होता है फिर किसी अनजान महिला के लिए मन
में इस तरह के विचार क्यों पैदा हो जाते हैं ?
क्या एक बार को भी उनके मन में यह ख्याल नहीं आता कि हमें भी किसी स्त्री
के शरीर ने ही जन्म दिया है, तो हम उन जैसी ही किसी अन्य स्त्री
के साथ कैसे दुराचार कर सकते हैं? इनकी वजह से ही तो हम इस दुनिया
में आए हैं ! क्यों नहीं लोग महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और उनके
प्रति अहिंसा जैसी भावनाएं क्यों नहीं रखते हैं?
मुझे लगता है,सबसे पहले एक स्त्री को दूसरी
स्त्री की इज्जत करना आना चाहिए तभी तो वह अपने बच्चों को सही शिक्षा दे पायेगी कि
स्त्रियों की इज्जत करो, उनके प्रति सम्मान और अहिंसा की
भावना रखना बहुत जरूरी है ! जिस तरह की मणिपुर में दिल को दर्द से भर देने वाली महिलाओं
के साथ हिंसा हुई है उसको देखते हुए बहुत जरूरी है ! यह कदम उठाना ही होगा कि अपने
बच्चों खासकर बेटों को साक्षर होने के साथ-साथ यह नैतिक संस्कार दिए जाने भी बहुत
जरूरी हैं !
यह सोचकर दिल घबरा जाता है और शर्म से सिर झुक जाता
है कि किस तरह से वह स्त्रियां अपने आप को
उस भीड़ में खुद को इस प्रकार देख पायी होंगी? उनके मन पर क्या बीती होगी और फिर
उसके बाद में उनके साथ दुराचार किया जाना कितना अन्याय पूर्ण है ! उनके दर्द को
समझना बहुत जरूरी है और उस दर्द को समझ कर उचित कदम उठाना बहुत जरूरी है क्योंकि
केवल किताबी शिक्षा से कभी कोई काम होगा ही नहीं !
हम भारतीय
हैं और हमें भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए इसलिए हमारे विचार हमारी आत्मा हमारी
बुद्धि और हमारे कर्म इसमें सहयोगी होंगे तभी हम महिलाओं की इज्जत कर सकेंगे और एक
सच्चे भारतीय कहलाएंगे अन्यथा हम इन्सान भी कहाँ ?
सीमा असीम, बरेली
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