दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं जो कहते हैं वही करते हैं और जो नहीं कहते हैं वह नहीं करते लेकिन ऐसे भी लोग होते हैं जो कहते हैं वह कभी करते नहीं और जो करते हैं वह कभी करते नहीं ऐसे ही तो नहीं कहा जाता कथनी और करनी में अंतर
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चांद को देखना एक तक देखते जाना घटते बढ़ते और 16 कलाओं से परिपूर्ण होते जाना कितना सरल है ना चांद को देखना चांद की पवित्र चांदी में नहाई धरती पर अपनी परछाई को पकड़ने की कोशिश करना छोटी बड़ी आड़ी तिरछी लंबी नाटी परछाई को पकड़ कर अपने गले से लगाने की कोशिश करना सरल है ना परछाई को नापना इतना ही सरल तो है बस तुम्हें पढ़ना और सिलसिलेवार लिखते चले जाना चाँद का आसमां में मुस्कुराना सीमा असीम 23,2,21
पहाड़ बड़े कोमल होते हैं इन से बहती है प्रेम धाराएं ग्लेशियर के रूप में दूर से लगते हैं निष्ठुर कठोर करीब से जाकर देखो तो समझ आते हैं बडे गुणकारी होते हैं फूल फल और औषधियों से भरे यह हरे भरे पहाड़ उन्नत मस्तिष्क उठाए खड़े हुए अटल अडिग मेरे प्रिय पहाड़... सीमा असीम
कितना अच्छा लगता है सुबह सुबह सूरज का निकलना पंछियों का चहकना फूलों का खिलना और रोशनी का बिखर जाना रात के अंधेरे को मिटाते हुए जब रोशनी होती है तो मन खुशी से प्रफुल्लित होता है बहुत अच्छा लगता है मुझे दुनिया को रोशनी में देखना मुझे नहीं पसंद अंधेरा नहीं पसंद मुझे मुरझाना नहीं पसंद मुझे रोशनी का कम हो जाना लेकिन सुनो इस सब से भी ज्यादा अच्छा लगता है मुझे तुम्हारा मुस्कुराना तुम्हारा मुझ से बतियाना....... सीमा असीम 3, 10, 20
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