काफल

 चलो आओ जिंदगी को जीने चलते हैं

लो तुम मेरा हाथ पकड़ो

हम बहुत दूर तक चलते हैं

तुम मेरा सहारा ले लेना

 जब जरूरत पड़े तुम्हें ऊंचे नीचे रास्ते पर 

वो देखो काफल पकने लगा है पहाड़ों पर 

हरा हरा पेड़ लाल लाल फलों से भरने लगा है 

तुम पके हुए काफल मुझे तोड़ कर दो न

मैं स्वाद लेकर बताउंगी

कि कैसा है

अगर मीठा निकला

तो तुम्हें खिला दूंगी

अगर खट्टा हुआ

तो खुद खा लूँगी 

फिर लाल लाल काफल

खूब सारे तोड़ कर

अपनी झोली में भरकर ले आऊंगी

कोई बात नहीं अगर पड़ गया

कपड़ों पर धब्बा

लाल सुर्ख लाल

तो भी क्या हुआ

लाल रंग तो प्रेम का प्रतीक है

हैं न?



यह लाल काफल

हमें जीने  की सच्ची राह दिखा देंगे

तो आओ चलो न

 जिंदगी को जीने और काफल को खाने...

सीमा असीम



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