सोचती हूँ कि दोगला क्या शब्द होता है
फिर मुझे लगता है दोगला वह होता है
जो कभी अपनी बात पर कायम नहीं रहता
कभी वह वफा नहीं कर सकता
उसका धर्म होता है सिर्फ बेवफाई
अपने फायदे के लिए हर गलत काम करने वाला
जो एक दिन खुद अपनी नजरों में ही गिर जाता है
जब तक मतलब रहा साथ चलना
फिर स्वार्थ के लिए किसी को मार देना
उसका सबकुछ लूट कर
बर्बाद कर देना
बस यहीं काम होता है
एक दोगले इंसान का
सीमा असीम
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