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Showing posts from July, 2021

सावन

 कल फिर रोया सावन  तड़प तड़प के रोया  तुमने जी दुखाया   बिन बात के सताया  कितना समझाया पर  मन समझ नहीं पाया  सोते हुए जगते रोया  खाते रोया पीते रोया  मचल मचल के रोया  तरस तरस के रोया  मजबूर था दिल के हाथों  किसी भी हाल दिल न बहला  आंखों के प पोटे सूज गए लाल लाल  गालों पर बहती रही लंबी लंबी धार  बिखर गए थे बाल चारों तरफ  जिस्म हो गया बेजान जार जार  बिस्तर से तन को उठाया ना गया  हाल मन का किसी से छुपाया ना गया  बेदर्दी निर्दई जालिम  क्या सुख पाया तूने  सता कर रुलाकर तड़पा कर  प्यास एक की तक तो तुझ से पूछा या ना गया दुनिया भर में तू बरसता फिरा  तब भी तू रह गया प्यासा का प्यासा  मुझसे भी कहीं ज्यादा तरसता तड़पता मचलता हुआ सीमा असीम 
 जिंदगी की राहों पर चलना सिखाए  इंसानियत का पढ़ाई पाठ और चीन सिखाएं  धैर्य धर्म-कर्म का पाठ पढ़ाते हुए  हर मुश्किल में हर कठिनाई में बस मुस्कुराना सिखाएं  डग डग पर हो उसका साथ  परछाई की तरह रिश्ता निभाएं  सम्मान के साथ जिसके आगे झुक जाए बार-बार सर  बस वही श्रेष्ठ गुरु कहलाये  सूर्य से ऊर्जा होश में और चांद से शीतलता  अंबर सा विस्तार है उनमे  नदी की सी निश्छल कल कल कल कल  गुरु की गरिमा से बड़ा नहीं कोई और ना उससे बड़ा कोई आकाश है मन में रखो विश्वास सच्ची भक्ति ही कर देगी बेडा पार 
करीब 6 महीने से घर से बाहर हम लोगों झाँके नहीं थे. कभी लॉकडाउन कभी कोरोनावायरस और कभी लहर बस इन्हीं सब चीजों के बीच झूल रहे थे और डिप्रेशन का शिकार हो रहे थे घर से बाहर निकल पाना भी एक बहुत बड़ी त्रासदी है एक ही कमरे में बैठे गाना तेरा ना सोचते रहना न जाने कितने बुरे बुरे ख्याल आगमन को परेशान करते रहते हैं थोड़ी देर को घर घर से बाहर जाने को मिले थे शायद ना कर दो पेशंट कम हो जाए ऐसा यह सोचते सोचते कितना दिन निकल गए थे आखिर हम लोगों ने करीब 10 महीने के बाद एक प्लान बना लिया घूमने का  हमारा पसंदीदा प्रदेश हिमाचल प्रदेश यह पिक अभी कहीं घूमने जाने का प्लान बनता तो हम लोग हिमाचल प्रदेश जाने का ही प्लान बनाते हैं कि वहां की हरियाली वहां की वादियां और वहां की हवाएं शुद्ध हो मतलब तुम होती और मन को तरोताजा भी करती और फिर ऐसे माहौल से निकल कर जा रहे थे तब तो फ्रेश एयर में जाने के लिए सबसे अच्छा जगह अगर कोई है तो हिमाचल प्रदेश ही लगी मुझे  हालांकि हम लोग उत्तराखंड भी जा सकते थे घर के करीब भी है उत्तराखंड लेकिन वहां पर आईटी पीएसी की रिपोर्ट लेकर जानी थी और भी बहुत सारे झंझट है जबकि हिमाचल ...
 मैं सच में जानना चाहती हूँ हाँ समझना चाहती हूँ कि तू ऐसा क्यों है ? क्यों झूठी बातें करता है और खुद की नजरों में ही गिर जाता है बार बार वही हरकतें जाहिलों की तरह ,,, हद है वाकई हद है , अब तो सुधार जाओ आखिर कब तक करोगे यह सब ? कभी तो तुझे समझना चाहिए । कोई तुझे बदनाम कर रहा है अपनी नजरों से गिरा रहा है फिर भी तू उसी के पीछे लगा हुआ है । तुझे कोई फर्क नहीं पड़ता होगा लेकिन उनके बारे में तो सोचा कर जो तुझसे जुड़े हुए हैं और जो तेरे अपने हैं कितना दुख होता होगा उन लोगों को तेरी इन गिरी हरकतों की वजह से । आज फिर रवीना ने माधव को डांटते हुए कहा । यह जानते हुए भी कि इसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा यह ऐसा ही रहेगा क्योंकि इसकी तो आदत ही पड गयी है यही सब करने की बस वह रो धो कर और चीख चिल्ला कर खुद को दुख पहुंचा कर शांत हो जायेगी और पहले की ही तरह इसकी देखभाल और परवाह करने लगेगी । 
 मेरी आँखों में भरे हुए यही आँसू तेरी बेवफाई की दास्तां कहते हैं तू गिरा औऱ गिरता चला गया शर्म की एक लकीर भी नहीं चेहरे पर तेरे तू क्या समझता है कि तू अपनी गिरी हरकतों से दुनिया जीत लेगा अरे बेशर्म तू खुद को न जीत पाया हर बार हारता ही रहा औऱ बेशर्मी को इज्जत समझता रहा अब तू जा चाहें कहीं भी जा नहीं करुँगी तेरी परवाह न तेरी कोई इज्जत मेरी नज़र में रही अब