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Showing posts from October, 2019
तुझे लेकर बाहों में तेरा मुंह चूम लेना है यू ही तेरे प्यार में अब जीना और मरना हैं सुनो प्रिय    कितना प्यारा रिश्ता होता है न प्रेम का ,,, दो लोगों के बीच बेहद स्नेहिल प्यारा और जान कि बाजी लगा देने वाला ,, खुद की खुशी से अनभिज्ञ होकर दूसरे की खुशी में निसार हो जाने वाला ,,,,, हाँ प्रिय मैं तुम्हें ऐसा ही प्रेम करती हूँ सच्चाई से भरा निर्मल जल धारा सा बहता हुआ प्रेम ,,,,, कोई कठिनाई नहीं , कोई मुश्किल नहीं , कोई भी रुकावट नहीं ,, क्योंकि प्रेम अगर सच्चा है तो वो अपना रास्ता स्यम बना लेता है , अपने आप चलता रहता है उसे कोई परवाह नहीं होती हवाओं के विपरीत होने पर भी कभी दम नहीं तोड़ता ,,, हैं न प्रिय क्योंकि प्रेम को जीवित रखने के लिए खुद के भीतर प्रेम और विश्वास का होना जरूरी है ,,,, जब कभी मैं बहुत दुखी हो जाती हूँ तब अपने मन को तसल्ली देती हूँ की कष्ट थोड़े से सामी के लिए है बस कुछ ही समय में हमारा प्रेम पहले से भी ज्यादा हारा भरा होकर लहलहाने लगेगा ,,,, मुझे पता है अगर मैं तुमसे सच्चा प्रेम करती हूँ तो मेरे विश्वास को तुम भी नहीं तोड़ पाओगे और मुझे मुझसे भी ज्यादा प्र...
तेरे बिन  है मेरा जग सूना साँस साँस में तेरा बसना अश्कों की माला से मैनें तुझे सजाया है सजना तेरे बिन  है मेरा जग सूना तू ही अम्बर है मेरा तू ही मेरा जीवन तुझ बिन रहूं मैं कैसे सजना तेरे बिन  है मेरा जग सूना यादों का है मधुर खजाना सुख सपनों में है खो जाना दरिया से गहरा है मेरा प्यार तुझ बिन हो कैसे नैया पार ओ मेरे निर्मल जीवन की पतवार तेरी बातों में खोया है मेरा मन तेरे बिन  है मेरा जग सूना  seema  aseem
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अपनी ही नजरों में न गिरना कभी ओ मेरे सनम  फिर  दुनिया भला कैसे पलकों पर बिठाएगी तुम्हें  सुनो  सनम         न जाने  कैसे तुम साँस ले पाते होंगे ?  कैसे तुम जी पाते होंगे ? न जाने कैसे तुम अपनी नजरों से आईने में खुद को देख पाते होंगे ? क्योंकि तुम्हारे जीवन का कोई भी मूल्य नहीं है ,,,न ही तुम्हारी कोई वेल्यू ,,,अगर होती तो तुम कभी भी इस तरह की हरकतें नहीं करते ,,न ही कभी मेरी आँखों में आंसू भरते ,,काश तुम्हारे दिल में भी उतनी ही सच्ची भावना होती ,,,काश तुम्हारा  मन भी पानी की  तरह से निर्मल और साफ होता क्योंकि प्रिय प्रेम में कोई भेद नहीं होता और जहाँ भेद है वहां प्रेम नहीं है ,,,,मेरी नजर में प्रेम में शरीर नहीं होता है लेकिन तुम्हारे लिए तो प्रेम में सबसे अहम् किरदार शारीरिक सुख ही है तभी तो तुम अपनी तृष्णा मिटा कर खुश हो जाते हो ,,,तुम कैसे समझ सकोगे प्रेम की आत्मीक गहराई को  .... आत्मा की पवित्रता को। ..प्रिय प्रेम इतना पवित्र बंधन होता है जिसे किसी भी अबलम्बन की जरुरत नहीं होती है ,,, न तन की , न भाषा क...
तुझे पुकारु या न पुकारु तू हंसेशा सामने रहता है   ओ मेरे सनम तुझ पर ही मेरा दिल कुर्बान रहता है ,,,, सुनो प्रिय      आज मन बहुत उदास था और बहुत दुखी भी क्या तुम्हें कभी मेरी याद आती भी है या नहीं अगर आती है तो मुंह से कह दिया करो हमेशा मन मे क्यों रखते हो ? कह क्यों नहीं देते ? कभी कहने भी नहीं देते हो ...सनम सुनो जब किसी से प्यार करता है मन तो फिर हरदम उसके ही साथ रहता है उसे ही जीना चाहता है और उसकी खुशी मे ही खुशी पा लेता है फिर तुम मुझे क्यों कभी कभी दुख के भँवर मे डूबा देते हो किसलिए खुशियों को आहूत कर देते हो ? क्यों आँखों में अशकों की माला पहना देते हो ? बताओ न मुझे ,,,, मैं जानना चाहती हूँ ,, क्योंकि मुझे खामोशी बहुत चुभती हैं, बहुत ही ज्यादा कष्ट देती हैं और दर्द के गहरे गर्त में डुबो देती हैं ....तब मैं जी नहीं पाती हूँ ....और सच कहूँ तो मैं जीना नहीं चाहती हूँ तब ....साँस भी नहीं लेना चाहती हूँ ,,, लेकिन प्रेम की जो जोत मेरे मन में जल रही है वो मुझे निराशा की हर लहर से बाहर निकाल लाती है और मैं मुस्कुरा देती हूँ रोते रोते हंस देती हू...
ओ सनम जब भी तुमको पुकारा है मैंने तुम नजर आए हो सदा मेरे सामने सनम सुनो प्रिय     अशकों के गहरे  में  सागर डूबा हुआ मेरा मन बिलकुल भी उबरना ही नहीं चाहता और गहरी तलहटी में उतर कर वह ढूंढ लाने को उतावला हो जाता है जो मेरी पकड़ में है लेकिन हाथ से फिसल गया था और उस एक पल की कीमत उसके साथ साथ मेरा मन भी चुका रहा हैं इतनी ज्यादा तकलीफ दर्द घुटन और बेचैनी देता है कि जान ही खींच लेता है मानों जीवन ही खत्म हो जाता है न जीते बन पाता है और न ही मरते हुए ही तब मुझे सच में समझ नहीं आता कि गलती किसकी है अगर तुम्हारी तो मुझे सजा क्यों ? आखिर किसलिए इतनी तकलीफ होती है मुझे ? सनम मुझे बस इतना बता दो कि मेरी सच्चाई में और निष्ठा में कोई कमी रह गयी थी या मैंने सच्चा प्यार किया उसकी सजा दी है मुझे ...सनम प्रेम कोई पल भर का साथ नहीं है यह तो आजीवन निभाया जाने वाला बंधन है जो बिना बंधे ही बंधा रहता है इसमें कुछ कहने की जरूरत नहीं होती कोई शब्द कभी कुछ नहीं कहते बल्कि बिना कहे ही सब कह देते हैं सिर्फ अहसास ही हमें सब बता जाते हैं ,,, हमारा दिल ही काफी है किसी को प्या...